What happened in Rajya Sabha that led to clash between Kharge and Jairam Ramesh and Sonia Gandhi supported Left राज्यसभा में क्या हुआ कि आपस में भिड़ गए खरगे और जयराम रमेश; सोनिया ने दिया लेफ्ट का साथ, India News in Hindi - Hindustan
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राज्यसभा में क्या हुआ कि आपस में भिड़ गए खरगे और जयराम रमेश; सोनिया ने दिया लेफ्ट का साथ

मल्लिकार्जुन खरगे ने उनके बयानों का खंडन करते हुए स्पष्ट किया कि विपक्ष इस बिल का समर्थन कभी नहीं कर सकता है। खरगे के इस कड़े रुख के तुरंत बाद विपक्षी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

Fri, 13 Feb 2026 06:31 AMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली।
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राज्यसभा में क्या हुआ कि आपस में भिड़ गए खरगे और जयराम रमेश; सोनिया ने दिया लेफ्ट का साथ

संसद के बजट सत्र के दौरान विपक्षी खेमे में उस समय असहज स्थिति उत्पन्न हो गई जब राज्यसभा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रतिपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और कांग्रेस के ही वरिष्ठ सांसद जयराम रमेश आपस में भिड़ गए। दोनों ने सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे की बातों पर असहमति जताई। यह वाकया औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक पर चर्चा के दौरान देखने को मिला।

विधेयक पर चर्चा के दौरान जयराम रमेश ने कहा कि यह बिल मजदूर विरोधी है, लेकिन विपक्षी दल इसे समर्थन देने के लिए मजबूर हैं। रमेश के इस बयान के चंद मिनटों बाद ही मल्लिकार्जुन खरगे ने उनके बयानों का खंडन करते हुए स्पष्ट किया कि विपक्ष इस बिल का समर्थन कभी नहीं कर सकता है। खरगे के इस कड़े रुख के तुरंत बाद विपक्षी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

सदन में विधेयक पर हुई संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने विपक्ष के सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इस संशोधन विधेयक के जरिये कानून में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है, सिर्फ उन तीन पुराने कानूनों को वापस लेने का प्रावधान संहिता में जोड़ा जा रहा है जिन्हें इसमें समाहित कर लिया गया था।

काम के घंटे आठ से बढ़ाकर 12 करने के आरोपों पर उन्होंने कहा कि नयी श्रम संहिताओं में सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम न लेने का प्रावधान है जो विश्व श्रम संगठन के अनुरूप है। इसमें न्यूनतम मजदूरी को अनिवार्य बनाया गया है जबकि पहले यह सिर्फ एक निर्देश था जिसका पालन करना या न करना राज्यों के ऊपर था।

सोनिया ने दिया लेफ्ट का साथ

वहीं, संसद में गुरुवार को एक अभूतपूर्व एकजुटता दिखी। एक तरफ जहां केरल में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस और वामपंथी दल के बीच तीखी राजनीतिक लड़ाई चल रही है, वहीं संसद में वे एक-दूसरे के साथ अभूतपूर्व एकजुटता दिखाते नजर आए। गुरुवार को वामपंथी सदस्यों ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर नए श्रम कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में भाग लिया। इसके बाद CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास ने श्रम कानूनों के खिलाफ देशव्यापी आम हड़ताल का मुद्दा 'जीरो ऑवर' (शून्यकाल) में उठाया।

आश्चर्यजनक रूप से, इस मुद्दे पर कांग्रेस की शीर्ष नेता सोनिया गांधी ने ब्रिटास का समर्थन किया। सोनिया गांधी आम तौर पर शून्यकाल के उल्लेखों पर हस्ताक्षर नहीं करती हैं। उन्होंने ब्रिटास के उल्लेख के साथ अपनी सहबद्धता व्यक्त करने के लिए फॉर्म पर हस्ताक्षर किए। उनके इस कदम ने कांग्रेस और वाम दल दोनों के कई सदस्यों को हैरान कर दिया।