भांगर ब्लास्ट मामले में TMC का पूर्व विधायक गिरफ्तार, NIA ने घोषित किया था भगौड़ा
पश्चिम बंगाल में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी के नेताओं पर लगातार ऐक्शन हो रहा है। इसी क्रम में भांगर ब्लास्ट मामले में आरोपी टीएमसी के पूर्व विधायक शौकत मोल्ला को NIA द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया है।

West Bengal News: भांगर ब्लास्ट के मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (NIA) ने तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक सौकल मोल्ला को गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले आज ही एजेंसी ने ब्लास्ट मामले में मोल्ला को भगौड़ा घोषित किया था। इसके बाद उसकी गिरफ्तारी के लिए तृणमूल कांग्रेस (TMC) कार्यालय और मोल्ला के तमाम ठिकानों पर छापेमारी की थी।
मोल्ला की गिरफ्तारी के बाद एनआईए की तरफ से एक बयान जारी करके पूरी स्थिति को साफ किया गया। जारी बयान में कहा गया, "पूर्व विधायक और फरार आरोपी शौकत मोल्ला के घर और कार्यालय र छापामारी अभियान चलाया गया था। इस अभियान में आरोपी से जुड़े आठ ठिकानों पर रेड की गई। इसमें आरोपी को गिफ्तार किया गया। बाद में परिवार के बाकी सदस्यों से पूछताछ के आधार पर आरोपी के पुत्र को भी गिरफ्तार किया गया है।
इससे पहले कैनिंग पूर्व विधानसभा से टीएमसी का नेतृत्व करने वाले मोल्ला को इस मामले में एनआईए ने कई बार संपर्क करने की कोशिश की थी। जब यह संभव नहीं हुआ तो एनआईए ने आज ही उसे भगौड़ा घोषित करते हुए बीएसएफ को इसकी जानकारी दी थी ताकि मोल्ला देश से बाहर न जा पाए।
क्या है भांगर ब्लास्ट मामला?
दरअसल यह पूरा मामला दक्षिण 24 परगना जिले के दक्षिण बामुनिया में 19 मार्च को हुए एक धमाके से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि यहां पर चुनाव के लिए देशी बम बनाए जा रहे थे। इसी दौरान हुए धमाके में एक व्यक्ति कि मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इस मामले में तृणमूल कांग्रेस से दो बार विधायक रह चुके पूर्व विधायक शौकत मोल्ला का नाम सामने आया। इसके बाद वह एनआईए के निशाने पर आ गया।
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार जाने के बाद शौकत की परेशानी बढ़ने लगी। शुभेंदु सरकार ने उनकी सिक्योरिटी वापस ले ली थी और एनआईए को फ्री हैंड दे दिया था।
ममता बनर्जी के लिए मुश्किल हो रही राह
मोल्ला की गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है, जब ममता बनर्जी अपनी पार्टी को बिखरने से बचाने की कोशिश कर रही हैं। पार्टी के बागी विधायक ममता को मार्गदर्शक मंडल में भेजने पर उतारू हैं, वहीं दूसरी तरफ अब सांसदों की तरफ से भी बगावत के सुर फूटने लगे हैं। 1998 में जिस पार्टी को ममता ने अपने खून पसीने की मेहनत के खड़ा किया था। आज हालत यह है कि उनके द्वारा बुलाई गई पार्टी विधायकों और सांसदों की बैठक में में एक दर्जन जनप्रतिनिधि भी नहीं पहुंचे। स्वयं ममता भी अपनी सीट हार चुकी हैं और भतीजे अभिषेक के खिलाफ पार्टी नेता अपनी नाराजगी पहले ही जता चुके हैं। ऐसे में ममता के लिए पार्टी बचाना आसान नहीं होने वाला।




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