Voluntary sex work is not illegal supreme court on brothel and prostitution मर्जी से वेश्यावृत्ति अपराध नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को दी नसीहत; कानून भी बताया, India News in Hindi - Hindustan
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मर्जी से वेश्यावृत्ति अपराध नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को दी नसीहत; कानून भी बताया

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई बालिग अगर अपनी इच्छा से सेक्स वर्क करता है तो इसे आपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसे किसी सेक्स वर्कर को हिरासत में लेने या फिर प्रताड़ित करने की जरूरत नहीं है। 

Mon, 1 June 2026 01:57 PMAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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मर्जी से वेश्यावृत्ति अपराध नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को दी नसीहत; कानून भी बताया

सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को हिदायत देते हुए कहा है कि अगर कोई भी बालिग अपनी इच्छा से सेक्स वर्क करती है तो इसे अपराध के दायरे में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसी महिलाओं को गिरफ्तार करने और उन्हें प्रताड़ित करने की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कमर्शियल सेक्स के लिए मानव तस्करी की जाती है और किसी को धोखे से या फिर मजबूर करके सेक्स करवाया जाता है तो ऐसे केस में इमोरल ट्रैफिक ऐक्ट (ITPA) लागू होता है।

मर्जी से सेक्स वर्क अपराध नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कह दिया है कि अपनी मर्जी से सेक्स वर्क करना गैरकानूनी नहीं है। वहीं वेश्यालय या कोठे चलाना गैरकानूनी है। बता दें कि इमोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन ऐक्ट 1956 में बनाया गया था। इसके तहत कई धाराएं हैं और कोठे और वेश्यालय चलाने का अपराध बताया गया है। इस ऐक्ट की धारा 3 में कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति देह व्यापार के लिए अपनी जगह को किराए पर देता है या फिर उपयोग की अनुमति देता है तो उसे 1 से 3 साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है।

ITPA में क्या है

इसकी धारा 4 में कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति सेक्स वर्कर की कमाई का इस्तेमाल करता है तो यह अपराध है। यह धारा सेक्स वर्कर के परिवार के लोगों पर भी लागू होती है। धारा 5 में कहा गया है कि जबरदस्ती, बहलाकर या फिर मजबूर करके किसी को देह व्यापार के लिए मजबूर करना भी अपराध है। धारा 7 में कहा गया है कि सार्वजनिक स्थान या किसी धार्मिक स्थान के 200म ीटर के दायरे में सेक्स वर्क करना अपराध है। हालांकि इस कानून में कहीं भी सहमतिसे सेक्स का जिक्र नहीं किया गया है।

जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस एएस बोपन्ना की बेंच ने बुद्धदेव कर्माकर बनाम बंगाल सरकार के मामले में भी बड़ा फैसला सुनाया था। यह मामला सेक्स वर्करों के पुनर्वास और अधिकारों को लेकर था। कोर्ट ने कहा था कि जिस तरह से संविधान के अनुच्छेद 21 में हर व्यक्ति को जीवन जीने का अधिकार मिला है उसी तरह सेक्स वर्कर भी भारत के नागरिक हैं और उन्हें कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए।

लॉ कमीशन ऑफ इंडिया की जांच में कई बार सामने आया है कि सेक्स वर्कर्स के साथ पुलिस का रवैया ठीक नहीं होता है। यह उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाता है। कोर्ट कई बार कह चुका है कि सहमित से सेक्स वर्क करना अपराध नहीं है। ऐसे में अगर कोई आईटीपीए की बाकी धाराओं का उल्लंघन नहीं कर रहा है तो उसे परेशान नहीं करना चाहिए।

इस फैसले में जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन ने कहा कि अगर कोई अपनी मर्जी से सेक्स वर्क कर रहा है तो उसे हिरासत में रखने, सुधार गृह बेजने की जरूरत नहीं है।