Vande matram new rules National Song Jana Gana Man National Anthem वंदे मातरम को लेकर नए नियम, राष्ट्रगान से पहले गाया जाएगा; खड़े होना अनिवार्य, India News in Hindi - Hindustan
More

वंदे मातरम को लेकर नए नियम, राष्ट्रगान से पहले गाया जाएगा; खड़े होना अनिवार्य

वंदे मातरम को लेकर सरकार ने नए नियम जारी कर दिए हैं। इनके तहत राष्ट्रगान से तुरंत बाद 6 छंदों वाला वंदे मातरम गाया जाएगा। साथ ही कहा गया है कि इस दौरान सभी को खड़ा होना अनिवार्य होगा। गीत कुल 3 मिनट 10 सेकंड का है।

Wed, 11 Feb 2026 11:48 AMNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
share
वंदे मातरम को लेकर नए नियम, राष्ट्रगान से पहले गाया जाएगा; खड़े होना अनिवार्य

वंदे मातरम को लेकर सरकार ने नए नियम जारी कर दिए हैं। इनके तहत राष्ट्रगान से तुरंत बाद 6 छंदों वाला वंदे मातरम गाया जाएगा। साथ ही कहा गया है कि इस दौरान सभी को खड़ा होना अनिवार्य होगा। गीत कुल 3 मिनट 10 सेकंड का है। खबर है कि नियमों में बताया गया है कि अगर राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत एक साथ गाए जाने हैं, तो पहले वंदे मातरम गाया जाएगा।

शुरू में वंदे मातरम की रचना स्वतंत्र रूप से की गई थी और बाद में इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास आनंदमठ (1882 में प्रकाशित) में शामिल किया गया। इसे पहली बार 1896 में कलकत्ता में कांग्रेस अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने गाया था। राजनीतिक नारे के तौर पर पहली बार वंदे मातरम का इस्तेमाल 7 अगस्त 1905 को किया गया था। 1950 में संविधान सभा ने इसे भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया।

क्या हैं नियम

वंदे मातरम को कई आधिकारिक कार्यक्रमों में गाया जाना अनिवार्य किया गया है। इनमें ध्वजारोहण के दौरान, कार्यक्रमों में राष्ट्रपति के आने से पहले और जाने के बाद, राज्यपालों के आने से पहले और जाने के बाद शामिल है। पद्म पुरस्कार जैसे समारोहों के दौरान भी वंदे मातरम गाया जाना जरूरी है। इसके अलावा सरकार ने कार्यक्रमों की सूची भी जारी की है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:कांग्रेस यहां कुर्सी ताकती रह गई, शिवसेना UBT ने समर्थन दे बनवा दिया BJP मेयर
ये भी पढ़ें:बांग्लादेश की लॉटरी, भारत के लिए संकट; US वाली डील कपड़ा उद्योग के लिए बनी विलेन
ये भी पढ़ें:दो वंदे भारत ट्रेनें होंगी ठप, एक नई होगी शुरू; जानिए किस रूट पर होगा लागू

अंग्रेजों ने की रोक लगाने की कोशिशें

PIB के अनुसार, गाने और नारेदोनों के तौर परवंदे मातरम के बढ़ते प्रभाव से घबराकर ब्रिटिश सरकार ने इसके प्रसार को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए। नए बने पूर्वी बंगाल प्रांत की सरकार ने स्कूलों और कॉलेजों में वंदे मातरम गाने या बोलने पर रोक लगाने वाले परिपत्र जारी किए। शैक्षणिक संस्‍थानों को मान्यता रद्द करने की चेतावनी दी गई, और राजनीतिक आंदोलन में हिस्सा लेने वाले छात्रों को सरकारी नौकरी से निकालने की धमकी दी गई थी।

नवंबर 1905 में, बंगाल के रंगपुर के एक स्कूल के 200 छात्रों में से हर एक पर 5-5 रुपये का जुर्माना लगाया गया, क्योंकि वे वंदे मातरम गाने के दोषी थे। रंगपुर में, बंटवारे का विरोध करने वाले जाने-माने नेताओं को स्पेशल कांस्टेबल के तौर पर काम करने और वंदे मातरम गाने से रोकने का निर्देश दिया गया। नवंबर 1906 में, धुलिया (महाराष्ट्र) में हुई एक विशाल सभा में वंदे मातरम के नारे लगाए गए। 1908 में, बेलगाम (कर्नाटक) में, जिस दिन लोकमान्य तिलक को बर्मा के मांडले भेजा जा रहा था, वंदे मातरम गाने के खिलाफ एक मौखिक आदेश के बावजूद ऐसा करने के लिए पुलिस ने कई लड़कों को पीटा और कई लोगों को गिरफ्तार किया।

इंडिया न्यूज़ , विधानसभा चुनाव और आज का मौसम से जुड़ी ताजा खबरें हिंदी में | लेटेस्ट Hindi News, बॉलीवुड न्यूज , बिजनेस न्यूज , क्रिकेट न्यूज पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।