रूसी तेल खरीद पर दी जाने वाली छूट खत्म करने की तैयारी में अमेरिका, भारत पर इसका कैसा असर?
इस छूट के खत्म होने से भारत के लिए कच्चे तेल का संकट एक बार फिर गहरा सकता है। गौरतलब है कि भारत ने पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए अतिरिक्त 25% टैरिफ के बाद रूसी तेल की खरीद बंद करने का फैसला किया था।

अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के बीच दुनिया के तेल और गैस बाजार से जुड़ी एक बड़ी खबर आ रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को अमेरिकी कांग्रेस की सुनवाई के दौरान संकेत दिया कि अमेरिका रूसी तेल की खरीद पर दी गई अपनी प्रतिबंध छूट को जल्द से जल्द समाप्त करने की योजना बना रहा है। भारत उन प्रमुख देशों में शामिल रहा है जिसने इस अमेरिकी छूट का सबसे ज्यादा फायदा उठाया है, क्योंकि इसी छूट के चलते भारत को रूस से कच्चे तेल की खरीद दोबारा शुरू करने का मौका मिला था।
मार्को रुबियो ने सीनेट की विदेश नीति समिति के सामने स्पष्ट किया कि रूसी तेल पर दी गई वर्तमान छूट सीमित समय के लिए थी। इसे केवल इसलिए लागू किया गया था ताकि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी से वैश्विक तेल आपूर्ति में आई बाधा को कम किया जा सके और बढ़ती कीमतों पर काबू पाया जा सके।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा, "हम इस छूट को जितनी जल्दी हो सके समाप्त करना चाहते हैं क्योंकि हमारे देश की मूल नीति रूस के तेल पर प्रतिबंध लगाने की रही है। ये केवल कुछ समय के लिए दी गई छूट थी ताकि वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बनी रहे।"
अमेरिका ने पहली बार मार्च में इस छूट की घोषणा की थी। इसके बाद इसे दो बार बढ़ाया गया और अब इस छूट की अंतिम समय सीमा 17 जून को समाप्त होने जा रही है। जब डेमोक्रेटिक सदस्य जीन शाहीन ने पूछा कि क्या इसे दोबारा बढ़ाया जाएगा तो रुबियो ने कहा कि इस पर अंतिम फैसला अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा लिया जाएगा।
भारत पर क्या होगा इसका असर?
इस छूट के खत्म होने से भारत के लिए कच्चे तेल का संकट एक बार फिर गहरा सकता है। गौरतलब है कि भारत ने पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए अतिरिक्त 25% टैरिफ के बाद रूसी तेल की खरीद बंद करने का फैसला किया था। ट्रंप ने तब भारत पर यूक्रेन युद्ध के लिए पुतिन को फंडिंग करने का आरोप लगाया था। वाइट हाउस के दस्तावेजों के अनुसार, भारत ने अमेरिका के साथ हुए द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत रूस से कच्चे तेल की खरीद रोकने की प्रतिबद्धता जताई थी। इसके बदले में राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत से 25% का अतिरिक्त टैरिफ हटा दिया था।
वेनेजुएला की तरफ झुकाव बढ़ाने की कोशिश
रूस से तेल खरीद रोकने के बाद अमेरिका ने भारत को वेनेजुएला से तेल खरीदने के लिए प्रेरित किया था, विशेषकर वेनेजुएला में हुए अमेरिकी सैन्य छापे और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़े जाने के बाद। आपको बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान युद्ध छिड़ने के बाद तेहरान ने होर्मुज जलमार्ग को ब्लॉक कर दिया। यह मार्ग दुनिया की 20% और दक्षिण एशिया की 40% तेल-गैस आपूर्ति का मुख्य जरिया है। खाड़ी देशों का रास्ता प्रभावित होने के कारण अमेरिका ने भारत को आपातकालीन राहत देते हुए रूसी तेल खरीदने की अस्थायी छूट दी थी।
17 जून को यह छूट खत्म होने के बाद अमेरिका एक बार फिर भारत को वेनेजुएला के तेल की तरफ धकेलेगा। इस सिलसिले में वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज इसी सप्ताह अमेरिका का दौरा भी करने वाली हैं। यदि 17 जून को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग इस छूट को आगे नहीं बढ़ाता है, तो भारतीय रिफाइनरियों को अपने तेल आयात के लिए नए रणनीतिक रास्ते और विकल्प तलाशने होंगे।




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