ना-ना करते हो गया गठबंधन, कौन हैं असम के दो गोगोई; जो फिर हुए एक, BJP के लिए कितना खतरा?
Assam Assembly Elections: यह गठबंधन इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि पहले दोनों दलों के बीच बातचीत टूट चुकी थी। राइजोर दल ने शुरुआत में 27 सीटों की मांग की थी। बाद में इसे घटाकर 15 किया और अंततः 13 सीटों पर सहमति बन गई।

Assam Assembly Elections: असम विधानसभा चुनाव से पहले वहां की राजनीतिक तस्वीर तेजी से बदल रही है। लंबे समय तक कभी हां-ना तो कभी सियासी खींचतान और फिर गठबंधन से इनकार करने वाले आखिरकार राज्य के दो गोगोई अब जाकर अंतत: एकजुट हो गए हैं और मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ने को तैयार हो गए हैं। ये दोनों गोगोई हैं- असम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई और क्षेत्रीय पार्टी रायजोर दल के अध्यक्ष अखिल गोगोई। दोनों ने गुरुवार रात गठबंधन की घोषणा की।
गठबंधन की घोषणा गौरव गोगोई और अखिल गोगोई ने संयुक्त रूप से किया। दोनों नेताओं ने मंच पर गमछा आदान-प्रदान कर एकजुटता का संदेश दिया। इस मौके पर अखिल गोगोई ने यहां तक कहा कि उनकी पार्टी अब गौरव गोगोई को असम का अगला मुख्यमंत्री बनाने के लिए काम करेगी। अखिल ने कहा, "आज, रायजोर दल और कांग्रेस के बीच एक सहमति बन गई है... रायजोर दल ने आज से ही गौरव गोगोई को असम का मुख्यमंत्री बनाने की दिशा में काम शुरू करने का फैसला किया है।"
सीट शेयरिंग का फॉर्मूला क्या है?
दोनों नेताओं के बीच हुए समझौते के तहत रायजोर दल राज्य की कुल 126 विधानसभा सीटों में से 13 पर चुनाव लड़ेंगे। इनमें से 2 सीटों (गौरीपुर और गोलपाड़ा ईस्ट) पर कांग्रेस के साथ “फ्रेंडली फाइट” होगी। बाकी 11 सीटें पूरी तरह राइजोर दल के खाते में गई हैं। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, कांग्रेस ने रायजोर दल के लिए जो 11 सीटें छोड़ी हैं, उनमें ढिंग भी शामिल है। यह वही सीट है जिस पर पहले असहमति के कारण बातचीत टूट गई थी। इसके अलावा इनमें मार्घेरिटा भी शामिल है, जहाँ कांग्रेस उम्मीदवार प्रतीक बोरदोलोई ने गुरुवार को अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उनके पिता, प्रद्युत बोरदोलोई, कांग्रेस छोड़कर BJP में शामिल हो गए थे। इन सीटों में शिवसागर भी शामिल है, जहाँ से अखिल खुद विधायक हैं और जहाँ से वे फिर से चुनाव लड़ेंगे।
क्यों अहम है यह गठबंधन?
यह गठबंधन इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पहले दोनों दलों के बीच बातचीत टूट चुकी थी। राइजोर दल ने शुरुआत में 27 सीटों की मांग की थी। बाद में इसे घटाकर 15 किया गया और अंततः 13 सीटों पर सहमति बन पाई। यह समझौता विपक्षी एकता को मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
अन्य दलों का समीकरण
गुरुवार को उम्मीदवारों की अपनी तीसरी सूची जारी करने के साथ ही, कांग्रेस ने 101 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। असम विधानसभा की कुल 126 सीटों के लिए उसने सीटों के बंटवारे की जो व्यवस्था तय की है, उसके तहत असम जातीय परिषद 10 सीटों पर, ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस 2 सीटों पर, CPI(M) और रायजोर दल 11-11 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। दूसरी तरफ NDA में BJP 89 सीटों पर चुनाव लड़ेगी,जबकि असम गण परिषद 26 सीटों पर और बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट 11 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
दो दल एकला लड़ रहे चुनाव
राज्य में ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF), ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। AIUDF ने सभी 126 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। NDA का पूर्व सहयोगी, बोडोलैंड-आधारित यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल भी अकेले चुनाव लड़ रहा है और अब तक 18 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुका है।
राजनीतिक संदेश क्या है?
रायजोर दल की पकड़ मुख्य रूप से ऊपरी असम (Upper Assam) के क्षेत्रों में मजबूत मानी जाती है, जहाँ आरटीआई कार्यकर्ता रहे अखिल गोगोई के नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) विरोधी आंदोलनों का गहरा असर रहा है। हाल ही में कांग्रेस के अनुभवी विधायक अब्दुल राशिद मंडल जैसे नेताओं के रायजोर दल में शामिल होने से पार्टी की सांगठनिक ताकत और स्वीकार्यता बढ़ी है। ऐसे में कांग्रेस और राइजोर दल का यह गठबंधन साफ संकेत देता है कि विपक्ष एकजुट होकर सत्ताधारी गठबंधन को चुनौती देना चाहता है। माना जा रहा है कि क्षेत्रीय दलों की भूमिका इस चुनाव में निर्णायक हो सकती है। कुल मिलाकर असम में चुनावी मुकाबला अब और रोचक हो गया है। एक ओर सत्ताधारी एनडीए तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश में है, वहीं विपक्षी गठबंधन एकजुट होकर मुकाबला मजबूत करना चाहता है और फिर सत्ता पर काबिज होना चाह रहा है।




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