सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी नरम नहीं हुए ट्रंप के तेवर, बोले- भारत देगा टैरिफ, US नहीं
अमेरिका के इस रुख और अदालती फैसले के बाद भारत में राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को लेकर अपनी अमेरिका फर्स्ट नीति को और कड़ा कर दिया है। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति के व्यापक रेसिप्रोकल टैरिफ को असंवैधानिक करार दिए जाने के बावजूद ट्रंप ने साफ किया है कि भारत के साथ हुए हालिया व्यापार समझौते में कोई बदलाव नहीं होगा। ट्रंप ने बड़े स्पष्ट शब्दों में कहा, "कुछ नहीं बदलेगा। भारत हमें टैरिफ देगा, लेकिन हम उन्हें कोई टैरिफ नहीं देंगे।"
ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने संबंधों को शानदार बताते हुए कहा कि पूर्व में भारत व्यापार के मामले में अमेरिका का फायदा उठा रहा था, जिसे उन्होंने अब बदल दिया है। ट्रंप के अनुसार, "पीएम मोदी एक महान व्यक्ति हैं, लेकिन वे व्यापारिक सौदों के मामले में पिछले अमेरिकी नेतृत्व से कहीं अधिक चतुर थे। उन्होंने हमें बहुत नुकसान पहुंचाया, इसलिए हमने उनके साथ एक नई डील की। अब स्थितियां उलट गई हैं।"
ट्रंप ने दावा किया कि उनके अनुरोध पर भारत ने रूस से तेल खरीदना काफी कम कर दिया है। उन्होंने कहा, "भारत रूस से तेल ले रहा था, लेकिन मेरे कहने पर वे पीछे हट गए क्योंकि हम उस भयानक युद्ध को सुलझाना चाहते हैं जहां हर महीने 25,000 लोग मारे जा रहे हैं।" ट्रंप ने इसे अपनी कूटनीतिक जीत के तौर पर पेश किया।
ट्रंप ने एक बार फिर 2024 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष को रोकने का श्रेय लेते हुए एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश किया। उन्होंने कहा, "कल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्ध रुकवाकर 35 करोड़ लोगों की जान बचाई।" ट्रंप ने बताया कि उन्होंने दोनों देशों को 200% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, जिसके डर से उन्होंने तुरंत शांति समझौता कर लिया।
अमेरिका के इस रुख और अदालती फैसले के बाद भारत में राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। चिदंबरम ने सरकार से पूछा कि यदि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को अवैध करार दिया है तो भारत और अमेरिका को अप्रैल 2025 से पहले की स्थिति पर लौट जाना चाहिए। ऐसे में अमेरिका ने भारत से कई रियायतें तो ले लीं, लेकिन बदले में भारत को क्या मिला? भारत ने अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदने और रूसी तेल न खरीदने का जो वादा किया है उस पर अब सरकार का क्या रुख है?
संयुक्त बयान में अमेरिका से आने वाले कई सामानों पर जीरो टैरिफ की बात कही गई है, जबकि ट्रंप कह रहे हैं कि भारत को अमेरिकी सामान पर टैरिफ देना ही होगा। चिदंबरम ने मांग की है कि वर्तमान में वाशिंगटन में मौजूद भारतीय टीम को इस समझौते के प्रभाव को स्पष्ट करना चाहिए, क्योंकि यह सौदा भारत के हितों के खिलाफ झुका हुआ प्रतीत हो रहा है।




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