भारत पर ज्यादा टैरिफ लगाने का बहाना खोज रहे हैं ट्रंप, US सांसद का बड़ा दावा
टैरिफ नीति पर एक नई रिपोर्ट ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। दावा किया गया था कि आयात शुल्क का बोझ विदेशी कंपनियों और सरकारों पर पड़ेगा, लेकिन ताजा अध्ययन में सामने आया है कि इन शुल्कों का करीब 90 प्रतिशत खर्च अमेरिकी उपभोक्ताओं और कारोबारियों ने ही उठाया।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब भी भारत के खिलाफ भारी टैरिफ लगाने का बहाना खोज रहे हैं। अमेरिकी सांसद ब्रैड शर्मन ने ऐसा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि भारत को ही अलग से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने ट्रंप सरकार से नीति बदलने की मांग की है। हाल ही में ट्रंप ने भारत पर लगाए टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने का ऐलान किया था।
शर्मन ने कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर और ज्यादा टैरिफ लगाने का बहाना खोज रहे हैं।' उन्होंने लिखा, 'वह दावा कर रहे हैं कि इसकी वजह रूसी तेल है। जबकि, हंगरी अपना 90 फीसदी तेल बगैर टैरिफ के रूस से आयात करता है। और रूस के बड़े खरीदार चीन पर रूसी तेल की खरीद के चलते कोई प्रतिबंध नहीं लगा है। हालांकि, दूसरे कारणों से असर पड़ा है।'
सांसद ने कहा, 'भारत रूस से सिर्फ 21 प्रतिशत कच्चा तेल लेता है, लेकिन हमारे साथी को ही निशाना बनाया जा रहा है। राष्ट्रपति को तत्काल इस नीति को बदलना चाहिए।'
जनवरी में घटा था निर्यात
जनवरी में अमेरिका को भारत का वस्तु निर्यात 21.77 प्रतिशत घटकर 6.6 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। पिछले साल सितंबर, अक्टूबर और दिसंबर में भी निर्यात में गिरावट देखी गई थी, जबकि नवंबर में यह 22.61 प्रतिशत बढ़ा था। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में अमेरिका से आयात 23.71 प्रतिशत बढ़कर 4.5 अरब डॉलर हो गया।
अमेरिका ने 27 अगस्त से भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत शुल्क लागू किया था। दोनों देशों के बीच अब एक अंतरिम व्यापार समझौते पर सहमति हुई है, जिसके तहत अमेरिका ने सात फरवरी से भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क हटा दिया है और जबावी शुल्क 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है।
अमेरिकी ही झेल रहे टैरिफ की मार
टैरिफ नीति पर एक नई रिपोर्ट ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। दावा किया गया था कि आयात शुल्क का बोझ विदेशी कंपनियों और सरकारों पर पड़ेगा, लेकिन ताजा अध्ययन में सामने आया है कि इन शुल्कों का करीब 90 प्रतिशत खर्च अमेरिकी उपभोक्ताओं और कारोबारियों ने ही उठाया। यह निष्कर्ष फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयार्क से जुड़े अर्थशास्त्रियों के विश्लेषण में सामने आया है।
यूएसए टुडे ने बताया कि छह फरवरी को जारी एक नामी टैक्स फाउंडेशन की रिपोर्ट के मुताबिक अनुमान है कि 2025 में हर अमेरिकी परिवार पर 1000 डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ा, वहीं 2026 में यह बोझ बढ़कर 1300 डॉलर होने का अनुमान है।




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