डॉलर को बाय-बाय, प्रतिबंधों की भी परवाह नहीं? पुराने दोस्त रूस से गैस की डील करने जा रहा भारत
अमेरिका की नाराजगी और मध्य पूर्व तनाव के बीच भारत ने रूस से LNG और कच्चे तेल का आयात बढ़ाने का बड़ा फैसला किया है। जानिए कैसे अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद भारत अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दे रहा है।

भारत अमेरिका के प्रतिबंधों और डॉलर-आधारित भुगतान व्यवस्था की परवाह किए बिना रूस से ऊर्जा आयात बढ़ाने जा रहा है। दरअसल जनवरी में अमेरिका द्वारा लगाए गए दंडात्मक टैरिफ से राहत पाने के लिए भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद में भारी कटौती की थी, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रति एक बड़ी रियायत के रूप में देखा गया था। लेकिन महज दो महीने बाद ही, भारत और रूस अपने ऊर्जा सहयोग को तेजी से बढ़ा रहे हैं। यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद पहली बार, दोनों देश रूस से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की सीधी खरीद फिर से शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि इस सौदे से पश्चिमी प्रतिबंधों का उल्लंघन होने का जोखिम है, लेकिन सूत्रों के अनुसार अगर भारत इस दिशा में आगे बढ़ता है, तो कुछ ही हफ्तों में बातचीत पूरी हो सकती है।
एलएनजी और कच्चे तेल पर नया समझौता
अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर हाल ही में किए गए हमले के बाद एनर्जी की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसी बीच, ऊर्जा सहयोग को लेकर एक अहम बैठक हुई। 19 मार्च को नई दिल्ली में रूसी उप ऊर्जा मंत्री पावेल सोरोकिन और भारतीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के बीच बैठक हुई। इसी बैठक में एलएनजी समझौते पर 'मौखिक सहमति' बनी। दोनों अधिकारियों ने भारत को कच्चे तेल की बिक्री और बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। इसके तहत लगभग एक महीने में आयात का स्तर जनवरी के मुकाबले दोगुना हो सकता है, जो भारत के कुल आयात का 40% तक पहुंच जाएगा। भारत ने अपने यहां के खरीददारों से रूसी गैस की खरीद के लिए तैयार रहने को कहा है। साथ ही, नई दिल्ली ने संभावित प्रतिबंधों से छूट के लिए वाशिंगटन से भी संपर्क किया है।
दोहरी मार: अमेरिका-ईरान संकट और भारत पर असर
दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, भारत को एक साल से भी कम समय में वाशिंगटन से जुड़े फैसलों के कारण दो बार बड़े झटके लगे हैं। अगस्त में ट्रंप प्रशासन ने भारतीय सामानों पर 50% तक के कड़े टैरिफ लगाए थे जिसे हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अवैध ठहराया है। इससे बचने के लिए भारत ने कई वर्षों से चल रही रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद में कटौती कर दी थी। पिछले साल भारत ने मॉस्को से करीब 44 अरब डॉलर का कच्चा तेल खरीदा था, जिसने युद्ध के दौरान रूस की अर्थव्यवस्था को संभाले रखा था।
मध्य पूर्व का संकट
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद हालात बदल गए। तेहरान की जवाबी कार्रवाई के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो गया, जहां से भारत का लगभग आधा कच्चा तेल और एलएनजी आता है। इसका सीधा असर भारत में देखने को मिला है, जहां गैस स्टेशनों के बाहर लंबी लाइनें लग गई हैं और कई रेस्तरां में कुकिंग गैस खत्म हो गई है। खाड़ी देशों से आने वाले तेल के मार्ग में बाधा उत्पन्न होने के कारण अब एशियाई खरीदारों का रुझान फिर से रूसी ऊर्जा निर्यात की तरफ तेजी से बढ़ा है।
आर्थिक चुनौतियां और चेतावनी
सरकार के भीतर इस बात को लेकर निराशा है कि अमेरिका के दबाव में आकर रूसी कच्चे तेल का आयात कम करना एक गलत कदम साबित हुआ। 20 मार्च को कैबिनेट सचिवालय के लिए तैयार किए गए एक सरकारी नोट में कहा गया है कि अगर भारत ने रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद कम न की होती, तो मौजूदा संकट को कुछ हद तक टाला जा सकता था। नोट में चेतावनी दी गई है कि मध्य पूर्व से तेल आपूर्ति में लंबे समय तक बाधा रहने से महंगाई बढ़ेगी, रुपया कमजोर होगा और विदेशी कर्ज में वृद्धि होगी। इसके कारण भारत के निर्यात में 2% से 4% तक की गिरावट आ सकती है और थोक महंगाई दर 0.3% से 0.7% तक बढ़ सकती है।
प्रगाढ़ होते भारत-रूस संबंध
शीत युद्ध के समय से भारत के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध रखने वाला रूस अब इस स्थिति का फायदा उठा रहा है। नया एलएनजी समझौता 2012 में भारत की गेल (GAIL) और रूस की गजप्रोम (Gazprom) के बीच हुए 20 साल के समझौते की तुलना में भारत के लिए थोड़ा कम फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि अब यह पूरी तरह से 'विक्रेताओं का बाजार' बन चुका है। रूसी स्टेट पावर ग्रिड कंपनी 'रोसेती' के अधिकारियों ने भारत के पहाड़ी और दूरदराज के इलाकों में ट्रांसमिशन सुविधाओं के निर्माण के लिए भारतीय अधिकारियों के साथ काम करने का प्रस्ताव दिया है। रूस भारत के साथ हवाई संपर्क का भी विस्तार करना चाहता है। सेंट पीटर्सबर्ग के पुलकोवो हवाई अड्डे के अधिकारी भारत में और अधिक सीधी उड़ानों की संभावनाएं तलाश रहे हैं।
रुपये-रूबल में व्यापार
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इस सप्ताह कहा कि दोनों देशों के बीच 96% व्यापार अब रुपये और रूबल में हो रहा है। रूसी बैंक 'स्बरबैंक' के अनुसार, 1 अरब डॉलर तक के रुपये-रूबल लेनदेन अब सिर्फ एक दिन में पूरे हो रहे हैं, जो पहले के मुकाबले दोगुने तेज हैं। रूस में भारत के पूर्व राजदूत अजय मल्होत्रा ने कहा है कि- भारत ने वह रास्ता चुना जो उसके राष्ट्रीय हितों के लिए सबसे बेहतर था। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली को अब रणनीतिक साझेदार होने के नाते वाशिंगटन से प्रतिबंधों में छूट की मांग करनी चाहिए।




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