Tripura CM Saha criticizes demand for inclusion of parts of Bangladesh in Greater Tipraland क्या है ग्रेटर टिपरालैंड? जिसमें बांग्लादेश के कई हिस्से शामिल करने की उठ रही मांग, India News in Hindi - Hindustan
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क्या है ग्रेटर टिपरालैंड? जिसमें बांग्लादेश के कई हिस्से शामिल करने की उठ रही मांग

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने बांग्लादेश के हिस्सों को मिलाकर ग्रेटर टिपरालैंड बनाने की इस मांग के लिए टिपरा मोथा पार्टी की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह मांग अवैध है और इसके ऊपर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

Fri, 3 April 2026 09:52 PMUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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क्या है ग्रेटर टिपरालैंड? जिसमें बांग्लादेश के कई हिस्से शामिल करने की उठ रही मांग

त्रिपुरा समेत कुछ राज्यों के हिस्सों को मिलाकर 'ग्रेटर टिपरालैंड' की आवाज जोर पकड़ रही है। अब इस क्षेत्र में बांग्लादेश के कुछ हिस्सों को शामिल करने की मांग की गई है। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने बांग्लादेश के हिस्सों को मिलाकर 'ग्रेटर टिपरालैंड' बनाने की इस मांग के लिए टिपरा मोथा पार्टी की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह मांग अवैध है और इसके ऊपर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। मुख्यमंत्री का यह विरोध ऐसे समय में सामने आया है, जब टीएमपी प्रमुख देबवर्मा ने एक चुनावी रैली के दौरान बांग्लादेश के कुछ हिस्सों को भी शामिल करने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि उनका उद्देश्य बांग्लादेश के कॉक्स बाजार, चटगांव एवं खगराचारी को मिलाकर 'ग्रेटर टिपरालैंड' बनाना है और उन्होंने टिपरासा समुदाय से एकजुट होने का आह्वान किया था।

मुख्यमंत्री ने कहा, ''टीएमपी प्रमुख ने कॉक्स बाजार, चटगांव और खगराचारी पर कब्जा कर 'ग्रेटर टिपरालैंड' बनाने का वादा करके आदिवासी लोगों को गुमराह करने की एक बार फिर कोशिश की है। क्या यह संभव है? यह एक अवैध बयान है जिसके लिए कानूनी कार्रवाई हो सकती है।'' साहा ने गबार्डी बाजार में एक आदिवासी परिषद चुनाव रैली को संबोधित करते हुए कहा, ''हमने बांग्लादेश के एक राजनीतिक कार्यकर्ता का भी ऐसा ही एक बयान सुना था, जो हमारे पूर्वोत्तर पर नियंत्रण करना चाहता था। यह लोगों को भ्रमित करने की एक सोची-समझी कोशिश के अलावा और कुछ नहीं है।''

टिपरा पार्टी से नाराज हैं दुकानदार: त्रिपुरा सीएम

मुख्यमंत्री ने टीएमपी समर्थकों की कथित धमकियों के बाद गबार्डी बाजार में दुकानदारों के बहिष्कार का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की जबरदस्ती से लोगों का समर्थन हासिल नहीं किया जा सकता। साहा ने कहा, ''बल प्रयोग करके वोट हासिल नहीं किए जा सकते… आदिवासी परिषद के चुनाव में टीएमपी को वोट देने का विचार कर रहे व्यापारी अब उसका समर्थन करने से पहले दो बार सोचेंगे क्योंकि पार्टी ने उन्हें अपनी दुकानें बंद करने पर मजबूर कर दिया। अब वे अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) उम्मीदवार के पक्ष में करेंगे।''

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वह आदिवासी लोगों के समग्र विकास के लिए मार्च 2024 में हुए टिपरासा समझौते के कार्यान्वयन के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा, ''अगर कोई हमारे साथ नहीं रहना चाहता तो हम साथ कैसे रह सकते हैं?" गौरतलब है कि टीएमपी प्रमुख ने दावा किया था कि भाजपा गठबंधन चाहती थी। अब हम अलग हो गए हैं और एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।

टिपरा मोथा त्रिपुरा में भाजपा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार का हिस्सा है। हालांकि, दोनों पार्टियों के बीच में जनजातीय परिषद को लेकर विवाद है। ऐसी स्थिति में दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। साहा ने कहा, ''चुनाव लड़ने के लिए टीएमपी को धन कहां से मिल रहा है? हमें यह पता है और जब भाजपा आदिवासी परिषद में सरकार बनाएगी तो न्याय जरूर होगा।''

क्या है ग्रेटर टिपरालैंड?

ग्रेटर टिपरालैंड की मांग पूर्वोत्तर के राज्यों में बसे टिपरा आदिवासियों को एकजुट करने के लिए उठाई जा रही है। इसमें प्रस्तावित राज्य में असम, मिजोरम और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों को शामिल की मांग है। इस राज्य के लिए मुख्य रूप से टिपरा मोथा पार्टी आंदोलन कर रही है। हालांकि, केंद्र सरकार की तरफ से अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।