नेता प्रतिपक्ष पर TMC की चिट्ठी, अभिषेक बनर्जी के हस्ताक्षर विवाद का असर?
बंगाल में नेता प्रतिपक्ष के ऐलान को लेकर टीएमसी ने स्पीकर को पत्र लिखा है। इसमें तमाम नियमों का हवाला दिया गया है। क्या इसके पीछे अभिषेक बनर्जी के हस्ताक्षर विवाद का असर है?

नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति को लेकर टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष को चिट्ठी लिखी है। इसमें उन्होंने इन नियुक्तियों को जल्द मान्यता देने की मांग की है। गौरतलब है कि टीएमसी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी शोभनदेब चट्टोपाध्याय को दी गई है। इसके अलावा, उपनेता प्रतिपक्ष का पद आशिमा पात्रा और नयना बंदोपाध्याय को दिया गया है। वहीं, पार्टी ने फिरहाद हाकिम को चीफ व्हिप बनाया है। ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर के नाम पत्र जारी कर यह जानकारी दी है। गौरतलब है कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष से जुड़े डॉक्यूमेंट्स में हस्ताक्षर की गड़बड़ी पर विवाद चल रहा है। इस मामले की जांच चल रही है। ऐसे में टीएमसी की तरफ से जारी इस लेटर को काफी अहम माना जा रहा है।
पुरानी परंपरा और प्रक्रिया
अभिषेक बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा है कि विधानसभा की पुरानी परंपरा और प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए इन नामों को मंजूरी दी जाए। टीएमसी ने दावा किया है कि पूर्व में भी इसी तरह से नेता प्रतिपक्ष और अन्य पदों पर नियुक्तियां होती रही हैं। इस पत्र में लिखा गया है कि साल 2001, 2006, 2011, 2016 और 2021 में भी इसी प्रक्रिया का पालन करते हुए नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति की गई थी।
भाजपा को दिलाया याद
इतना ही नहीं, टीएमसी ने भाजपा को भी याद दिलाया है कि किस तरह से साल 2021 में भाजपा की तरफ से नामित नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी को उस समय विधानसभा अध्यक्ष ने मान्यता दी थी। अब टीएमसी ने इसी आधार पर अपने नेताओं की नई जिम्मेदारियों का ऐलान किया है। टीएमसी के लेटर में यह भी दावा किया गया है कि 15 मई को विधानसभा अध्यक्ष चुनाव के दौरान शोभनदेब को नेता प्रतिपक्ष के तौर पर स्वीकार किया जा चुका है। इस बात का भी हवाला दिया गया है कि उस वक्त स्वागत भाषण के दौरान स्पीकर ने शोभनदेब को बतौर नेता प्रतिपक्ष बोलने का मौका दिया था।
क्या है विवाद
तृणमूल कांग्रेस के दो विधायकों रितब्रता बनर्जी और संदीपन साहा ने 27 मई को विधानसभा अध्यक्ष रतींद्र बोस को सूचित किया कि पार्टी की छह मई की बैठक में नेता प्रतिपक्ष के चयन के संबंध में कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया था, जैसा कि विधानसभा अध्यक्ष को पार्टी के आधिकारिक पत्र में दावा किया गया था, और दोनों ने बैठक के प्रस्ताव पुस्तिका पर 19 मई को बाद में हस्ताक्षर किए थे। उनकी शिकायत के बाद यह मामला दर्ज किया गया।




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