TMC के किसी अलग गुट को मान्यता मत दें, ओम बिरला से अभिषेक बनर्जी ने लगाई गुहार
तृणमूल कांग्रेस में चल रहे आंतरिक कलह और बगावत की आग अब संसद तक पहुंच गई है। पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने रविवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को विस्तृत पत्र लिखकर साफ-साफ मांग की है कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस को एक अविभाज्य राजनीतिक दल माना जाए।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में पिछले कुछ दिनों से चल रहे उठापटक और बागी नेताओं की बगावत के बीच पार्टी ने रविवार को एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाया है। पार्टी महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर मांग की है कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) को एक अविभाज्य और एकीकृत राजनीतिक दल के रूप में मान्यता दी जाए। ओम बिरला के लिखे गए पत्र में साफ-साफ कहा गया है कि लोकसभा में टीएमसी का प्रतिनिधित्व केवल पार्टी के अधिकृत नेता और व्हिप के माध्यम से ही होना चाहिए। साथ ही किसी भी कथित अलग गुट, धड़े या बागी समूह को कोई मान्यता, संसदीय दर्जा या सुविधाएं प्रदान न की जाएं।
स्पीकर आवास पर पहुंचे दो सांसद
बता दें कि रविवार को अवकाश का दिन होने के बावजूद टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद और सागरिका घोष लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के आवास पर पहुंचे। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं ने स्पीकर को अभिषेक बनर्जी का यह महत्वपूर्ण पत्र सौंपा। पत्र में न केवल पार्टी की एकता पर जोर दिया गया है, बल्कि संवैधानिक प्रावधानों का हवाला भी दिया गया है।
पत्र सौंपने के बाद मीडिया से बातचीत में टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि यह मामला पूरी तरह स्पष्ट और सीधा है। सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि राजनीतिक दलों में विभाजन की कोई गुंजाइश नहीं है। संविधान की 10वीं अनुसूची के अनुच्छेद 4 में भी इसका स्पष्ट उल्लेख है।
उन्होंने महाराष्ट्र में हुए हालिया राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में जो कुछ हुआ, वह नियमों और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं था। हम इसी मुद्दे से संबंधित एक विस्तृत याचिका लेकर स्पीकर महोदय के पास आए हैं और उन्हें सौंप दी है। हमें पूरा भरोसा है कि लोकसभा स्पीकर कानून, संविधान और निर्धारित संसदीय नियमों के अनुसार ही उचित निर्णय लेंगे, जैसा कि वे अब तक हमेशा करते आए हैं।
सागरिका घोष ने संविधान का दिया हवाला
वहीं, टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने भी मीडिया से बात करते हुए कहा कि हमने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र देकर साफ कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस एक अविभाज्य राजनीतिक दल है। लोकसभा के भीतर इसका कोई अलग गुट या धड़ा नहीं बनाया जा सकता। ऐसा करना संविधान की मूल भावना और संसदीय नियमों के पूरी तरह विपरीत है। उन्होंने आगे कहा कि जो लोग टीएमसी को तोड़ने, पार्टी को विभाजित करने या लोकसभा में अलग समूह बनाने की कोशिश कर रहे हैं, उनका यह कदम संवैधानिक और कानूनी रूप से पूरी तरह गलत है। संविधान इस तरह की किसी भी व्यवस्था की अनुमति नहीं देता।
इस दौरान सागरिका घोष ने लोकतांत्रिक मूल्यों पर जोर देते हुए जोड़ा कि जिस पार्टी, नेतृत्व और चुनाव चिन्ह के आधार पर कोई जनप्रतिनिधि चुनाव लड़कर जीत हासिल करता है और लोकसभा या विधानसभा तक पहुंचता है, उसके बाद चुनावी हार, राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव या व्यक्तिगत सुविधा के चलते उस पार्टी का साथ छोड़ देना लोकतांत्रिक मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं माना जा सकता। यह जनादेश का अपमान है।




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