Tangy Masaledar Crunchy Know Why Amit Shah mysterious Jhalmuri post sparked discussion about TMC तीखा, मसालेदार और कुरकुरा; 'TMC' पर अमित शाह का रहस्यमयी पोस्ट, कुछ बड़ा होने वाला है?, India News in Hindi - Hindustan
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तीखा, मसालेदार और कुरकुरा; 'TMC' पर अमित शाह का रहस्यमयी पोस्ट, कुछ बड़ा होने वाला है?

Amit Shah News: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने सियासी हलको में हलचल मचा दी है। यह पोस्ट ठीक उसी दिन आया, जब तृणमूल कांग्रेस अपने संसदीय इतिहास के सबसे बड़े विद्रोह का सामना कर रही है।

Thu, 11 June 2026 01:00 AMDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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तीखा, मसालेदार और कुरकुरा; 'TMC' पर अमित शाह का रहस्यमयी पोस्ट, कुछ बड़ा होने वाला है?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक रहस्यमय सोशल मीडिया पोस्ट ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। पोस्ट ठीक उस वक्त सामने आया जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) संसद में अपने सबसे बड़े विद्रोह का सामना कर रही है। शाह ने बंगाली स्ट्रीट फूड ‘झालमुड़ी’ की तारीफ करते हुए लिखा कि उन्होंने एनडीए की बैठक में तीखी, मसालेदार और कुरकुरी झालमुरी का आनंद लिया। साधारण दिखने वाले इस पोस्ट ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है क्योंकि इसमें छिपा हुआ संदेश साफ-साफ टीएमसी की ओर इशारा कर रहा है।

शाह के पोस्ट में क्या है सियासी संदेश?

अमित शाह ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए 'Tangy', 'Masaledar' और 'Crunchy' शब्दों के पहले अक्षरों को बड़े अक्षरों में लिखा। राजनीतिक हलकों में इसे TMC का स्पष्ट कोड माना जा रहा है। बीजेपी के प्रमुख रणनीतिकार द्वारा बंगाल के लोकप्रिय स्नैक का इस तरह इस्तेमाल करना महज संयोग नहीं, बल्कि सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है। दरअशल, इस पोस्ट के 24 घंटे पहले टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 20 बागी लोकसभा सांसदों के मजबूत गुट ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को औपचारिक पत्र लिखकर ममता बनर्जी की पार्टी से अलग होने और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने की घोषणा की थी। इस घटनाक्रम के बीच शाह का पोस्ट सामने आना विपक्ष के लिए और भी चिंताजनक बन गया है।

झालमुड़ी ही क्यों चुनी गई?

दरअसल, झालमुड़ी पश्चिम बंगाल का सबसे लोकप्रिय स्नैक है। चुरमुरा, मूंगफली, प्याज, टमाटर, हरी मिर्च और बंगाली मसालों का अनोखा मिश्रण। यह पूरे बंगाल की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ माना जाता है। विधानसभा चुनाव 2026 में प्रचार के दौरान पीएम मोदी ने इसे खाकर सियासी मुद्दा बना दिया था। इसको लेकर जमकर बयानबाजी भी हुई थी। दूसरी ओर जानकारों का कहना है कि अमित शाह ने जानबूझकर इस स्नैक को चुना क्योंकि यह टीएमसी के घर में घुसकर उसकी कमजोरी को उजागर करने का सूक्ष्म प्रतीक बन गया। 'तीखा' शब्द बंगाल की राजनीति में बढ़ते तनाव को, 'मसालेदार' सत्ता के खेल को और 'कुरकुरी' टीएमसी के टूटते संगठन को दर्शाता है।

टीएमसी में बढ़ता विद्रोह

बता दें कि काकोली घोष दस्तीदार समेत बागी सांसद ममता बनर्जी के तानाशाही रवैये, पार्टी में भाई-भतीजावाद और केंद्र सरकार की योजनाओं पर लगातार अड़ंगे डालने से नाराज हैं। इन सांसदों ने पत्र में लिखा है कि वे अब 'बंगाल के विकास' और 'राष्ट्रीय हित' को प्राथमिकता देंगे। यह विद्रोह टीएमसी के लिए बड़ा झटका है। पार्टी पहले ही पश्चिम बंगाल में स्थानीय स्तर पर अलग हो जाने से कमजोर हो चुकी है। अमित शाह का पोस्ट इस संकट को और बढ़ा रहा है।

वहीं, सियासी पंडितों का मानना है कि अमित शाह अपनी बात कहने के लिए शब्दों का चयन बहुत सोच-समझकर करते हैं। यह पोस्ट टीएमसी के लिए चेतावनी है कि उनका 'मसाला' अब खत्म होने वाला है। कहा जा रहा है कि शाह ने न तो ममता बनर्जी का नाम लिया, न टीएमसी का जिक्र किया, फिर भी पूरा देश समझ गया। एक तरह से कहा जाए तो अमित शाह के पोस्ट से साफ हो गया है कि टीएमसी अब 'कुरकुरी' हो गई है, एक झटके में टूट सकती है।