Tamil Nadu Assembly opinion polls show Stalin DMK wiped out NDA crowned तमिलनाडु में स्टालिन का पत्ता साफ, NDA का राजतिलक; ओपिनियन पोल में क्या-क्या?, India News in Hindi - Hindustan
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तमिलनाडु में स्टालिन का पत्ता साफ, NDA का राजतिलक; ओपिनियन पोल में क्या-क्या?

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की तारीख का ऐलान हो गया है। ऐसे में सामने आए पहले ओपिनियन पोल में राज्य में सत्ताधारी पार्टी की विदाई तय मानी गई है, जबकि एनडीए की एक बार फिर से सत्ता में वापसी करती दिख रही है।

Sun, 15 March 2026 07:21 PMUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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तमिलनाडु में स्टालिन का पत्ता साफ, NDA का राजतिलक; ओपिनियन पोल में क्या-क्या?

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की तारीख का ऐलान हो गया है। ऐसे में सामने आए पहले ओपिनियन पोल में राज्य में सत्ताधारी पार्टी की विदाई तय मानी गई है, जबकि एनडीए की एक बार फिर से सत्ता में वापसी करती दिख रही है। मैट्राइज-IANS द्वारा किए गए सर्वे के मुताबिक सत्ताधारी डीएमके और उसके साथियों को 104 से 114 सीट मिलने का अनुमान है, जबकि एआईडीएमके के नेतृत्व में चुनाव लड़ रहे एनडीए, जिसमें भाजपा भी शामिल है। वह इस चुनाव में करीब 114 से 127 सीट लाती दिख रही है। वहीं, दूसरी तरफ अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी टीवीके 6 से 12 सीटों पर जीत दर्ज करती हुई नजर आ रही है।

हालांकि, यह आंकड़े कुछ दिन पहले तक बने राजनीतिक समीकरणों की कहानी बता रहे हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक तमिलनाडु में 9 अप्रैल के दिन वोटिंग होगी। इससे पहले राज्य की सियासत क्या रंग दिखाती है वह देखना दिलचस्प होगा।

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आज ही सामने आई एक खबर के मुताबिक राज्य में अपनी जमीन तलाश रही भारतीय जनता पार्टी ने टीवीके के विजय को गठबंधन का खुला ऑफर दिया है। सत्रों के मुताबिक भाजपा ने विजय के सामने उप मुख्यमंत्री पद का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा एनडीए की तरफ से विजय की टीवीके 80 सीटों का भी प्रस्ताव दिया गया है। भाजपा सूत्रों की मानें तो अगर विजय अपनी पार्टी के साथ एनडीए के पाले में आते हैं, तो राज्य के चुनावी नतीजे पूरी तरह से पलट सकते हैं।

राजनीति के खेल में नए आए विजय के लिए भाजपा के साथ जाना थोड़ा परेशान करने वाली स्थिति में ला सकता है। विजय के करीबी सलाहकारों के बीच में भी इस गठबंधन को लेकर अपनी चिंताएं हैं। विजय शुरुआत से ही अपनी राजनैतिक पार्टी को डीएमके और एआईडीएमके से अलग तीसरे पक्ष के रूप में आगे बढ़ाते रहे हैं। ऐसे में अगर अभी वह किसी पक्ष में शामिल होते हैं, तो उनकी राजनीतिक छवि धूमिल हो सकती है।