मुसलमान विरोधी बात करते हैं CM, स्वत: संज्ञान लें मीलॉर्ड! CJI से मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की गुहार
बयान में कहा गया है कि CJI से इस मामले में बिना किसी देरी के दखल देने का आग्रह किया गया है। ताकि मजबूती और तेजी से कार्रवाई हो सके क्योंकि ऐसा नहीं होने से नफरत भरे भाषणों को बढ़ावा मिल सकता है और समाज में अशांति फैल सकती है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की ‘मियां’ वाली टिप्पणी को ‘मुस्लिम विरोधी’ और ‘असंवैधानिक करार देते हुए शुक्रवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय को इस मामले का स्वत: संज्ञान लेना चाहिए। शर्मा ने हाल ही में एक बयान में कहा था कि राज्य में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के दौरान 'मियां' समुदाय के लोगों को 'परेशान' किया जा रहा है, क्योंकि उन्हें असम में मतदान करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। शर्मा ने बांग्लाभाषी मुसलमानों के लिए 'मियां' शब्द का इस्तेमाल किया था।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने एक बयान में कहा कि शर्मा का बयान मुस्लिम-विरोधी और अत्यंत विभाजनकारी है, जिसका उच्चतम न्यायालय को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए। इलियास ने दावा किया, ‘‘मुसलमानों के खिलाफ नफरत भरी भाषा और खुला उकसावा अब सत्तारूढ़ दल के राजनीतिक विमर्श में सामान्य होता जा रहा है। अब सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों द्वारा इस तरह की बातें दोहराई जा रही हैं। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और अब असम के मुख्यमंत्री लगातार मुसलमानों को निशाना बनाते हुए भड़काऊ और असंवैधानिक बयान दे रहे हैं।’’
CJI और राष्ट्रपति से स्वत: संज्ञान लेने का अनुरोध
बयान में कहा गया है कि बोर्ड ने भारत के सुप्रीम कोर्ट से इस गंभीर मामले का तुरंत स्वतः संज्ञान लेने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि शर्मा का बयान अस्वीकार्य हैं क्योंकि मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने संविधान की रक्षा की शपथ ली है और वह खुलेआम किसी विशेष समुदाय के खिलाफ भेदभाव, उत्पीड़न और मताधिकार से वंचित करने की वकालत करते दिखाई रहे रहे हैं। इलियास का कहना है कि बोर्ड ने CJI और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी असम के मुख्यमंत्री के इन खतरनाक और असंवैधानिक बयानों पर उचित संवैधानिक कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
सेक्युलर दलों से भी अपील
इसके अलावा बोर्ड ने सभी सेक्युलर राजनीतिक पार्टियों, सिविल सोसायटी ग्रुप्स और न्याय पसंद नागरिकों से भी इस "भेदभाव की खुली अपील" पर गंभीरता से ध्यान देने और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा में एकजुट होने की अपील की है।
मुख्यमंत्री हिमंता सरमा ने क्या कहा था?
बता दें कि हिमंता शर्मा ने बुधवार को कहा था कि राज्य में “बांग्लादेशी मियां” रहते हैं और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं ने मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण (एसआर) के दौरान ऐसे “विदेशियों” के खिलाफ पांच लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज कराई हैं। शिवसागर जिले के डेमो में एक आधिकारिक समारोह से इतर संवाददाताओं से बातचीत में शर्मा ने कहा कि “अज्ञात लोग” अब यहां से चले गए हैं और अपर असम के विभिन्न जिलों में रह रहे हैं, जहां पांच साल पहले तक ऐसा एक भी “संदिग्ध व्यक्ति” नहीं रहता था।
बांग्लादेशी मियां यहां आकर रहने लगे
उन्होंने कहा, “असम में हम सभी जानते हैं कि बांग्लादेशी मियां यहां आकर रहने लगे हैं। अगर उनमें से किसी को भी एसआर से जुड़ा नोटिस नहीं मिलता है, तो इसका मतलब यह होगा कि असम में एक भी विदेशी नहीं है।” शर्मा ने कहा, “इसीलिए भाजपा कार्यकर्ताओं ने किसी के विदेशी होने का संदेह होने पर शिकायत दर्ज कराई है और सरकार या निर्वाचन आयोग इसकी जांच करेगा। लेकिन अगर हम कोई शिकायत दर्ज नहीं कराते हैं, तो कल लोग सवाल उठाएंगे कि विदेशियों के खिलाफ एक भी शिकायत क्यों नहीं दर्ज की गई।”




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