किसी के विचार को कैसे कंट्रोल कर सकते हैं? हेट स्पीच मामले में बोला SC, याचिका खारिज
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि इस तरह की चुनौती चयनात्मक नहीं हो सकती। इसे पूरे राजनीतिक परिदृश्य पर समान रूप से लागू होना चाहिए और किसी विशेष व्यक्ति या सार्वजनिक पदाधिकारी को निशाना नहीं बनाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हेट स्पीच से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणियां की हैं। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि भाषण व्यक्ति की सोच का प्रतिबिंब होता है और हेट स्पीच से निपटने की असली चुनौती केवल शब्दों को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि उन विचारों को सुधारना और खत्म करना है, जो ऐसे भाषणों का कारण होते हैं।
SC में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। रूप रेखा वर्मा द्वारा दायर की गई इस याचिका में मांग की गई है कि संवैधानिक पदाधिकारियों के सार्वजनिक भाषण मौलिक अधिकारों का उल्लंघन ना करें, इस संबंध में स्पष्ट गाइडलाइंस बनाई जाए।
किसी के विचार को कैसे नियंत्रित करेंगे?- SC?
सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा, "भाषण की उत्पत्ति विचार से होती है। किसी के विचार को कैसे नियंत्रित करेंगे? हमें उन विचारों को मिटाना होगा जो संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ जाते हैं।" उन्होंने कहा कि केवल दिशा-निर्देश बना देने से समस्या का समाधान नहीं होगा और राजनीतिक दलों व नेताओं को भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना चाहिए और संयम बरतना चाहिए।
'याचिका सिर्फ लोकप्रियता हासिल करने के लिए ना हो'
वहीं जस्टिस बागची ने कहा कि अदालत पहले ही कौशल किशोर बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अमीश देवगन बनाम भारत संघ जैसे मामलों में कई सिद्धांत निर्धारित कर चुकी है। उन्होंने सवाल किया कि क्या उन सिद्धांतों का पालन हो रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी याचिकाएं अत्यधिक सामान्य नहीं होनी चाहिए और इसे लोकप्रियता हासिल करने का साधन नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि संवैधानिक चिंतन के रूप में देखा जाना चाहिए।
CJI ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भी कुछ अहम बातें कहीं। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि इस तरह की चुनौती चयनात्मक नहीं हो सकती। इसे पूरे राजनीतिक परिदृश्य पर समान रूप से लागू होना चाहिए और किसी विशेष व्यक्ति या सार्वजनिक पदाधिकारी को निशाना नहीं बनाना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने 16 फरवरी को सुनी गई एक अन्य याचिका का भी उल्लेख किया, जिसमें अदालत ने याचिकाकर्ताओं से कहा था कि वे कथित हेट स्पीच मामले में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ एसआईटी जांच की मांग को लेकर सीधे उच्चतम न्यायालय आने के बजाय पहले गुवाहाटी हाईकोर्ट का रुख करें। पीठ ने मामले को स्थगित करते हुए याचिकाकर्ता को याचिका में आवश्यक संशोधन कर व्यापक दृष्टिकोण से मुद्दा उठाने की अनुमति दी।




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