शिकायत के लिए बनेंगे अपीलीय न्यायाधिकरण, बंगाल की वोटर लिस्ट पर SC का बड़ा फैसला
इस फैसले का मुख्य कारण यह था कि SIR में नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील सुनने के लिए कोई स्वतंत्र व्यवस्था नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई कि दोनों पक्षों (राज्य सरकार और चुनाव आयोग) की ईमानदारी पर संदेह हो रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े विवाद पर बड़ा फैसला सुनाया है। 10 मार्च को दिए गए आदेश में कोर्ट ने उन लोगों की शिकायतों के लिए स्वतंत्र अपीलीय न्यायाधिकरण बनाने का निर्देश दिया है, जिनके नाम एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटा दिए गए थे या जिनकी अपील खारिज हो गई। ये न्यायाधिकरण पूर्व उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों और पूर्व न्यायाधीशों से बने होंगे, ताकि प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी रहे। कोर्ट ने साफ कहा कि न्यायिक अधिकारियों के फैसलों पर कोई भी शक नहीं उठाया जाएगा और उनकी ईमानदारी पर सवाल नहीं सहन किया जाएगा।
इस फैसले का मुख्य कारण यह था कि SIR में नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील सुनने के लिए कोई स्वतंत्र व्यवस्था नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई कि दोनों पक्षों (राज्य सरकार और चुनाव आयोग) की ईमानदारी पर संदेह हो रहा है। इसलिए कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से कहा गया कि वे कुछ पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और 2-3 पूर्व न्यायाधीशों (कलकत्ता हाईकोर्ट या पड़ोसी राज्यों से प्राथमिकता) के नाम सिफारिश करें। इन नामों को मिलने के बाद चुनाव आयोग उन्हें आधिकारिक तौर पर अपीलीय न्यायाधिकरण के रूप में नोटिफाई करेगा। ये न्यायाधिकरण SIR से जुड़ी अपीलों की सुनवाई करेंगे और फैसला देंगे।
SIR दावों के निपटारे के लिए तैनाती
कोर्ट ने पहले भी कई निर्देश दिए थे, जैसे राज्य और पड़ोसी राज्यों (ओडिशा, झारखंड आदि) के न्यायिक अधिकारियों को एसआईआर दावों के निपटारे के लिए तैनात करना। राज्य सरकार और चुनाव आयोग को सख्त हिदायत दी गई कि वे इन अधिकारियों को सभी जरूरी सुविधाएं, संसाधन और सहयोग दें। तकनीकी समस्याओं को भी जल्द दूर करने के आदेश हैं, ताकि प्रक्रिया में कोई देरी न हो। कोर्ट का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र मतदाता अपना नाम सूची से बाहर न रहे और लोकतंत्र की शुचिता बनी रहे।
यह फैसला पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों से पहले अहम है, क्योंकि एसआईआर में लाखों नामों की जांच हुई और कई नाम हटाए गए। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारियों के फैसलों की समीक्षा कोई प्रशासनिक अधिकारी नहीं कर सकता। अपील केवल इन नए अपीलीय न्यायाधिकरणों में ही सुनी जाएगी। इससे मतदाताओं का भरोसा बढ़ेगा और चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहेगी। कुल मिलाकर, कोर्ट ने सभी पक्षों को चेतावनी देते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में किसी तरह की बाधा या संदेह नहीं बर्दाश्त किया जाएगा।




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