बिहार के SIR पर SC में लंबी बहस, सिब्बल और सिंघवी को जज ने याद दिलाया कौन सा कानून
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि चुनाव आयोग का यह तर्क सही है कि आधार कार्ड को ही एकमात्र प्रूफ के तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। विपक्ष के वकीलों के जज ने याद दिलाया कि आधार कानून भी कहता है कि इस दस्तावेज को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। उन्होंने आधार ऐक्ट के सेक्शन 9 का भी जिक्र किया।

बिहार में चुनाव आयोग की ओर से वोटर लिस्ट का गहन पुनरीक्षण चल रहा है। इसके तहत वोटर लिस्ट को वेरिफाई किया जा रहा है। मृत और राज्य से बाहर शिफ्ट होने वाले ऐसे लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं, जो अब दूसरे स्थानों पर मतदान करते हैं। अब तक के अभियान में चुनाव आयोग की ओर से 65 लाख वोटर हटाए गए हैं। इस पर विपक्ष बिफरा हुआ है। इसके अलावा आधार कार्ड के आधार पर ही वोटर लिस्ट में लोगों को जगह न देने पर भी उसे ऐतराज है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को चली बहस में चुनाव आयोग की दलील को बेंच ने सही ठहराया।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि चुनाव आयोग का यह तर्क सही है कि आधार कार्ड को ही एकमात्र प्रूफ के तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। विपक्ष के वकीलों के जज ने याद दिलाया कि आधार कानून भी कहता है कि इस दस्तावेज को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। उन्होंने आधार ऐक्ट के सेक्शन 9 का भी जिक्र किया और कहा कि इसमें स्पष्टता से कहा गया कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है। इसके अलावा बेंच ने यह भी पूछा कि आखिर बिहार के 7.46 करोड़ लोगों में से कितने लोग राज्य के बाहर हैं। इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि इनका कहना है कि ऐसी संख्या 36 लाख है, इनमें से 7 लाख किसी और राज्य के मतदाता हैं। फिर यह आंकड़ा 65 लाख कैसे हुआ।
इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कुल 65 लाख मतदाता हटे हैं। 22 लाख की मौत की बात है। इसमें कोई परेशानी नहीं है। 36 लाख बाहर शिफ्ट हैं। इनमें से 7 लाख दूसरी जगहों के मतदाता हैं। अब कुल मिलाकर बात यह है कि राज्य से बाहर शिफ्ट हुए लोगों का आंकड़ा एक ग्रे एरिया है और इस पर फोकस करने की जरूरत है। इस दौरान एक और अहम चर्चा अभिषेक मनु सिंघवी ने छेड़ दी। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग किसी की नागरिकता तय करने का अधिकार नहीं रखता। वह नागरिकता चेक करने वाली पुलिस नहीं है।
इस पर जस्टिस कांत ने कहा, 'यह सही है कि नागरिकता तय करने या उसे प्रदान करने का कानून संसद से पारित होता है। लेकिन नागरिकों को वोटर लिस्ट में शामिल करने और गैर-नागरिकों को बाहर करने का अधिकार तो चुनाव आयोग के पास ही है।' इस पर अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यह बात आपकी सही है, लेकिन यदि वोटर लिस्ट में मेरा नाम पहले से ही है तो फिर ऐसा नहीं होना चाहिए।




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