बोलने की आजादी को मजबूत करने की जरूरत, चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने ऐसा क्यों कहा
CJI ने कहा, 'संविधान न केवल स्वतंत्र समाज की कल्पना करता है, बल्कि सम्मानजनक समाज की भी। जब हम यह भूल जाते हैं कि कर्तव्य अधिकारों का अभिन्न अंग हैं, तो हम लोकतंत्र को कार्यशील रखने वाले संतुलन को बिगाड़ देते हैं।'

देश के नए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सबसे मूल्यवान अधिकारों में से एक बताया है। उन्होंने इसे और मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने सार्वजनिक विमर्श में जिम्मेदारी, सटीकता और सम्मान सुनिश्चित करने वाले एक ढांचे की आवश्यकता पर भी जोर दिया। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, 'यह स्वतंत्र भाषण नहीं है जो गरिमा या प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि इस स्वतंत्रता का दुरुपयोग और हमारे उपायों की अक्षमता ही इसका कारण बनती है।'
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अभिव्यक्ति का अधिकार एक समान रूप से अहम दायित्व के साथ आता है। इसे नागरिक के मौलिक कर्तव्यों के तहत तरीके से प्रयोग करना है। टीओआई से बातचीत में उन्होंने कहा, 'संविधान न केवल स्वतंत्र समाज की कल्पना करता है, बल्कि एक सम्मानजनक और सामंजस्यपूर्ण समाज की भी। जब हम यह भूल जाते हैं कि कर्तव्य अधिकारों का अभिन्न अंग हैं, तो हम लोकतंत्र को कार्यशील रखने वाले संतुलन को बिगाड़ देते हैं।'
बराबर मौकों के सवाल पर क्या बोले
धनी, प्रभावशाली और शक्तिशाली लोगों का प्रतिनिधित्व सीनियर वकील करते हैं। क्या वे सुप्रीम कोर्ट से सामान्य वादियों की तुलना में अधिक समय प्राप्त करते हैं? इस सवाल पर सीजेआई ने कहा, ‘देश के सभी अदालतों का मार्गदर्शक सिद्धांत यह है कि न्याय व्यवस्था सभी के लिए समान होनी चाहिए, चाहे उनकी स्थिति, पेशा या प्रतिनिधित्व कुछ भी हो।’ अनुच्छेद 370 के फैसले और पेगासस जांच के लिए प्रसिद्ध न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने भारत के नए सीजेआई के रूप में सोमवार को शपथ ली।
CJI सूर्यकांत का ऐसा रहा सफर
हरियाणा के हिसार जिले में 10 फरवरी, 1962 को मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे न्यायमूर्ति सूर्यकांत एक छोटे शहर के वकील से देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचे हैं। वह राष्ट्रीय महत्व और संवैधानिक मामलों के कई फैसलों और आदेशों का हिस्सा रहे। उन्हें कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कानून में स्नातकोत्तर में प्रथम श्रेणी में पहला स्थान प्राप्त करने का गौरव भी प्राप्त है। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में कई उल्लेखनीय फैसले देने वाले न्यायमूर्ति सूर्यकांत को 5 अक्टूबर, 2018 को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को हटाने से जुड़े फैसले, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिकता के अधिकारों पर फैसले देने के लिए जाना जाता है।




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