सुप्रीम कोर्ट ने 28 हफ्ते की प्रेग्नेंसी खत्म करने की दे दी इजाजत, 15 साल की नाबालिग ने लगाई थी गुहार
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को भी रद्द कर दिया, जिसमें गर्भपात की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था। इस दौरान उच्चतम न्यायालय ने कुछ अहम टिप्पणियां भी कीं।

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में 15 साल की नाबालिग लड़की को 28 हफ्ते से ज्यादा की गर्भावस्था खत्म करने की इजाजत दे दी है। सुनवाई के दौरान SC ने स्पष्ट किया कि किसी भी महिला, खासकर नाबालिग को, उसकी इच्छा के खिलाफ गर्भ जारी रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने मामले को संवेदनशील बताते हुए कहा कि अगर महिला को जबरन गर्भ जारी रखने के लिए कहा जाए, तो उसके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होगा और उसकी मानसिक, शारीरिक और सामाजिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा, “कोई भी अदालत किसी महिला को उसकी इच्छा के खिलाफ पूरी अवधि तक गर्भ रखने के लिए मजबूर नहीं कर सकती।” सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि अपने शरीर और प्रजनन से जुड़े फैसले लेना हर महिला का मौलिक अधिकार है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आता है।
क्या मामला
जानकारी के मुताबिक नाबालिग लड़की 10 अप्रैल से एम्स दिल्ली में भर्ती है। मामले को लेकर लड़की मानसिक रूप से काफी परेशान थी और उसने आत्महत्या की कोशिश भी की थी। इससे पहले एक नाबालिग लड़के के साथ सहमति से बने रिश्ते के बाद वह प्रेग्नेंट हो गई थी। लड़की बच्चे को नहीं रखना चाहती थी और उसने खुद गर्भपात कराने की इच्छा जताई थी। गुहार लेकर वह पहले दिल्ली हाईकोर्ट के पास पहुंची थी, लेकिन HC ने गर्भपात की अनुमति देने से इनकार किया गया था। हालांकि अब SC ने उस फैसले को पलट दिया।
सरकार की दलील पर SC ने क्या कहा?
सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गर्भ के इस स्टेज पर जोखिम की दलील दी और कहा कि सरकार बच्चे और मां की देखभाल कर सकती है। हालांकि कोर्ट ने कहा कि महिला की इच्छा सबसे महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर ऐसे मामलों में राहत नहीं दी गई, तो महिलाएं मजबूरी में अवैध और खतरनाक तरीकों का सहारा लेंगी। अंत में कोर्ट ने कहा, “ऐसे मामलों में कोई जीतता नहीं है, हर कोई हारता है।” कोर्ट ने निर्देश दिया कि गर्भपात की प्रक्रिया AIIMS दिल्ली में सभी मेडिकल सावधानियों के साथ की जाए और लड़की के अभिभावक की सहमति भी ली जाए।




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