पहलगाम हमले के बाद पहली मुलाकात में पीएम मोदी ने क्या कहा? शिवराज सिंह चौहान ने बताया
Shivraj Singh Chouhan: शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पहलगाम हमले के बाद पहली कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री मोदी बिलकुल शांत थे। उनके चेहरे पर जल्दबाजी में फैसला लेने या बेचैनी के भाव नहीं थे। वह धैर्य और दृढ़ संकल्प से भरे हुए थे।

Shivraj Singh Chouhan about PM Modi: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने अनुभवों को साझा करते हुए एक किताब लिखी है। इस किताब में उन्होंने पहलगाम हमले और उसके बाद ऑपरेशन सिंदूर को प्रधानमंत्री मोदी ने कैसे संभाला और उनका क्या संदेश था। इसका बड़ा ही बारीकी के साथ जिक्र किया है। 'अपनापन- नरेंद्र मोदी के संग मेरे अनुभव' के शीर्षक के साथ आने वाली इस किताब में शिवराज सिंह चौहान ने 90 के दशक से लेकर 2025 तक के अपने ह्रदयस्पर्शी अनुभवों को विस्तार से लिखा है। उनकी इस किताब का विमोचन 26 मई को आधिकारिक तौर पर किया जाएगा। इस कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा मौजूद रहेगें।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए हमले के दौरान प्रधानमंत्री मोदी सऊदी अरब के दौरे पर गए हुए थे। हमले की खबर सामने आए के बाद पीएम मोदी अपना दौरा बीच में ही छोड़कर वापस लौट आए थे। इसके बाद 30 अप्रैल को कैबिनेट की बैठक हुई थी। इसी बैठक के बारे में शिवराज सिंह चौहान ने लिखा है। उन्होंने लिखा, "30 अप्रैल, 2025 को कैबिनेट बैठक के पहले वातावरण में तनाव था। मेरे मन में उस वक्त यही प्रश्न लगा हुआ था कि इस कठिन समय का प्रधानमंत्री मोदी जी पर कितना बोझ पड़ रहा होगा।"
आगे कैबिनेट बैठक का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा, “... मैंने उन्हें अपने अंदाज में बैठक में आते हुए देखा। उनके चेहरे न तो गुस्से के भाव थे और न ही कोई बेचैनी दिखाई दे रही थी। मोदी स्थिरता और धैर्य की प्रति मूर्ति लग रहे थे। बैठक के दौरान भी उन्होंने न कोई घबराहट दिखाई और न ही जल्दबाजी में फैसला लेने की हड़बड़ी की। वह पूरी तरह शांत दिख रहे थे, लेकिन दृढ़ संकल्प से भरे हुए थे।”
पीएम ने कह दिया था यह ऑपरेशन अलग होगा- शिवराज सिंह चौहान
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बैठक के दौरान पाकिस्तानी आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्रतिक्रिया के बारे में बताया था। चौहान लिखते हैं कि बैठक के दौरान पीएम मोदी ने कहा, "इस बार का ऑपरेशन अलग होगा। यह सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक से अलग होगा, जिन्होंने भी यह आतंकी हमला किया है, वह दुनिया के किसी भी कोने में छिप जाएं... हम उन्हें और इस हमले के मास्टरमाइंड को नहीं छोड़ेगें।"
बकौल चौहान, "यह शब्द गुस्से में नहीं कहे गए थे, बल्कि दृढ़ संकल्प के साथ कहे गए थे। कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री के शब्दों ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह 140 करोड़ भारतीयों की जिम्मेदारियों को अपने कंधों पर लेकर चल रहे हैं। पीएम मोदी ने इस समय पर मजबूत नेतृत्व का परिचय दिया था। पहलगाम का यह कायराना आतंकी हमला पूरी दुनिया को झकझोरने वाला था। ऐसी स्थिति में अपने दर्द और गुस्से को काबू में रखकर दुनिया के सामने भारत के पक्ष को रखना... यह असाधारण बात है।"
गौरतलब है कि 22 अप्रैल हो हुए इस हमले में पाकिस्तानी आतंकियों ने 26 भारतीयों को उनका धर्म पूछकर मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार की धरती से सार्वजनिक तौर पर इंग्लिश में पूरी दुनिया को संदेश दिया था कि भारत इस हमले के गुनहगारों को दुनिया के किसी भी कोने से ढूंढ़ निकालेगा और सजा देगा। इसके बाद भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू करते हुए पाकिस्तान और पीओके के 9 आतंकवादी केंद्रों पर एयर स्ट्राइक की, जिसमें 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए।
कैसे केंद्रीय मंत्री बने शिवराज, किताब में जिक्र?
अपनी इस किताब में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से लेकर केंद्रीय मंत्री तक के सफर का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा, "मुझे 13 दिसंबर 2023 मध्य प्रदेश में नई सरकार का शपथ ग्रहण अच्छे से याद है। मैंने प्रधानमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व का मुख्यमंत्री के रूप में स्वागत किया और जैसे ही मोहन यादव ने शपथ ली, स्वाभाविक रूप से सभी का ध्यान उनके ऊपर चला गया। इसके बाद प्रधानमंत्री मेरे पास आए और कहा-शिवराज, समय निकाल कर दिल्ली आओ। आपसे कुछ बातें करनी है। इसके ठीक 6 महीने बाद 9 जून 2024 को मैं केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ले रहा था। मुझे कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय सौंपा गया। उस वक्त मुझे अहसास हुआ कि प्रधानमंत्री मोदी ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण के दौरान ही मेरे लिए योजना बना ली थी।"
आपको बता दें, लंबे समय तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में कृषि मंत्री का पद संभाल रहे हैं। मध्य प्रदेश में उन्हें 'मामा' के नाम बुलाया जाता है। प्रदेश की जनता में उनके क्रेज का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब वह मुख्यमंत्री निवास छोड़कर जा रहे थे, तो रास्ते में महिलाओं ने रोते हुए उनका काफिला रोक लिया था। इसके बाद वह भी गाड़ी से उतरे और रोते हुए उन महिलाओं के सिर पर हाथ फेरा।




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