प्रक्रिया ही सजा; मानहानि के मुकदमे पर बोले शशि थरूर, PM मोदी पर की थी टिप्पणी
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि क्या न्यायपालिका का समय सार्थक मामलों पर खर्च होता है, या हमारे कई न्यायाधीश अक्सर राजनीतिक उद्देश्यों के लिए चलाए जाने वाले तुच्छ मामलों पर काफी समय बर्बाद कर रहे हैं?

सुप्रीम कोर्ट ने शशि थरूर के खिलाफ पीएम मोदी पर की गई एक टिप्पणी के लिए एक अन्य नेता द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे को बंद करने पर विचार करने के लिए कहा है। अब इस टिप्पणी पर शशि थरूर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हमारी व्यवस्था में समस्या यह है कि बहुत सारे तुच्छ मामलों को चलने दिया जाता है और फिर प्रक्रिया ही सजा बन जाती है। उन्होंने कहा, ''क्या न्यायपालिका का समय सार्थक मामलों पर खर्च होता है, या हमारे कई न्यायाधीश अक्सर राजनीतिक उद्देश्यों के लिए चलाए जाने वाले तुच्छ मामलों पर काफी समय बर्बाद कर रहे हैं? दुर्भाग्य से, कई राजनीतिक मामले हैं, और यह उनमें से एक था।"
कांग्रेस सांसद ने कहा, "मैं प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना नहीं साध रहा था। मैं किसी पर निशाना नहीं साध रहा था। मैंने एक किताब लिखी थी जिसमें मैंने 2011 में प्रकाशित एक लेख का हवाला दिया था, जिसमें उस समय के आरएसएस के एक व्यक्ति के बयान का हवाला दिया गया था, जो बाद में भाजपा में शामिल हो गए और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भाजपा के प्रभारी के रूप में काम किया, लेकिन छह साल बाद एक किताब में उन्हें उद्धृत करने के लिए मेरे खिलाफ मामला दर्ज किया गया। इसलिए यह आश्चर्य की बात नहीं है कि अदालत ने मामला वापस लेने को कहा।"
अक्टूबर 2018 में, थरूर ने कथित तौर पर दावा किया था कि एक अनाम आरएसएस नेता ने मोदी की तुलना 'शिवलिंग पर बैठे बिच्छू' से की थी। कांग्रेस नेता ने कथित तौर पर कहा कि यह एक असाधारण रूप से प्रभावशाली रूपक है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता की टिप्पणी से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं, जिसके बाद थरूर के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया गया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को शिकायतकर्ता के वकील से पूछा कि इतना संवेदनशील क्यों हो? साथ ही, कांग्रेस सांसद शशि थरूर के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित 'शिवलिंग पर बिच्छू' टिप्पणी के लिए दायर मानहानि के मामले में निचली अदालत की कार्यवाही पर लगी रोक बढ़ा दी।
जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने थरूर के वकील के अनुरोध पर मामले की सुनवाई स्थगित करने के बाद यह आदेश पारित किया। शिकायतकर्ता, भाजपा नेता राजीव बब्बर की ओर से पेश हुए वकील ने गैर-विविध दिन सुनवाई की मांग की। कौन सा गैर-विविध दिवस? आप इस सब को लेकर इतने संवेदनशील क्यों हैं? चलिए, हम यह सब बंद कर देते हैं। पीठ ने मामले की सुनवाई 15 सितंबर के लिए निर्धारित करते हुए कहा। थरूर ने दिल्ली हाई कोर्ट के 29 अगस्त, 2024 के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया, जिसमें उनके खिलाफ मानहानि की कार्यवाही को रद्द करने से इनकार करते हुए उन्हें 10 सितंबर को निचली अदालत में पेश होने को कहा गया था।




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