अमेरिका से ट्रेड डील के बाद भी रूस सबसे बड़ा तेल सप्लायर, ईरान संकट के बीच बढ़ सकता है आयात
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है और भारत का भी 25 से 27 लाख बैरल तेल फंसा हुआ है। अगर संकट बना रहता है तो रूस से आयात बढ़ाया जा सकता है। फरवरी महीने में रूस ही भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर था।

ईरान संकट के बीच होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से दुनियाभर की टेंशन बढ़ गई है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है। इस बीच भारत के अधिकारियों ने कहा था कि फिलहाल भारत के पास पर्याप्त तेल भंडार है। फिर भी अगर जरूरत पड़ी तो विकल्प तलाशे जाएंगे। इसमें रूस से तेल आयात बढ़ाना भी शामिल हो सकता है। अमेरिका से ट्रेड डील के बाद भी फरवरी महीने में भारत ने सबसे ज्यादा तेल रूस से ही आयात किया। वहीं दूसरे नंबर पर भारत के लिए तेल का सबसे बड़ा तेल निर्यातक सऊदी अरब रहा। पश्चिम एशियाई देशों से तेल का आयात बढ़ाया गया है।
डेटा और एनालिटिक्स सर्विस प्रोवाइडर केपलर की रिपोर् के मुताबिक पिछले कुछ सालों से भारत सऊदी अरब से रोज 6 से 7 लाख बैरल कच्चा तेल आयात कर रहा था। पिछले 6 सालों में भारत ने सऊदी अरब से बड़ी मात्रा में तेल आयात किया। एक जानकार ने कहा कि पिछले दो से तीन महीने में तेल कंपनियां रूस से दूरी बनाने लगीं। ऐसे में पश्चिमी एशिया से तेल का आयात बढ़ गया है। सऊदी अरब से तेल का आयात 30 फीसदी तक बढ़ गया है।
फऱवरी महीने में तेल का रोजाना आयात 10 लाख बैरल से ज्यादा था. जबकि जनवरी में यह 11 लाख बैरल और दिसंबर में 12 लाख बैरल था। इस हिसाब से रूस से आयात में कमी जरूर आई है और इसके बाद भी वह सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है। Kpler की लीड रिसर्च एनालिस्ट सुमित रितोलिया के मुताबिक पिछले दो से तीन महिने में तेल इंपोर्ट में परिवर्तन देखा जा रहा है। गल्फ देशों जैसे कि इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत से आने वाले तेल की मात्रा बढ़ी है। हो सकता है कि मार्च महीने में तेल आयात में बड़ा बदलाव देखने को मिले क्योंकि भारत का करीब 25 से 27 लाख बैरल तेल होर्मुज की खाड़ी में ही फंसा हुआ है।
ईरान और इजरायल में युद्ध के बीच जहाजों की आवाजाही काफी प्रभवित है। बीते दिन ओमा में दो भारतीय शिप को टारगेट किया गया जिसमें तीन भारतीयों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। अब अधिकारियों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर रूस से तेल का आयात और बढ़ाया जा सकता है। भारत के पास 17 से 18 दिन का तेल भंडार है। अगर यह संकट लंबा खिंचता है तो भारत को रूस से तेल का आयात बढ़ाना पड़ेगा।




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