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RSS का असर और हिंदू वोट; कैसे महायुति की सुनामी में ढह गए पुराने किले; मराठवाड़ा में भी धमाल

  • महाराष्ट्र में पांचों क्षेत्रों में महायुति ने सारे समीकरण बदलकर रख दिए हैं। महायुति की सुनामी में कई पुराने किले ढह गए हैं। महायुति ने 288 में से 235 सीटों पर कब्जा किया है।

Sun, 24 Nov 2024 07:02 AMAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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RSS का असर और हिंदू वोट; कैसे महायुति की सुनामी में ढह गए पुराने किले; मराठवाड़ा में भी धमाल

महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन की जबरदस्त जीत ने राज्य की राजनीति के समीकरण ही पलटकर रख दिए। बीजेपी और उसके सहयोगियों की इस सुनामी में कई पुराने किले ढह गए। बीजेपी, एनसीपी और शिंदे सेना के महायुति गठबंधन ने 288 में से 235 सीटों पर कब्जा कर लिया। वहीं महाविकास अघाड़ी को 50 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। महाविकास अघाड़ी के दलों की स्थिति यह हो गई कि वे निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या से भी कम रह गए।

मराठवाड़ा में पलट गई बाजी

छह महीने पहले ही लोकसभा चुनाव के दौरान पूरे महाराष्ट्र में माहौल महाविकास अघाड़ी के पक्ष में दिखाई दे रहा था। मराठवाड़ा की सात लोकसभा सीटों में से छह में महायुति को हार का सामना करना पड़ा था। छह महीने में ही ऐसा हुआ कि महायुति ने 46 में से 41 विधानसभा सीटों पर कब्जा कर लिया। इसमें बीजेपी के खाते में 19, शिवसेना के 13 और एनसीपी के खाते में 8 सीटें आईं।

इस नाटकीय बदलाव के पीछे कई वजहें हैं। मराठा आरक्षण एक्टिविस्ट मनोज जरांगे के आंदलन की वजह से लोकभा चुनाव में महायुति को नुकसान उठाना पड़ा था। हालांकि इस चुनाव में मनोज जरांगे के फैक्टर असर नहीं दिखा सका। उन्होंने एन मौके पर विधानसभा चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। वहीं उनके समुदाय से दर्जनों प्रत्याशियों ने नामांकन किया था। ऐसे में मराठा वोटर्स में उनकी पैठ कम हो गई।

बीजेपी ने सुधार के लिए सोशल इंजीनियरिंग का सहारा लिया। एक राजनीतिक जानकार ने कहा, मराठवाड़ा के लातूर, उस्मानाबाद, नांदेड़ जिलों में आरएसएस की अच्छी पकड़ है। इसके अलावा कई जिलों में धर्मुगरुओं ने भी कमान संभाली और हिंदू वोटरों के ध्रुवीकरण में लग गए। ऐसे में ओबीसी वोट भी महायुति की ओर शिफ्ट हुआ। हालांकि नांदेड़ लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा।

विदर्भ में भी लोकसभा चुनाव में बीजेपी गठबंधन को झटका लगा था। इस बार महायुति ने 62 में से 39 सीटों पर कब्जा किया है। कांग्रेस कोयहां काफी नुकसान हुआ है। कोंकण बेल्ट और मुंबई मेट्रोपोलिटन रीजन में ठाकरे परिवार का दशकों पुराना किला ढह गया। यहां 39 में से केवल एक सीट पर ही उद्धव ठाकरे की सेना चुनाव जीत पाई। वहीं 35 सीटों पर महायुति का कब्जा हो गया। माना जाता है कि यहां एकनाथ शिंदे की जमीनी पकड़ है। इसके अलावा आरएसएस का भी अच्छा प्रभाव हहै। मीरा भयंदर की सीट पर बीजेपी के नरेंद्र मेहता ने कांग्रेस के मुजफ्फर हुसैन को 1 लाख 44 हजार वोटों से हराया।

पश्चिमी महाराष्ट्र में महायुति को 70 में से 53 सीटों पर सफलता मिली। महाविकास अघाड़ी को केवल 12 सीटें ही मिलीं। एनसीपी नेता अजित पवार ने खुद कहा कि उन्हें यह तो पता था कि जीत होगी लेकिन इतनी बड़ी जीत का अंदाजा नहीं था। कोल्हापुर जिले की सभी 10 सीटों पर महायुति का ही कब्जा हो गया। उत्तर महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव में महायुति को 6 में से चार पर हार का सामना करना पड़ा था। हालाांकि इस बार वोट एकदम से महायुति की ओर शिफ्ट हो गया। नारायण राणे का प्रभाव इस इलाके में देखने को मिला। जानकारों का कहना है कि शिवसेना और एनसीपी के टूटने की वजह से वोट भी महायुति की ओर शिफ्ट हुआ है। ऐसे में टूटी पार्टियों का जनाधार तेजी से गिरा है।

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