राज्यसभा चुनाव में विपक्ष के साथ खेला हो गया! कैसे दो सीटें ज्यादा जीत गई भाजपा? यहां हुई क्रॉस-वोटिंग
राज्यसभा चुनाव में क्रॉस-वोटिंग और विधायकों की गैर-मौजूदगी से विपक्ष को भारी झटका लगा है। बिहार और ओडिशा में NDA ने कैसे दर्ज की बड़ी जीत? पढ़ें चुनाव नतीजों का पूरा गणित और हॉर्स-ट्रेडिंग के आरोप।

सोमवार को 11 खाली राज्यसभा सीटों के लिए हुए बहुप्रतीक्षित चुनावों में विपक्ष को बड़ा झटका लगा है। बिहार में पांच, ओडिशा में चार और हरियाणा में दो सीटों पर मतदान हुआ। बिहार और ओडिशा में विपक्षी दल अपने विधायकों को एकजुट रखने में विफल रहे, जिसका सीधा फायदा भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को हुआ। एनडीए अपनी उम्मीदों से दो सीटें ज्यादा जीतने में सफल रही। इनमें एक सीट बिहार और दूसरी ओडिशा से है।
बिहार: विधायकों की अनुपस्थिति से महागठबंधन को नुकसान
बिहार में 5 सीटों के लिए 6 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें 5 NDA से और 1 विपक्षी गठबंधन (महागठबंधन) से था।
जीतने वाले उम्मीदवार: NDA ने सभी पांच सीटें जीत लीं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, JD(U) सांसद व केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर, RLM प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा और भाजपा के शिवेश राम विजयी रहे।
आंकड़ों का खेल: किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए 41 वोटों की आवश्यकता थी। 243 सदस्यीय विधानसभा में NDA के पास 202 विधायक हैं, जिससे उन्हें 5वीं सीट के लिए 3 वोटों की कमी पड़ रही थी। वहीं, महागठबंधन के पास 35 विधायक थे और उन्हें जीत के लिए 6 और वोटों की जरूरत थी।
विपक्ष की हार का कारण: AIMIM (5) और BSP (1) के समर्थन के बाद विपक्षी उम्मीदवार ए.डी. सिंह की जीत पक्की मानी जा रही थी। लेकिन अंतिम समय में विपक्ष के 4 विधायक (3 कांग्रेस और 1 राजद) वोट डालने नहीं आए।
नतीजा और आरोप: पहली वरीयता के वोटों में फैसला न होने पर दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती हुई, जिसमें भाजपा के शिवेश राम ने आसानी से जीत दर्ज कर ली। इसके बाद महागठबंधन ने भाजपा पर विधायकों को डराने-धमकाने और खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) का आरोप लगाया।
राजनीतिक महत्व: नीतीश कुमार का राज्यसभा में जाना बिहार के सबसे लंबे समय तक रहे मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के अंत का संकेत माना जा रहा है।
ओडिशा: क्रॉस-वोटिंग ने बदला समीकरण
ओडिशा में 4 सीटों के लिए 5 उम्मीदवार मैदान में थे। यहां जीत के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को 30 वोटों की आवश्यकता थी।
विजेता: भाजपा के मनमोहन सामल और सुजीत कुमार ने जीत दर्ज की। BJD के संतृप्त मिश्रा भी जीते। वहीं, बड़ा उलटफेर करते हुए भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे ने भी जीत हासिल की।
क्रॉस-वोटिंग का असर: 147 सदस्यीय विधानसभा में BJD और कांग्रेस के पास अपने साझा उम्मीदवार डॉ. दत्तेश्वर होता को जिताने के लिए पर्याप्त वोट थे। लेकिन, BJD के 8 विधायकों (जिनमें 2 निलंबित शामिल हैं) और कांग्रेस के 3 विधायकों ने अपनी पार्टी के फैसले के खिलाफ जाकर भाजपा समर्थित दिलीप रे के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग की।
BJD की प्रतिक्रिया: BJD प्रमुख नवीन पटनायक ने भाजपा पर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को इकट्ठा कर खरीद-फरोख्त करने का आरोप लगाया है। पार्टी अब बागी विधायकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है।
हरियाणा: दोनों ने एक-एक सीट जीती
हरियाणा में 2 सीटों के लिए वोटिंग हुई, लेकिन वोटिंग की गोपनीयता भंग होने की शिकायतों के कारण मतगणना 5 घंटे से अधिक समय तक रुकी रही। हालांकि देर रात भाजपा और कांग्रेस ने एक-एक सीट जीत ली। एक सीट पर भाजपा प्रत्याशी संजय भाटिया जीत गए जबकि दूसरी पर कांग्रेस प्रत्याशी कर्मवीर बौद्ध विजेता बने। निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को हार का सामना करना पड़ा। संजय भाटिया को 31, कर्मबीर बौद्ध को 28 और सतीश नांदल को 27 वोट मिले। कांग्रेस के कर्मबीर बौद्ध को एक वोट से जीत मिली।
26 सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन
चुनाव आयोग ने पिछले महीने 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव की घोषणा की थी। इनमें से 7 राज्यों की 26 सीटों पर केवल एक ही उम्मीदवार होने के कारण कोई मतदान नहीं हुआ। NCP के शरद पवार, कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी, केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले और DMK के तिरुची शिवा इनमें शामिल हैं।




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