क्या संसद में पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की 'किताब' पढ़ सकते हैं राहुल गांधी? एक्सपर्ट ने बताए नियम
लोकसभा में राहुल गांधी द्वारा जनरल एम.एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण को उद्धृत करने पर विवाद गहरा गया है। क्या नियम 349 सांसदों को 'अनपब्लिश्ड' दस्तावेज पढ़ने से रोकता है? जानें क्या कहते हैं नियम।

संसद के भीतर कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा पूर्व थलसेना प्रमुख एम एम नरवणे के अप्रकाशित 'संस्मरण' का जिक्र करने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। सोमवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान यह मुद्दा सामने आया। इस दौरान राहुल गांधी ने 2020 के भारत-चीन संघर्ष पर पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे की एक अप्रकाशित किताब का हवाला देना चाहा। लेकिन स्पीकर ओम बिरला ने नियमों का हवाला देते हुए उन्हें ऐसा करने से रोक दिया, जिसके बाद सदन में भारी हंगामा हुआ और कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। हालांकि संसदीय प्रक्रियाओं के एक विशेषज्ञ ने मंगलवार को कहा कि नियम 349 सदस्यों को सदन के कामकाज से संबंधित मामलों के अलावा किसी भी किताब, अखबार या पत्र को पढ़ने से रोकता है।
नियम 349: विशेषज्ञ की राय
संसदीय प्रक्रियाओं के विशेषज्ञ और लोकसभा के पूर्व महासचिव पी.डी.टी. आचारी ने इस विवाद पर 'नियम 349' की व्याख्या की है। नियम 349(i) के अनुसार, सदन की बैठक के दौरान कोई भी सदस्य कोई किताब, समाचार पत्र या पत्र नहीं पढ़ेगा जब तक कि वह सदन के कार्य से संबंधित न हो।
आचारी के अनुसार, हालांकि यह नियम नकारात्मक रूप से लिखा गया है, लेकिन इसका अर्थ यह भी है कि यदि कोई दस्तावेज सदन के कामकाज से सीधे जुड़ा है, तो उसे उद्धृत किया जा सकता है। यानी उसका जिक्र किया जा सकता है। नियम में कहीं भी यह स्पष्ट नहीं है कि दस्तावेज का 'प्रकाशित' होना अनिवार्य है या नहीं।
उनका कहना है कि सोमवार को सदन के समक्ष राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा हो रही थी, जिसमें विदेश नीति या अंतरराष्ट्रीय संबंधों का संदर्भ हो सकता था। आचारी ने इस बात का भी जिक्र किया कि भले ही यह नियम में स्पष्ट न हो, लेकिन अतीत में अध्यक्षों ने यह व्यवस्था दी है कि जो सदस्य सदन में कुछ उद्धृत करना चाहता है, उन्हें उस दस्तावेज को प्रमाणित करना होगा। उन्होंने कहा- सदस्य को यह कहना होगा कि वह उस पर कायम है और उद्धृत दस्तावेज की सामग्री को सत्यापित करता है।
आचारी के अनुसार, एक बार दस्तावेज प्रमाणित हो जाने पर अध्यक्ष सदस्य को उसे उद्धृत करने की अनुमति देते हैं। उसके बाद सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वह उसका जवाब दे और अध्यक्ष की भूमिका समाप्त हो जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि सदन को केवल सच ही बताया जाना चाहिए और जो सदस्य किसी गलत या फर्जी दस्तावेज से उद्धरण देता है, उसकी जिम्मेदारी उसी की होती है।
संविधान विशेषज्ञ ने कहा कि ऐसी स्थिति में संबंधित सदस्य के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाया जा सकता है। राहुल गांधी ने जब अप्रकाशित किताब का हवाला देना शुरू किया, तो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सवाल उठाया कि जो सामग्री प्रकाशित ही नहीं हुई है, उसे सदन में कैसे उद्धृत किया जा सकता है।
संसदीय परंपराओं के अनुसार, एक बार जब सदस्य दस्तावेज को प्रमाणित कर देता है और स्पीकर उसे अनुमति दे देते हैं, तो जिम्मेदारी सरकार की होती है कि वह उसका जवाब दे। इस मामले में स्पीकर ने राहुल गांधी को उस विशिष्ट न्यूज रिपोर्ट को पढ़ने से भी रोक दिया जिसमें अप्रकाशित किताब के अंश छपे थे। कांग्रेस का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सदन में पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की पुस्तक 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' के मसौदे के उस अंश को पढ़ना चाहते थे जिसमें 31 अगस्त, 2020 की एक घटना का उल्लेख है। यह संस्मरण अभी प्रकाशित नहीं हुआ है।




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