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कांग्रेस के दिल्ली दरबारियों की छुट्टी, असम में प्रियंका का 'पायलट प्रोजेक्ट'; ऐसे चुने जाएंगे उम्मीदवार

असम चुनाव के लिए प्रियंका गांधी ने कांग्रेस की पुरानी परंपरा बदल दी है। अब उम्मीदवारों का चयन दिल्ली के कमरों में नहीं, बल्कि जिलों में जाकर 'सोशल इंजीनियरिंग' के आधार पर होगा। जानिए क्या है प्रियंका का यह नया 'पायलट प्रोजेक्ट'?

Wed, 18 Feb 2026 02:45 PMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, गुवाहाटी
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कांग्रेस के दिल्ली दरबारियों की छुट्टी, असम में प्रियंका का 'पायलट प्रोजेक्ट'; ऐसे चुने जाएंगे उम्मीदवार

असम विधानसभा चुनावों की आहट के बीच कांग्रेस पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति में एक बड़ा और जमीनी बदलाव किया है। कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा गुरुवार को दो दिवसीय गुवाहाटी दौरे पर पहुंच रही हैं। उन्होंने उम्मीदवारों के चयन के लिए एक नया सिस्टम लागू किया है, जिसे पार्टी के भीतर एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में देखा जा रहा है। बता दें कि प्रियंका गांधी असम के लिए पार्टी की स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्ष हैं।

क्या है प्रियंका गांधी का 'नया सिस्टम'?

आमतौर पर कांग्रेस में उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया दिल्ली में होती है, जहां राज्य चुनाव समिति (SEC) के नेता राष्ट्रीय राजधानी आकर स्क्रीनिंग कमेटी से मिलते हैं। लेकिन इस बार प्रियंका गांधी ने इस परंपरा को पलट दिया है।

जमीनी फीडबैक: कमेटी के सदस्यों को दिल्ली में बैठने के बजाय सीधे जिलों में जाकर फीडबैक लेने का निर्देश दिया गया है।

जवाबदेही: कमेटी के तीन प्रमुख सदस्यों- सांसद सप्तगिरी शंकर उलका, इमरान मसूद और वरिष्ठ नेता सिरिवेला प्रसाद को राज्य के अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

हितधारकों से संवाद: ये नेता स्थानीय कार्यकर्ताओं, नागरिक समाज के सदस्यों और स्थानीय पत्रकारों से बंद कमरों में मुलाकात कर रहे हैं ताकि संभावित उम्मीदवारों की असली छवि का पता लगाया जा सके।

सोशल इंजीनियरिंग पर जोर

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जिलों का बंटवारा केवल प्रशासनिक नहीं है, बल्कि इसमें सोशल इंजीनियरिंग का भी ध्यान रखा गया है।

इमरान मसूद: उन्हें उन जिलों की जिम्मेदारी दी गई है जहां मुस्लिम आबादी अधिक है (जैसे डिब्रूगढ़, धेमाजी, तिनसुकिया, विश्वनाथ और उदलगुरी)।

सप्तगिरी शंकर उलका: खुद एक आदिवासी नेता होने के नाते, उन्हें आदिवासी बहुल जिलों (जैसे माजुली, जोरहाट, गोलाघाट, कार्बी आंगलोंग और नगांव) का प्रभार दिया गया है।

सिरिवेला प्रसाद: इन्हें चराईदेव, शिवसागर, लखीमपुर, सोनितपुर और दरांग जैसे जिलों में उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग का काम सौंपा गया है।

भविष्य के लिए एक 'ब्लूप्रिंट'

पार्टी के सूत्रों के अनुसार, यदि असम में यह प्रयोग सफल रहता है, तो इसे आगामी अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी दोहराया जाएगा। एआईसीसी के एक वरिष्ठ नेता ने स्पष्ट किया कि जीत या हार से इतर, इस प्रणाली का उद्देश्य पार्टी के भीतर पारदर्शिता लाना और स्थानीय कार्यकर्ताओं को निर्णय प्रक्रिया में शामिल महसूस कराना है। इमरान मसूद ने कहा, 'हम हर जिले की यात्रा कर रहे हैं और राजनीतिक व गैर-राजनीतिक, दोनों तरह के लोगों से मिल रहे हैं। हम जल्द ही अपनी रिपोर्ट प्रियंका जी को सौंपेंगे।'

पिछला चुनावी प्रदर्शन (2021)

असम की कुल 126 विधानसभा सीटों पर पिछले प्रदर्शन की बात करें तो:

भाजपा: 93 सीटों पर चुनाव लड़ा और 60 सीटें जीतीं।

कांग्रेस: 95 सीटों पर चुनाव लड़ा और केवल 29 सीटें ही जीत सकी।

इस बार कांग्रेस की कोशिश इस नए माइक्रो-मैनेजमेंट के जरिए सत्ता विरोधी लहर को भुनाने और बेहतर उम्मीदवार उतारने की है।