प्रशांत किशोर ने भांप ली थी विजय की जीत; Axis के प्रदीप गुप्ता बोले- DMK के लिए काम करते हुए…
Axis My India के प्रदीप गुप्ता ने तमिलनाडु में विजय थलापति की जीत और प्रशांत किशोर की भूमिका पर बात की है। उन्होंने कहा कि 2021 विधानसभा चुनाव में काम करते हुए प्रशांत किशोर ने तमिलनाडु में एक नेता के उदय को भांप लिया था। इसलिए उन्होंने 2024 से ही विजय के साथ काम करना शुरू कर दिया था।

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय थलापति की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK)को ऐतिहासिक जीत हासिल हुई थी। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी को केवल एक एग्जिट पोल ने छोड़कर बाकी सभी ने ज्यादा सीटें नहीं दी थीं। जिस एग्जिट पोल ने विजय को तमिलनाडु में ऐतिहासिक जीत की तरफ बढ़ता हुआ दिखाया था, वह था एक्सिस माय इंडिया। अब इसी एक्सिस माय इंडिया के चेयरमैन प्रदीप गुप्ता ने थलापति की तमिलनाडु विजय और उसमें प्रशांत किशोर की भूमिका को बताया है।
पीटीआई से बात करते हुए गुप्ता ने कहा कि चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने 2021 विधानसभा चुनाव में द्रमुक (DMK) के साथ काम किया था। इसी दौरान उन्होंने तमिलनाडु की सारी घटनाओं की जानकारी ली और बूथ लेवल पर क्या हालात हैं। इसका जायजा ले लिया। गुप्ता ने कहा, "तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के पांच साल पहले प्रशांत किशोर ने डीएमके, स्टालिन के साथ काम किया था। इसी दौरान तमिलनाडु में क्या घटनाएँ घट रही हैं और प्रशांत किशोर और आई-पैक का काम करने का जो तरीका है। वह ही पार्टी के लिए पूरे ग्राउंड की तलाश करते हैं। और जैसे ही उनको लगता है कि किसी पार्टी में स्पार्क है और वह आगे बढ़ सकती है, वह उसी के साथ जाकर मिल जाते हैं।"
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए गुप्ता ने कहा, "2021 में डीएमके ने जीत दर्ज की थी। लेकिन पिछले दो बार से एआईएडीएमके जीत रही थी। ऐसे में वहां पर एक अच्छा स्पेस था। 2021 के बाद से ही प्रशांत किशोर को तमिलनाडु की इस स्थिति का अंदाजा हो गया था। प्रशांत और उनकी टीम को अंदाजा हो गया था कि कोई लीडर उभर रहा है। क्योंकि 2024 में प्रशांत किशोर ने विजय की पार्टी के साथ काम करना शुरू कर दिया था।
आपको बता दें, प्रशांत किशोर ने 2021 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में द्रमुक के साथ काम किया था। इस चुनाव में डीएमके ने दस साल के बाद सत्ता में वापसी की थी। किशोर द्वारा चलाए गए स्टालिन उन्नगल थोगुथीलियल जैसे कैंपेन बहुत चर्चा में रहे थे। इसमें स्टालिन जनता की समस्या को सीधे तौर पर सुनते हुए देखे गए थे। इस चुनाव में स्टालिन की छवि एक साफ और भरोसेमंद नेता के तौर पर बनी थी।
स्टालिन की जीत के बाद प्रशांत किशोर और डीएमके का रिश्ता टूट गया। इसके बाद प्रशांत किशोर ने अपने आप को बिहार में मजबूत करने की कोशिश शुरू कर दी। हालांकि इसके बाद उन्होंने विजय के साथ भी निजी स्तर पर काम किया। उन्होंने पार्टी की शुरुआती राजनीतिक रणनीति, डेटा एनालिसिस और ग्राउंड सर्वे में मदद की थी। इतना ही नहीं उन्होंने राज्य में विजय के स्टारडम को देखते हुए युवा वोटरों और एंटी डीएमके और एआईडीएमके वोट पर भी फोकस किया था। हालांकि, टीवीके और प्रशांत किशोर के बीच में किसी भी तरह के औपचारिक गठबंधन या कॉन्ट्रेक्ट की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन दोनों ही तरफ से एक दूसरे का साथ दिया गया है।




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