PM मोदी के UAE दौरे से खत्म हो सकता है भारत का तेल-LPG संकट, 2 बड़े समझौते की उम्मीद
2025 में UAE भारत को तेल देने वाला चौथा सबसे बड़ा देश रहा। भारत की करीब 11 फीसदी तेल जरूरतें यहीं से पूरी होती हैं। वहीं LPG का करीब 40 फीसदी UAE से आता है

पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से दुनियाभर में मचे हाहाकार के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को 5 देशों के बेहद अहम दौरे पर रवाना हो रहे हैं। इस दौरान पीएम सबसे पहले संयुक्त अरब अमीरात जाएंगे। यह दौरा भारत के तेल और LPG संकट को खत्म करने में अगम भूमिका निभा सकता है। जानकारी के मुताबिक यहां भारत और UAE के बीच ऊर्जा क्षेत्र में दो बड़े समझौते होने की उम्मीद है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए काफी अहम माने जा रहे हैं।
बता दें कि पीएम मोदी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब देश में पेट्रोल और डीजल सहित अन्य ईंधन के आयात को लेकर संकट बना हुआ है। दरअसल ईरान और अमेरिका के बीच जंग शुरू होने के बाद से दुनिया का सबसे प्रमुख जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद है। यहां से जहाजों की आवाजाही भी लगभग ठप है। युद्ध शुरू होने से पहले अन्य एशियाई देशों की तरह भारत भी अपनी आयात जरूरतों के लिए इस रास्ते पर ही निर्भर था। अब इसके बंद होने के बाद भारत दूसरे विकल्प तलाश रहा है। ऐसे में पीएम मोदी का यह दौरा भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए गेम-चेंजर माना जा रहा है।
ऐतिहासिक समझौतों पर टिकी नजरें
अबू धाबी में पीएम मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की मौजूदगी में दो प्रमुख रणनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है-
- LPG सप्लाई समझौता: इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के बीच LPG (रसोई गैस) की आपूर्ति के लिए रणनीतिक गठबंधन हो सकता है। इससे भारत में LPG सप्लाई में स्थिरता आने की उम्मीद है। बता दें कि भारत अपनी जरूरत का 40 फीसदी LPG यूएई से ही खरीदता है।
- पेट्रोलियम रिजर्व समझौता: पीएम के UAE दौरे पर इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (ISPRL) और ADNOC के बीच रणनीतिक तेल भंडार को लेकर भी एक समझौते की उम्मीद है। इससे भारत अपने भंडार को और मजबूत कर पाएगा। यूएई की ADNOC पहले ही मंगलुरु में भारत के रणनीतिक भंडार में 50 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल स्टोर कर रही है। अब दोनों देशों के बीच भरोसा और मजबूत हुआ है जिसका लाभ भारत को मिलेगा।
भारत के लिए क्यों अहम है UAE?
UAE भारत का हमेशा से ही भरोसेमंद साथी रहा है। अब होर्मुज संकट के बीच यूएई भारत के लिए 'संकटमोचक' बन कर सामने आया है। विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम महाजन ने पीएम मोदी के भारत दौरे से पहले बताया कि UAE भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक अहम साझेदार है। 2025 में UAE भारत के लिए कच्चे तेल का चौथा सबसे बड़ा स्रोत था। भारत ने यहां से अपनी जरूरतों का 11% हिस्सा आयात किया। वहीं भारत, UAE की लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का सबसे बड़ा खरीदार है। इसके अलावा UAE, भारत के लिए LPG का भी सबसे बड़ा सोर्स है। वहीं भारतीय रिफाइनरों के पेट्रोलियम, तेल और लुब्रिकेंट्स के एक्सपोर्ट के लिए भी UAE दूसरा सबसे बड़ा डेस्टिनेशन है और भारतीय कंपनियों ने UAE के अपस्ट्रीम सेक्टर में 1.2 बिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है।
व्यापार में बना नया रिकॉर्ड
भारत और यूएई के बीच आर्थिक रिश्ते भी नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। 2025-26 में दोनों देशों के बीच 101.25 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ। दोनों देशों ने 2032 तक इसे 200 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा दोनों देशों ने स्थानीय करेंसी यानी रुपया और दिरहम में व्यापार शुरू कर दिया है, जिससे डॉलर पर निर्भरता और ट्रांजैक्शन लागत कम हुई है।
यूरोपीय देश का भी दौरा करेंगे PM
UAE के बाद पीएम मोदी चार यूरोपीय देशों नीदरलैंड, स्वीडन, नार्वे और इटली की यात्रा पर भी रवाना होंगे। इस दौरान भी सबसे अधिक जोर ऊर्जा सुरक्षा पर रहेगा। विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने बीते बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश और रणनीतिक क्षेत्र में सहयोग बढाना है। पीएम मोदी इस दौरान यूरोपीय देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे।




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