पवन खेड़ा ने निर्दोष महिला को विवाद में घसीटा, हिरासत में लेकर पूछताछ जरूरी; हिमंत केस में HC
हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता खेड़ा ने राजनीतिक फायदा उठाने के लिए एक निर्दोष महिला को इस विवाद में घसीटा है। जस्टिस पार्थिवज्योति सैकिया की बेंच ने कहा कि इस मामले में हिरासत में पूछताछ जरूरी है।

गुवाहाटी हाई कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। यह याचिका असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के पास कई पासपोर्ट और विदेश में अघोषित संपत्तियां होने के उनके आरोपों से जुड़े मामले में दायर की गई थी। इस मामले में जज जस्टिस पार्थिवज्योति सैकिया ने सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि उन्होंने निर्दोष महिला को विवाद में घसीटा है। इससे पहले तेलंगाना हाई कोर्ट ने खेड़ा को सात दिन की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, लेकिन असम पुलिस ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
लाइव लॉ के अनुसार, हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता खेड़ा ने राजनीतिक फायदा उठाने के लिए एक निर्दोष महिला को इस विवाद में घसीटा है। जस्टिस पार्थिवज्योति सैकिया की बेंच ने कहा कि इस मामले में हिरासत में पूछताछ जरूरी है, ताकि खेड़ा के उन साथियों की पहचान की जा सके जिन्होंने मुख्यमंत्री की पत्नी (रिनिकी भुइयां सरमा) के खिलाफ विदेशी पासपोर्ट से जुड़े दावे करने के लिए उन्हें दस्तावेज इकट्ठा करके दिए थे।
कोर्ट ने कहा, “अगर खेड़ा ने मुख्यमंत्री के खिलाफ वे आरोप लगाए होते, तो यह मामला एक राजनीतिक बयानबाजी होता, लेकिन राजनीतिक फायदा उठाने के लिए, खेड़ा ने एक बेकसूर महिला को इस विवाद में घसीटा है।'' कोर्ट ने यह भी कहा कि यह मानहानि का कोई साधारण मामला नहीं था, और यह भी जोड़ा कि खेड़ा को अभी अपने दावों को साबित करना बाकी है। जज ने कहा, ''उन्होंने अभी तक बिना किसी शक के यह साबित नहीं किया है कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास तीन अन्य देशों के पासपोर्ट हैं। उन्होंने अभी तक बिना किसी शक के यह भी साबित नहीं किया है कि उन्होंने अमेरिका में एक कंपनी खोली थी और उसमें बड़ी रकम का निवेश किया था।”
कांग्रेस नेता की ओर से पेश एक वकील ने बताया कि जस्टिस पार्थिव ज्योतिसैकिया की सिंगल बेंच ने खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। खेड़ा ने यह याचिका सोमवार को दायर की थी, जब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें गुवाहाटी हाई कोर्ट का रुख करने को कहा था। कोर्ट ने मंगलवार को याचिका पर सुनवाई की थी और फैसला सुरक्षित रख लिया था। हाई कोर्ट ने शुक्रवार के लिए अपनी कार्य सूची में आदेश सुनाने की तारीख तय की थी। इन आरोपों के बाद मुख्यमंत्री शर्मा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा ने खेड़ा और अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत गुवाहाटी अपराध शाखा पुलिस थाने में आपराधिक मामले दर्ज कराए थे।




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