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संसद के पास SC और HC के जजों को हटाने का अधिकार; जस्टिस यशवंत वर्मा पर बोली सरकार

जस्टिस यशवंत वर्मा पर महाभियोग चलाने के फैसले को लेकर केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि संसद के पास जजों को हटाने का अधिकार है।

Fri, 18 July 2025 05:24 PMAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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संसद के पास SC और HC के जजों को हटाने का अधिकार; जस्टिस यशवंत वर्मा पर बोली सरकार

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने शुक्रवार को कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाना पूरी तरह से सांसदों का विषय है और सरकार इसमें कहीं भी शामिल नहीं है। मेघवाल ने बताया कि जस्टिस वर्मा के खिलाफ नकदी जब्त होने से जुड़े आरोपों की जांच के लिए भारत के तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना द्वारा गठित आंतरिक समिति अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है।

कानून मंत्री ने कहा कि अगर जस्टिस वर्मा रिपोर्ट से सहमत नहीं हैं और सुप्रीम कोर्ट या किसी उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हैं, तो यह उनका विशेषाधिकार है। उन्होंने कहा कि संसद को सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के जज को पद से हटाने का अधिकार है। मेघवाल ने कहा कि किसी जज के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित करने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 और राज्यसभा में 50 सदस्यों का समर्थन आवश्यक है।

उन्होंने कहा, ‘यह पूरी तरह से सांसदों का विषय है, उन्होंने कुछ प्रयास किए हैं और सरकार इसमें कहीं भी तस्वीर में नहीं है।’ इस बीच, न्यायमूर्ति वर्मा ने आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट को अमान्य ठहराने के अनुरोध के लिए शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय का रुख किया। समिति ने उन्हें उनके आवास पर नकदी बरामद होने के मामले में कदाचार का दोषी पाया है। वर्मा ने तत्कालीन सीजेआई खन्ना द्वारा उन्हें पद से हटाने की 8 मई को की गई सिफारिश को रद्द करने का अनुरोध किया है।

समझा जाता है कि सरकार न्यायमूर्ति वर्मा को हटाने के लिए, 21 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में एक प्रस्ताव पर जोर दे रही है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि उनकी पार्टी के सांसद भी इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करेंगे। दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डी. के. उपाध्याय की 25 पृष्ठों की जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है। इस रिपोर्ट में हिंदी में दो संक्षिप्त नोट हैं, जिनमें उल्लेख किया गया है कि 14 मार्च को न्यायमूर्ति वर्मा के लुटियंस दिल्ली स्थित आवास के स्टोररूम में लगी आग बुझने के बाद, नोटों से भरे चार से पांच अधजले बोरे मिले थे।

रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि आग शॉर्ट-सर्किट के कारण लगी थी। उस समय दिल्ली हाई कोर्ट के जज रहे न्यायमूर्ति वर्मा ने अपने जवाब में आरोपों की कड़ी निंदा की थी और कहा था कि उनके या उनके परिवार के किसी सदस्य द्वारा कभी भी स्टोर रूम में कोई नकदी नहीं रखी गई थी। उसके बाद उनका तबादला इलाहाबाद उच्च न्यायालय कर दिया गया था लेकिन उन्हें कोई न्यायिक दायित्व नहीं सौंपा गया। संसदीय कार्य राज्य मंत्री मेघवाल ने उम्मीद जताई कि सोमवार से शुरू होने वाला संसद का मानसून सत्र सुचारू रूप से चलेगा और सार्थक चर्चा होगी।