Over 54 million cases pending in courts across the country CJI Surya Kant calls plan a game changer देश की अदालतों में 5.4 करोड़ से अधिक पेंडिंग केस, CJI सूर्यकांत ने बताया 'गेम चेंजर' प्लान, India News in Hindi - Hindustan
More

देश की अदालतों में 5.4 करोड़ से अधिक पेंडिंग केस, CJI सूर्यकांत ने बताया 'गेम चेंजर' प्लान

CJI सूर्यकांत ने लंबित मामलों को मुख्य रूप से बुनियादी ढांचे की तीव्र कमियों का परिणाम बताया और इससे निपटने के लिए एक समन्वित दृष्टिकोण पर जोर दिया। उन्होंने इस दौरान बुनियादी ढांचे में सुधार लाने की बात कही।

Wed, 26 Nov 2025 06:21 AMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली।
share
देश की अदालतों में 5.4 करोड़ से अधिक पेंडिंग केस, CJI सूर्यकांत ने बताया 'गेम चेंजर' प्लान

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने देश की अदालतों (सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालयों और ट्रायल कोर्ट) में लंबित 5.4 करोड़ मामलों के विशाल बैकलॉग को प्रणाली में गहरी संरचनात्मक बाधाओं का परिणाम बताया है। सोमवार को शपथ लेने के बाद CJI ने इस चुनौती से निपटने के लिए एक वैज्ञानिक और व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया। CJI के द्वारा मंगलवार को दिए गए आंकड़ों के अनुसार, देश के विभिन्न न्यायिक स्तरों पर लंबित मामलों में सबसे अधिक ट्रायल कोर्ट में है। विभिन्न हाईकोर्ट में इसकी संख्या करीब 63.8 लाख है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में 90,000 से अधिक मामले लंबित हैं।

CJI सूर्यकांत ने लंबित मामलों को मुख्य रूप से बुनियादी ढांचे की तीव्र कमियों का परिणाम बताया और इससे निपटने के लिए एक समन्वित दृष्टिकोण पर जोर दिया। उन्होंने इस दौरान बुनियादी ढांचे में सुधार लाने की बात कही। उन्होंने सरकार और न्यायपालिका के समन्वित प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अदालतों के लिए भूमि और संसाधनों की समय पर पहचान करने, उन्हें आवश्यक सुविधाओं से लैस करने और न्यायिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने की सलाह दी।

सीजेआई ने उम्मीद जताई कि मध्यस्थता और वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्रों पर जोर देने से भविष्य में अदालतों पर बोझ कम होगा, इसे एक 'गेम चेंजर' बताया जा रहा है। लंबित मामलों को कम करने के लिए, CJI ने 7 और 9 न्यायाधीशों वाली संवैधानिक पीठों के गठन को प्राथमिकता दी है। उनका मानना है कि महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्नों का फैसला होने से उनसे जुड़े हजारों अन्य मामले स्वतः ही निपट जाएंगे।

उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के बीच सर्वोच्च न्यायालय के 'बड़ा भाई' दृष्टिकोण को लेकर बढ़ती निराशा पर CJI ने कहा कि HC और SC के बीच का संबंध संवैधानिक पूरकता का है, न कि प्रतिस्पर्धा का। दोनों संस्थाएं संघीय लोकतंत्र के भीतर विशिष्ट लेकिन सामंजस्यपूर्ण भूमिकाएं निभाती हैं।

सीजेआई ने कहा कि अनुच्छेद 225 (HCs के क्षेत्राधिकार) के तहत हाईकोर्ट की शक्ति कई मायनों में अनुच्छेद 32 (संवैधानिक उपचार का अधिकार) के तहत SC की शक्ति से व्यापक है। उन्होंने हाईकोर्ट की वास्तविक शक्ति को लोगों से उनकी निकटता में बताया। हाईकोर्ट क्षेत्रीय वास्तविकताओं और स्थानीय चुनौतियों से सीधे जुड़ते हैं और यहीं पर संविधान दैनिक अभ्यास में वास्तव में जीवित रहता है।

सीजेआई ने याचिकाकर्ताओं को सलाह देते हुए सुप्रीम कोर्ट में कई मामलों को लाने से पहलेअपनी शिकायतों के निवारण के लिए पहले हाईकोर्ट से संपर्क करने को कहा है।

सीजेआई सूर्यकांत ने यह स्वीकार किया कि वह कई संवेदनशील मुद्दों पर भी काम कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के बीच महिलाओं और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के प्रयास की बात कही। सरकार द्वारा नियुक्तियों और तबादलों के लिए कॉलेजियम की सिफारिशों के चयनात्मक कार्यान्वयन का मुद्दे पर भी चर्चा की।