जब तक अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला नहीं, तब तक सदन के अंदर कदम नहीं: ओम बिरला का बड़ा फैसला
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने कहा है कि जब तक अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक सदन के अंदर प्रवेश नहीं करेंगे।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने कहा है कि जब तक अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक सदन के अंदर प्रवेश नहीं करेंगे। उन्होंने साफ-साफ कहा है कि जब तक अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला नहीं हो जाता, तब-तक कुर्सी पर नहीं बैठेंगे। बता दें कि इस तरह का कोई नियम नहीं है, फिर भी उन्होंने सदन में नहीं जाने का फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि सरकार या विपक्ष की ओर से मनाने की कोशिश भी होगी, तब भी वे सदन के अंदर नहीं जाएंगे।
इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष महासचिव उत्पल कुमार सिंह को निर्देश दिया कि उन्हें पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी विपक्ष के नोटिस की जांच करें। बिरला ने महासचिव को निर्देश दिया है कि वह इस नोटिस की जांच कर उचित कार्रवाई करें। दरअसल, विपक्ष ने बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस मंगलवार को लोकसभा महासचिव को सौंपा और बिरला पर पक्षपातपूर्ण तरीके से सदन संचालित करने, कांग्रेस सदस्यों पर झूठे इल्जाम लगाने तथा अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है।
गौरतलब है कि लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को 'बोलने की इजाजत नहीं देने' तथा अन्य कुछ मुद्दों की पृष्ठभूमि ने विपक्ष ने अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस मंगलवार को लोकसभा महासचिव को सौंपा। लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने विपक्ष का नोटिस मिलने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि इस पर विचार किया जाएगा और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
निचले सदन में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई, कांग्रेस के मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश और सांसद मोहम्मद जावेद तथा अन्य ने लोकसभा महासचिव को यह नोटिस सौंपा। नोटिस पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक और कई अन्य विपक्षी दलों के 100 से अधिक सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। गोगोई ने कहा कि लोकसभा महासचिव को संविधान के अनुच्छेद 94 (सी) के तहत यह प्रस्ताव संबंधी नोटिस लोकसभा सचिवालय को सौंपा गया है।
बता दें कि 2 फरवरी को राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण से जुड़ा विषय उठाने की अनुमति नहीं मिलने, सदन की अवमानना के मामले में आठ विपक्षी सांसदों को निलंबित किए जाने तथा अन्य मुद्दों पर सदन में गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा में विपक्षी नेताओं को बोलने नहीं दिया जा रहा है, जबकि सत्तापक्ष के लोगों को कुछ भी बोलने की छूट दी गई है।




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