Now War of Minds Pakistan army Chief Asim Munir New Gambit Against India Narrative War Launched after Operation sindoor ‘बंदूक नहीं, अब दिमाग से जंग!’ भारत के खिलाफ आसिम मुनीर का नया प्रपंच; खुराफाती प्लान क्या?, India News in Hindi - Hindustan
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‘बंदूक नहीं, अब दिमाग से जंग!’ भारत के खिलाफ आसिम मुनीर का नया प्रपंच; खुराफाती प्लान क्या?

भारत के खिलाफ नैरेटिव जंग में पाकिस्तान ने कथित तौर पर कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया प्लेटफॉर्म भी खड़े किए हैं। इनमें यूरोप और ब्रिटेन में डिजिटल चैनल से लेकर फ्रांस, मैनचेस्टर और कराची से संचालित मीडिया नेटवर्क भी शामिल हैं।

Mon, 6 April 2026 06:05 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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‘बंदूक नहीं, अब दिमाग से जंग!’ भारत के खिलाफ आसिम मुनीर का नया प्रपंच; खुराफाती प्लान क्या?

पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर में चारो खाने चित्त हुए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी भद्द पिटवाने वाले पाकिस्तानी सेना के प्रमुख आसिम मुनीर ने भारत के खिलाफ अब एक नई जंग छेड़ दी है और इसके लिए वह बंदूक नहीं बल्कि दिमाग का इस्तेमाल कर रहे हैं। दरअसल, आसिम मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि को खराब करने और उसे चुनौती देने के लिए एक बड़े “इन्फॉर्मेशन ऑपरेशन” की रणनीति पर काम कर रहे हैं। चूंकि सैन्य स्तर पर पाकिस्तान भारत से मुकाबला कर नहीं सकता, इसलिए आसिम मुनीर ने अब नई चाल चली है।

DisinfoLab की हालिया रिपोर्ट बताती है कि आसिम मुनीर की अगुवाई में पाकिस्तान का सैन्य तंत्र एक ऐसा ग्लोबल मीडिया इकोसिस्टम बनाने की कोशिश कर रहा है, जिसका मकसद अंतरराष्ट्रीय राय को प्रभावित करना है। पाकिस्तान भले ही बढ़ते आर्थिक दबाव से जूझ रहा हो और वहां के लोग रोटी-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं को लिए जद्दोजहद कर रहे हों लेकिन पाकिस्तान 'ऑपरेशन सिंदूर'में मुंह की खाने के बाद से ही फड़फड़ा रहा है और भारत के खिलाफ अपने हिसाब से ग्लोबल नैरेटिव (कहानियों) गढ़ने की कथित कोशिशों में जुटा हुआ है।

‘नैरेटिव वॉर’ का मास्टर प्लान

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व ने ऑपरेशन सिंदूर में मुंह की खाने के बाद 2025 में एक पहल शुरू की है, जिसे वह 'रणनीतिक संचार मास्टर प्लान' कहता है। इसका मकसद ऐसे अंग्रेजी-भाषा वाले प्लेटफॉर्म बनाना है जो दुनिया भर में विश्वसनीय लगें और साथ ही बड़ी ही बारीकी से पाकिस्तान-समर्थक नैरेटिव को आगे बढ़ाएं- खासकर कश्मीर जैसे मुद्दों पर। बताया जाता है कि इस बदलाव के पीछे की जल्दबाजी की वजह 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद के हालात हैं, जब पाकिस्तान का ज़्यादातर उर्दू-केंद्रित मैसेजिंग इकोसिस्टम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ने में नाकाम रहा था। 'इंटर-सर्विसेज़ पब्लिक रिलेशंस' (ISPR) जैसी संस्थाओं की देश के अंदर तो अच्छी-खासी पहुंच थी, लेकिन वे ग्लोबल चर्चा को प्रभावित करने में संघर्ष करती रहीं।

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थिंक टैंक या ‘प्रचार के अड्डे’?

इस योजना के तहत पाकिस्तान ने नए “रिसर्च संस्थान” खड़े किए हैं, जैसे- 'मिन्हाज यूनिवर्सिटी लाहौर' में स्थापित हिमालयन इन्सेटीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड पॉलिसी स्टडीज। यह संस्थान हिमालयी भू-राजनीति, सुरक्षा और जलवायु मुद्दों पर केंद्रित है, लेकिन बताया जाता है कि इसमें ऐसे लोग काम करते हैं जिनके तार पाकिस्तान के रणनीतिक और मिलिट्री तंत्र से जुड़े हुए हैं - जिनमें 'इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रेटेजिक स्टडीज़ इस्लामाबाद' से जुड़े लोग भी शामिल हैं। साफ है कि नाम से यह संस्थान भले ही अकादमिक रिसर्च का दावा करते हैं, लेकिन रिपोर्ट कहती है कि इनमें सैन्य और रणनीतिक नेटवर्क से जुड़े लोग सक्रिय हैं, जो भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा का माल तैयार करते हैं।

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ग्लोबल मीडिया में पैठ बनाने की कोशिश

इस थिंक टैंक नेटवर्क के अलावा पाकिस्तान ने कई ऐसे मीडिया उपक्रमों को समर्थन दिया है या उन्हें फिर से शुरू किया है, जिनका मकसद अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचना है। इनमें कराची का AsiaOne News, मैनचेस्टर का DM News English, और पेरिस के FP92TV और Afrik1 TV जैसे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म शामिल हैं। रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि इनमें से कई आउटलेट्स का संबंध ऐसे लोगों से है जो पहले TRT World जैसे अंतरराष्ट्रीय ब्रॉडकास्टर्स या पाकिस्तान की सेना से जुड़े संगठनों के साथ काम कर चुके हैं। इससे वे सरकारी बातों का समर्थन करते हुए भी अपनी संपादकीय निष्पक्षता की छवि बनाए रखने में कामयाब हो जाते हैं।

न्यूट्रल नीडिया के नाम पर नैरेटिव सेट करने की कोशिश

भारत के खिलाफ नैरेटिव जंग में पाकिस्तान ने कथित तौर पर कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया प्लेटफॉर्म भी खड़े किए हैं। इनमें यूरोप और ब्रिटेन में डिजिटल चैनल से लेकर फ्रांस, मैनचेस्टर और कराची से संचालित मीडिया नेटवर्क भी शामिल हैं। इनका दावा है कि वे “निष्पक्ष पत्रकारिता” करते हैं, लेकिन आलोचकों का आरोप है ये न्यूट्रल नीडिया के नाम पर नैरेटिव सेट करने की कोशिश है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की सरकार प्रायोजित मीडिया की सबसे बड़ी चुनौती भरोसे का संकट है। जब पर्दे के पीछे सरकार या सेना दिखती है, तो वैश्विक दर्शक दूरी बना लेते हैं। इसी संकट को दूर करने के लिए पाकिस्तान ने अब दिमाग का इस्तेमाल करते हुए सोशल मीडिया, अंतरराष्ट्रीय मीडिया और थिंक टैंकों के जरिए नई तरह की कूटनीतिक जंग छंड़ी है।