No Two finger test, free education for rape survivors children Jharkhand High Court landmark guidelines 'टू फिंगर टेस्ट' पर तुरंत लगाओ रोक, HC का ऐतिहासिक फैसला; चीफ जस्टिस के आदेश में और क्या?, India News in Hindi - Hindustan
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'टू फिंगर टेस्ट' पर तुरंत लगाओ रोक, HC का ऐतिहासिक फैसला; चीफ जस्टिस के आदेश में और क्या?

HC ने कहा कि रेप पीड़ितों के साथ पूरी संवेदनशीलता से पेश आना संबंधित पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़ितों का बयान सब-इंस्पेक्टर या उससे ऊपर के रैंक की महिला पुलिस अधिकारी द्वारा दर्ज किया जाना चाहिए।

Tue, 9 June 2026 06:01 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, रांची
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'टू फिंगर टेस्ट' पर तुरंत लगाओ रोक, HC का ऐतिहासिक फैसला; चीफ जस्टिस के आदेश में और क्या?

झारखंड हाई कोर्ट ने सोमवार (8 जून) को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि बलात्कार के मामलों में पीड़िताओं के होने वाले टू फिंगर टेस्ट पर अविलंब रोक लगाई जाए और जीरो FIR दर्ज करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाए। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एम.एस. सोनाक और जस्टिस राजेश शंकर की बेंच ने यह फैसला सुनाया है। बेंच रेप सर्वाइवर्स की सुरक्षा और पुनर्वास से जुड़ी एक जनहित याचिका पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई कर रही थी।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, "हमें यह देखकर दुख होता है कि कुछ स्थितियों में रेप पीड़िता का सामाजिक मजाक उड़ाया जाता है, मानो वे ही आरोपी हों। कुछ मामलों में, पीड़िता को समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता है, जिससे उन्हें और उनके परिवारों को भारी मुश्किलों और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है।" बेंच ने कहा कि इस फैसले का उद्देश्य न केवल पीड़िताओं को न्याय दिलाना है, बल्कि समाज में उनके प्रति "पीड़ित को ही दोषी ठहराने" के नजरिए को बदलना भी है।

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बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा और छात्रवृत्ति

पीठ ने अपने फैसले में कहा कि बलात्कार की घटनाओं से पैदा हुए बच्चों को कक्षा 12 तक मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा सुनिश्चित की जाए। इसके लिए हर जिले में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। फैसला सुनाते हुए चीफ जस्टिस सोनाक ने कहा, "अगर ये बच्चे भविष्य में IIT, NIT, AIIMS या IIM जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में चुने जाते हैं, तो राज्य सरकार उन्हें छात्रवृत्ति भी प्रदान करेगी।"

'टू-फिंगर टेस्ट' पर पूर्ण रोक

हाई कोर्ट ने राज्य के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में "टू-फिंगर टेस्ट" को पूरी तरह प्रतिबंधित करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस टेस्ट का उल्लंघन "पेशेवर कदाचार" माना जाएगा और दोषी चिकित्सा कर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही कोर्ट ने पुलिस को संवेदनशील बनाने और जीरो FIR दर्ज करने के बी निर्देश दिए। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि अब पुलिस के लिए 'जीरो FIR' दर्ज करना अनिवार्य होगा, चाहे घटना किसी भी क्षेत्र की हो।

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कोर्ट ने अपने फैसले में यह निर्देश भी दिया है कि पीड़िताओं के बयान अधिकांश मामलों में महिला पुलिस अधिकारियों द्वारा एक मित्रवत वातावरण में बिना किसी दबाव के दर्ज किए जाने चाहिए। इसके अलावा पुलिस को बलात्कार के मामलों की प्रारंभिक जांच 15 दिनों के भीतर और पूरी जांच 2 महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया गया है।

आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने के भी निर्देश

हाई कोर्ट ने सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं को 'रानी लक्ष्मी बाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण' के तहत आत्मरक्षा के गुर सिखाने के भी निर्देश दिए हैं। निर्देश में कहा गया है कि लड़कियों को रोजमर्रा की वस्तुओं जैसे चाबी का गुच्छा, दुपट्टा या पेन का उपयोग हथियार के रूप में करना सिखाया जाएगा। अदालत ने दुख जताते हुए कहा कि कई मामलों में पीड़िताओं को ही सामाजिक उपहास और बहिष्कार का सामना करना पड़ता है, जिससे उन्हें अपना घर तक छोड़ना पड़ता है। पीठ ने उम्मीद जताई कि समाज की इस सोच में धीरे-धीरे बदलाव आएगा।

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क्या है टू-फिंगर टेस्ट?

टू-फिंगर टेस्ट एक आक्रामक और अवैज्ञानिक चिकित्सा परीक्षण है, जिसका उपयोग बलात्कार या यौन उत्पीड़न की पीड़िताओं की जांच के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया में, डॉक्टर पीड़िता के प्राइवेट पार्ट में दो उंगलियां डालकर यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि महिला यौन रूप से सक्रिय है या नहीं या उसके साथ जबरदस्ती हुई है या नहीं? विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और मेडिकल साइंस के अनुसार, इस टेस्ट का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। हाइमन का टूटना साइकिल चलाने, खेलकूद या अन्य शारीरिक गतिविधियों से भी हो सकता है।

मामले में एमिकस (न्याय मित्र) ने कोर्ट से "टू-फिंगर टेस्ट" पर रोक लगाने का निर्देश जारी करने का आग्रह किया था। इस सुझाव को मानते हुए, कोर्ट ने झारखंड सरकार को सभी सरकारी और निजी अस्पतालों/मेडिकल संस्थानों में "टू-फिंगर टेस्ट" पर रोक लगाने वाला सर्कुलर जारी करने का निर्देश दिया है। बता दें कि 2014 में, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यौन हिंसा से बचे लोगों/पीड़ितों के लिए मेडिको-लीगल देखभाल - दिशानिर्देश और प्रोटोकॉल नाम से एक दस्तावेज़ जारी किया था।