No Scheduled Caste Status for Converts to Any Religion Supreme Court Major Verdict किसी दूसरे धर्म में धर्मांतरण पर नहीं मिलेगा अनुसूचित जाति का दर्जा, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, India News in Hindi - Hindustan
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किसी दूसरे धर्म में धर्मांतरण पर नहीं मिलेगा अनुसूचित जाति का दर्जा, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

SC/ST यानी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष न्यायालय ने कहा है कि किसी भी अन्य धर्म में धर्मांतरण करने से अनुसूचित जाति का दर्ज समाप्त हो जाता है।

Tue, 24 March 2026 11:39 AMNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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किसी दूसरे धर्म में धर्मांतरण पर नहीं मिलेगा अनुसूचित जाति का दर्जा, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

SC/ST यानी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष न्यायालय ने कहा है कि अगर कोई व्यक्ति ईसाई धर्म में धर्मांतरण कर लेता और उसका पालन करता है, तो वह अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं रह सकता। मंगलवार को जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच सुनवाई कर रही थी। सवाल था कि क्या हिंदू धर्म से ईसाई धर्म में जाने वाला व्यक्ति SC/ST एक्ट लगाने के लिए अनुसूचित जाति के दर्जे का दावा कर सकता है?

सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा है। बार एंड बेंच के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई भी व्यक्ति जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानता है, वह अनुसूचित जाति (SC) का सदस्य नहीं हो सकता। किसी अन्य धर्म में परिवर्तन करने पर अनुसूचित जाति का दर्जा खत्म हो जाता है।

बेंच ने कहा कि इस मामले में, याचिकाकर्ता का यह दावा नहीं है कि उसने ईसाई धर्म छोड़कर वापस अपने मूल धर्म को अपना लिया है, या उसे मडिगा समुदाय ने फिर से स्वीकार कर लिया है। यह साबित होता है कि अपीलकर्ता लगातार ईसाई धर्म को मानता रहा और एक दशक से अधिक समय से पादरी के रूप में काम कर रहा है। जो गांव के घरों में नियमित रविवार की प्रार्थनाएं आयोजित करता है। यह भी स्वीकार किया गया है कि कथित घटना के समय, वह घर पर प्रार्थना सभा कर रहा था। ये सभी तथ्य कोई संदेह नहीं छोड़ते कि घटना की तारीख को वह एक ईसाई ही था।

मामला समझें

ईसाई धर्म अपनाने वाला एक शख्स पादरी के तौर पर काम कर रहा था, लेकिन उन्होंने Scheduled Caste, Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities) Act के तहत कुछ लोगों के खिलाफ केस किया था। आरोप लगाए गए थे कि लोगों ने उनके साथ मारपीट की थी। उन्होंने एससी एसटी एक्ट के तहत सुरक्षा की मांग की थी, जिसे आरोपियों ने कोर्ट में चुनौती दी थी। आरोपियों का कहना था कि पादरी ने धर्मांतरण किया था।

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला

लाइव लॉ के मुताबिक, 30 अप्रैल 2025 के आदेश में उच्च न्यायालय ने कहा था कि आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा कि ईसाई धर्म में जाति व्यवस्था का कोई स्थान नहीं है। ऐसे में ईसाई धर्म अपनाने वाला व्यक्ति SC/ST एक्ट की धाराओं का सहारा नहीं ले सकता। तब मामले की सुनवाई जस्टिस हरिनाथ एन कर रहे थे। उन्होंने शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया था। इसके बाद धर्मांतरण कर पादरी बनने वाले शख्स ने स्पेशल लीव पिटीशन दाखिल की थी।