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बंगाल में रात का खौफ खत्म! बांग्लादेश सीमा पर क्या हो रहा कि खुश हो गए ग्रामीण?

पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा ग्रिड मजबूत! शुभेंदु सरकार ने BSF को सौंपी 142.79 एकड़ जमीन। 'डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट' नीति के तहत घुसपैठियों पर एक्शन तेज, अमित शाह ने की तारीफ।

Fri, 29 May 2026 02:20 PMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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बंगाल में रात का खौफ खत्म! बांग्लादेश सीमा पर क्या हो रहा कि खुश हो गए ग्रामीण?

पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ और गोतस्करी रोकने के लिए 'डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट' की सख्त नीति लागू कर दी गई है। राज्य सरकार ने सीमा पर पक्की फेंसिंग (बाड़) के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) को तेजी से जमीन सौंपनी शुरू कर दी है। इस बड़े कदम से न सिर्फ देश की आंतरिक सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि दशकों से घुसपैठ और तस्करी का संताप झेल रहे लाखों भारतीय नागरिकों को सुरक्षित और भयमुक्त माहौल मिलेगा।

बंगाल में सत्ता बदलते ही एक्शन में सरकार

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल सरकार ने सीमा सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। राज्य सरकार अब तक कई सीमावर्ती जिलों में BSF को बाड़ लगाने के लिए 142.79 एकड़ जमीन आधिकारिक रूप से सौंप चुकी है।

यह जमीन कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, मालदा, नदिया और मुर्शिदाबाद समेत कई जिलों में दी गई है। सरकार का लक्ष्य सीमा पर बची हुई लगभग 600 एकड़ बिना बाड़ वाली जमीन का जल्द अधिग्रहण कर वहां मजबूत सुरक्षा घेरा तैयार करना है।

किस जिले में सौंपी गई कितनी जमीन?

  • मुर्शिदाबाद: 38.805 एकड़ (सबसे अधिक)
  • जलपाईगुड़ी: 35.165 एकड़
  • कूचबिहार: 22.95 एकड़

'डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट': घुसपैठियों पर कड़ा प्रहार

राज्य में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं के खिलाफ नई सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बंगाल के सीमावर्ती जिलों में बनाए गए 'होल्डिंग सेंटर्स' (डिटेंशन सेंटर्स) में फिलहाल 386 संदिग्ध घुसपैठियों को रखा गया है।

इनमें 182 पुरुष, 109 महिलाएं और 95 बच्चे शामिल हैं। सबसे ज्यादा मामले उत्तर 24 परगना के बशीरहाट पुलिस जिले में दर्ज किए गए हैं। इन सभी घुसपैठियों को कानूनी प्रक्रिया के बाद वापस उनके देश भेजने (डिपोर्ट) की तैयारी चल रही है।

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केंद्रीय गृह मंत्री ने किया ऐतिहासिक फैसले का स्वागत

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस अभियान की तारीफ करते हुए इसे सरकार की चुनावी गारंटी पूरी होने का बड़ा प्रमाण बताया है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा के समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।

"हमने चुनाव के दौरान कहा था कि सत्ता में आते ही बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग का काम शुरू करेंगे। 'चिकन नेक' क्षेत्र की 121 हेक्टेयर जमीन भी भारत सरकार को सौंप दी गई है। अब घुसपैठिए खुद-ब-खुद वापस जा रहे हैं।" - अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री

घुसपैठ और गोतस्करी: सीमावर्ती इलाकों का दर्द

लंबे समय से भारत-बांग्लादेश की खुली सीमा कई संवेदनशील समस्याओं का केंद्र रही है। इस विवाद की पृष्ठभूमि और स्थानीय लोगों की परेशानियों को इन बिंदुओं से समझा जा सकता है:

खुली सीमा का दुरुपयोग: दशकों से यह सीमा गोतस्करों और अवैध घुसपैठियों के लिए एक सुरक्षित रास्ता रही है।

प्रशासनिक लापरवाही: ग्रामीणों की शिकायत रही है कि पहले रात के अंधेरे में सैकड़ों मवेशियों की तस्करी होती थी, लेकिन स्थानीय पुलिस से शिकायत करने पर कोई सुनवाई नहीं होती थी।

असुरक्षा का माहौल: तेजधार हथियारों के साथ घूमने वाले तस्करों के कारण सीमावर्ती ग्रामीण खौफ में रहते थे।

कृषि भूमि का नुकसान: फेंसिंग न होने की वजह से बांग्लादेशी तस्कर भारतीय किसानों की जमीन का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों के लिए करते थे।

एनडटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अन्य ग्रामीण अरबिंदो सेन ने बताया कि अतीत में पुलिस से कई बार तस्करी की शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा, "हर रात बांग्लादेशी हमारे गांव से 100 से 200 गायें ले जाते थे। अब बाड़बंदी से राहत मिली है। जमीन की नपाई सही से होनी चाहिए और काम जल्द पूरा होना चाहिए।"

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ग्रामीणों को फेंसिंग से राहत, लेकिन मुआवजे की चिंता

सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोग फेंसिंग के काम से बेहद खुश हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अब उन्हें गोतस्करों के खौफ से रातों की नींद नहीं गंवानी पड़ेगी। हालांकि, ग्रामीणों ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपनी जमीन देने के साथ-साथ उचित मुआवजे और पारदर्शी नापजोख की मांग रखी है।

वहीं, कुछ महिलाओं की चिंताएं भी हैं। उनका कहना है कि अस्थाई बाड़ के कारण उनकी कई बीघा पुश्तैनी जमीन तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। उनका मानना है कि सरकार को ग्रामीणों को विश्वास में लेना चाहिए, ताकि किसानों का नुकसान कम हो।

तकनीक और सुरक्षा से लौटी शांति

इलाके में पिछले कुछ सालों में अस्थाई बाड़ से ही काफी सुधार देखने को मिला था। अब पक्की फेंसिंग, BSF की अतिरिक्त चौकियों, स्मार्ट लाइट्स और अत्याधुनिक CCTV कैमरों की निगरानी से सुरक्षा व्यवस्था अभेद्य हो गई है। इन साझा प्रयासों से जमीनी हालात तेजी से बदल रहे हैं और लोग खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

बंगाल में 'डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट' नीति क्या है?

यह बंगाल में अवैध रूप से रह रहे विदेशी घुसपैठियों (विशेषकर बांग्लादेशी और रोहिंग्या) की पहचान करने, दस्तावेजों से उनका नाम हटाने और उन्हें वापस उनके देश भेजने का एक सख्त सरकारी अभियान है।

पश्चिम बंगाल सरकार ने फेंसिंग के लिए BSF को कितनी जमीन दी है?

हालिया रिपोर्ट के अनुसार, फेंसिंग के लिए अब तक 142.79 एकड़ जमीन BSF को सौंपी जा चुकी है, जबकि सरकार का कुल लक्ष्य 600 एकड़ जमीन सौंपने का है।

सीमा पर बाड़ (Fencing) लगने से भारत को क्या फायदा होगा?

पक्की बाड़ लगने से भारत-बांग्लादेश सीमा पर गोतस्करी, अवैध हथियारों की आवाजाही और घुसपैठ पर पूरी तरह रोक लगेगी। इससे देश की राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी।

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'चिकन नेक' इलाके का इस खबर में क्या महत्व है?

'चिकन नेक' (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) रणनीतिक रूप से भारत का एक बेहद अहम हिस्सा है जो नॉर्थ-ईस्ट को देश से जोड़ता है। इस इलाके की 121 हेक्टेयर जमीन की सुरक्षा अब सीधे केंद्र सरकार के अधीन आ गई है, जो घुसपैठ रोकने में गेमचेंजर साबित होगी।