बंगाल में बनने वाली है नई तृणमूल? महाराष्ट्र मॉडल के डर से ममता बनर्जी ने झोंक दी पूरी ताकत
West Bengal Politics: बंगाल की राजनीति में 'साइनगेट' विवाद के बीच 'महाराष्ट्र मॉडल' की चर्चा तेज हो गई है। बीजेपी मंत्री तापस रॉय ने दावा किया है कि ममता बनर्जी की पार्टी के 50 से अधिक विधायक किसी भी वक्त पाला बदल सकते हैं।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में 'साइनगेट' विवाद के बाद अब 'महाराष्ट्र मॉडल' की चर्चा तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) और बीजेपी, दोनों ही पार्टियों के वरिष्ठ नेता अब बंगाल के मौजूदा राजनीतिक हालात को समझाने के लिए इसी 'महा मॉडल' का जिक्र कर रहे हैं। हाल ही में बंगाल की पहली बीजेपी सरकार में कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले तापस रॉय ने दावा किया है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी के 50 से अधिक विधायक किसी भी वक्त पाला बदल सकते हैं।
क्या है 'महा मॉडल' और तापस रॉय का बड़ा दावा?
मार्च 2024 तक टीएमसी में रहे और सोमवार को बीजेपी सरकार में मंत्री पद की शपथ लेने वाले तापस रॉय ने मंगलवार को फेसबुक पोस्ट के जरिए यह सनसनीखेज दावा किया। रॉय का कहना है कि टीएमसी में टूट हो चुकी है और हालात बिल्कुल महाराष्ट्र जैसे हो गए हैं। उनके मुताबिक, पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी 50 विधायकों को लेकर विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) से मिलने पहुंचे थे।
महा मॉडल क्या है?
यह 2022 में महाराष्ट्र में शिवसेना के भीतर हुई उस बगावत का मॉडल है। तब पार्टी के दो-तिहाई विधायकों ने दल-बदल कानून से बचते हुए पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर सफलतापूर्वक दावा ठोक दिया था। एकनाथ शिंदे असली शिवसेना के मालिक बने।
ममता बनर्जी का पलटवार: 'विधायकों को धमकाया जा रहा'
महाराष्ट्र मॉडल से बचने के डर से ममता बनर्जी ने पूरी ताकत झोंक दी है। वे विधायकों को एकजुट रखने के लिए रैली कर रही हैं। अपनी पार्टी को एकजुट रखने की जद्दोजहद में जुटीं पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने मंगलवार को एस्प्लेनेड में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान बागी नेताओं की तुलना 'मीर जाफर' से की।
ममता ने आरोप लगाया, "पार्टी विधायकों को घर से बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है और पुलिस उन्हें टीएमसी छोड़ने को कह रही है। उन्हें नई तृणमूल बनाने के लिए कहा जा रहा है। इसे कौन बनाएगा? वो जो शुरुआत से पार्टी के साथ रहे हैं या वो जो केवल प्रतीकात्मक रूप से जीते हैं?" उन्होंने कहा कि बंगाल बुलडोजर की राजनीति का गवाह बन रहा है और सभी को धमकाया जा रहा है।
धरने में टीएमसी विधायकों की कम मौजूदगी पर तंज
ममता बनर्जी के इस धरने में टीएमसी के 78 में से केवल 8 विधायक और 42 में से सिर्फ 4 सांसद ही शामिल हुए। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ममता के दावों पर पलटवार करते हुए कहा, "ममता बनर्जी के धरने में केवल 3 सांसद और 6 विधायक ही पहुंचे। टीएमसी की हालत अब दयनीय हो गई है।" सीएम अधिकारी ने तंज कसते हुए कहा कि टीएमसी अब 'फल्ता' जैसी हो गई है, जहां विधानसभा चुनाव में पार्टी चौथे नंबर पर रही थी और बीजेपी ने सीट जीत ली।
ऋतब्रत बनर्जी ने दावों को किया खारिज
सोमवार को 'साइनगेट' विवाद के चलते टीएमसी से निष्कासित किए गए विधायक रितब्रत बनर्जी मंगलवार को विधानसभा तो गए, लेकिन उन्होंने तापस रॉय के दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, "जो लोग कह रहे हैं कि मैंने दक्षिण कोलकाता के एक होटल में टीएमसी विधायकों के साथ बैठक की, उन्हें यह साबित करना होगा।" हालांकि, 50 विधायकों के उनके साथ जुड़ने की अटकलों पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की। ऐसी खबरें हैं कि ऋतब्रत बनर्जी आज "विरोधियों की सूची" के साथ विधानसभा पहुंचे हैं। उनके और एक अन्य निष्कासित विधायक संदीपन साहा के नबन्ना में सीएम शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक बैठक में भी शामिल होने की संभावना है।
क्या है पूरा 'साइनगेट' विवाद?
यह पूरा संकट तब गहराया जब रितब्रत और साहा ने विधानसभा अध्यक्ष से शिकायत की कि शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष (LoP) बनाने का प्रस्ताव देने वाले उस पत्र में उनके हस्ताक्षर फर्जी हैं। उनका आरोप है कि 70 में से 14 हस्ताक्षर "ब्लॉक लेटर" (बड़े अक्षरों) में किए गए थे।
टीएमसी के तीन विधायकों- अरूप रॉय, सुभाशीष दास और बहारुल इस्लाम ने एसआईटी (SIT) जांच टीम को बताया है कि वे हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। बैंकशाल कोर्ट ने जांचकर्ताओं को इन विधायकों के लिखावट और हस्ताक्षर के नमूने लेने की अनुमति दे दी है।
अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें और टीएमसी का नया पत्र
टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी, जिन्होंने स्पीकर को यह प्रस्ताव भेजा था, उन्हें 8 जून को सीआईडी (CID) के सामने पेश होने के लिए कहा गया है। स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर वे पहले समन पर पेश नहीं हुए थे।
कानूनी उलझन से बचने के लिए मंगलवार को टीएमसी विधायक कुणाल घोष और आशिमा पात्रा अभिषेक बनर्जी के हस्ताक्षर वाला एक नया पत्र लेकर स्पीकर कार्यालय पहुंचे। कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि मौखिक निर्देशों के चलते कार्यालय सचिव ने पत्र लेने से मना कर दिया। बाद में एक टीएमसी सांसद ने बताया कि पत्र स्पीकर को ईमेल कर दिया गया है।
इस नए पत्र में 2001, 2006, 2011, 2016 और 2021 के उदाहरण दिए गए हैं, जब बिना सभी विधायकों के हस्ताक्षर के भी नेता प्रतिपक्ष को मान्यता दी गई थी। वहीं, बीजेपी मंत्री तापस रॉय ने इस पत्र की वैधता पर सवाल उठाए हैं क्योंकि इसमें निर्वाचित विधायकों के हस्ताक्षर नहीं हैं।




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