नेपाल की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के चीफ का BJP दफ्तर में रेड कार्पेट वेलकम, बालेन शाह को लगेगी मिर्ची
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने रवि लामिछाने से मुलाकात की। उन्होंने ट्वीट किया, ‘हमारी चर्चा भारत-नेपाल विकास साझेदारी और लोगों के बीच आपसी संबंधों पर केंद्रित रही। विकास और समृद्धि को बढ़ावा देने में इनकी अहम भूमिका है।’

नेपाल की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के अध्यक्ष रवि लामिछाने ने मंगलवार को दिल्ली पहुंचकर भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। बीजेपी मुख्यालय में उनके प्रतिनिधिमंडल का भव्य स्वागत किया गया। रेड कारपेट भी बिछाया गया था। यह दौरा भाजपा अध्यक्ष के निमंत्रण पर हुआ है। लामिछाने के नेतृत्व में सत्तारूढ़ दल से जुड़े वरिष्ठ नेता भारत आए हैं। इस मुलाकात को दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पिछले कुछ दिनों से नेपाल में भारत के साथ सीमा विवाद को लेकर तीखी बहस चल रही है। नेपाली प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में कालापानी-लिपुलेख मुद्दे को उठाया था। उन्होंने सीमा विवाद के समाधान में चीन और ब्रिटेन की भूमिका की वकालत की। शाह ने कहा कि विवाद ब्रिटिश भारत काल से जुड़ा है, इसलिए ब्रिटेन को भी शामिल किया जाना चाहिए। इन बयानों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया और कुछ राजनयिक कार्यक्रम भी प्रभावित हुए।
तीसरे पक्ष की भूमिका को भारत ने किया खारिज
भारत ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए किसी भी तीसरे पक्ष की भूमिका को पूरी तरह खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत-नेपाल सीमा विवाद का समाधान केवल द्विपक्षीय स्तर पर होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच 98 प्रतिशत सीमा पहले ही चिह्नित हो चुकी है। बाकी विवादित क्षेत्रों पर गंडक नदी के रास्ते में बदलाव और अतिक्रमण जैसे मुद्दों को संयुक्त रूप से सुलझाया जा रहा है। जायसवाल ने कहा कि द्विपक्षीय मामले में किसी तीसरे देश की दखलंदाजी स्वीकार्य नहीं है।
नेपाल को भारत का क्या संदेश
रवि लामिछाने की दिल्ली यात्रा और भाजपा नेतृत्व से उनकी मुलाकात को ऐसे समय में भारत की सक्रिय कूटनीति का संकेत माना जा रहा है। जब नेपाल के कुछ नेता तीसरे पक्ष को शामिल करने की बात कर रहे हैं, तब भारत पारंपरिक मित्रता को मजबूत करने और सीधे संवाद के जरिए मुद्दों को सुलझाने का रास्ता अपना रहा है। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली और सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित हो सकती है।




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