NDA का नहीं बढ़ेगा कुनबा, उद्धव के लिए गुड न्यूज; शिंदे ने ऑपरेशन टाइगर पर लगाया विराम
टीएमसी के बागी सांसद भाजपा में विलय करेंगे या फिर अलग गुट बनाकर टीएमसी पर दावा ठोकेंगे। स्थिति साफ नहीं है। आज वे लोकसभा स्पीकर से मिलकर संसद में अपने गुट की मान्यता और बैठने की अलग व्यवस्था की मांग कर सकते हैं।

NDA Number Game: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की करारी हार के बाद कई सांसदों ने बगावत कर दिया है। इसकी संख्या अब 20 तक जा पहुंची है। इस बीच खबर आई कि महाराष्ट्र में भी कई सांसद उद्धव ठाकरे की शिवसेना का साथ छोड़ शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं। इससे एनडीए का कुनबा बढ़ने के कयास लगाए जाने लगे थे। हालांकि उद्धव ठाकरे गुट के सांसदों के पाला बदलने और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के संपर्क में होने की अटकलों पर शिंदे गुट ने कड़ा रुख अपनाया है। शिवसेना के मुख्य प्रवक्ता राजू वाघमारे ने इन सभी खबरों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह से झूठ करार दिया है।
पार्टी के भीतर और बाहर चल रही राजनीतिक चर्चाओं पर विराम लगाते हुए राजू वाघमारे ने कहा, "ये सभी बातें पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद हैं। हमारे शीर्ष नेता और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पहले ही यह बात साफ कर दी है कि हमारी तरफ से ऐसा कोई 'ऑपरेशन टाइगर' नहीं चलाया जा रहा है। न ही हमारा ऐसा कोई प्लान है और न ही हमें इसमें कोई दिलचस्पी है।"
पूर्ण बहुमत है, हमें किसी की जरूरत नहीं
वाघमारे ने वर्तमान राजनीतिक स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में अभी कोई चुनाव नहीं होने वाले हैं। उन्होंने कहा, "सरकार के पास पहले से ही पूर्ण बहुमत मौजूद है। ऐसे में हमें अपनी सरकार चलाने के लिए किसी अन्य बाहरी बैसाखी या अन्य दल के सांसदों की कोई आवश्यकता नहीं है।"
उद्धव ठाकरे द्वारा अपने सांसदों के साथ बुलाई गई आपात बैठक पर टिप्पणी करते हुए वाघमारे ने कहा, "उद्धव ठाकरे अपने सांसदों के साथ बैठक कर रहे हैं, यह पूरी तरह से उनकी पार्टी का आंतरिक मामला है। वे क्या करते हैं, इससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है। हमारे लिए जनता का जनादेश बिल्कुल स्पष्ट है। हम इस तरह की किसी भी राजनीतिक गतिविधि में शामिल नहीं हैं और न ही दूसरों के मामलों में हमारी कोई रुचि है।"
शिवसेना प्रवक्ता के इस दो टूक बयान से साफ है कि सत्ताधारी गुट फिलहाल खुद को इस विवाद से दूर रखकर यह संदेश देना चाहता है कि उनकी सरकार पूरी तरह से स्थिर है और उन्हें किसी भी तरह की तोड़-फोड़ की राजनीति की जरूरत नहीं है।
आपको बता दें तृणमूल कांग्रेस के सांसदों के गुट को लेकर अभी तक स्थिति साफ नहीं हुई है कि क्या वह भाजपा में विलय करेंगे या फिर अलग गुट बनाकर टीएमसी पर दावा ठोकेंगे। इस बात की संभावना है कि आज वह लोकसभा स्पीकर से मिलकर संसद में अपने गुट की मान्यता और बैठने की अलग व्यवस्था की मांग कर सकते हैं।




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