Muslims in Bengal Did Not Appreciate AIMIM How Did Barrister Owaisi Handle It बंगाल में मुसलमानों को पसंद नहीं आई AIMIM की 'वकालत', कैसे निपटे बैरिस्टर ओवैसी, India News in Hindi - Hindustan
More

बंगाल में मुसलमानों को पसंद नहीं आई AIMIM की 'वकालत', कैसे निपटे बैरिस्टर ओवैसी

आपको बता दें कि चुनाव के दौरान मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision) के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर विवाद रहा है।

Mon, 4 May 2026 02:09 PMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
share
बंगाल में मुसलमानों को पसंद नहीं आई AIMIM की 'वकालत', कैसे निपटे बैरिस्टर ओवैसी

AIMIM in Bengal: बिहार चुनाव में चौंकाने वाले प्रदर्शन के बाद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) को पश्चिम बंगाल से काफी उम्मीद थी। हालांकि ओवैसी की पार्टी की वोटिंग से पहले ही बड़ा झटका लग गया था जब हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के साथ गठबंधन टूटने के बाद ओवैसी ने बंगाल में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया और 12 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। ये सभी सीटें मुस्लिम बहूल हैं। हालांकि, इस चुनाव में उनका खाता तक नहीं खोला। हुमायूं कबीर जरूर दोनों सीटों पर आगे चल रहे हैं।

ओवौसी ने मालदा जिले की मोथाबारी और सुजापुर, मुर्शिदाबाद की सूती, रघुनाथगंज और कांडी, बीरभूम जिली की नलहाटी और मुरारई, उत्तर 24 परगना जिला की हाबरा, बारासात और बशीरहाट दक्षिण, पश्चिम बर्धमान में आसनसोल उत्तरी और उत्तर दिनाजपुर की करनदिघी सीट पर उम्मीदवार उतारे थे।

चुनाव आयोग के द्वारा दोपहर दो बजे तक जारी आंकड़ों के मुताबिक, मोथाबाड़ी में एआईएमआईएम कैंडिडेट को सिर्फ 995 मत मिले हैं। सुजापुर में 2500, सुती में 741, रघुनाथगंज में रघुनाथगंज में 1400 वोट मिले हैं। हालांकि कांडी में जरूर 11000 से अधिक मतों के साथ दूसरे नंबर पर बनी हुई है। वोट प्रतिशत की बात करें तो अब तक ओवासी की पार्टी को सिर्फ 0.19 प्रतिशत समर्थन मिला है।

आपको बता दें कि चुनाव के दौरान मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision) के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर विवाद रहा है। AIMIM ने इसे एक बड़ा मुद्दा बनाया है। ओवैसी पर एक बार फिर एंटीबीजेपी वोटों को बांटने का आरोप लगा, लेकिन पार्टी का कहना है कि उनका इरादा केवल अल्पसंख्यकों को एक स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व और प्रतिनिधित्व देना है।

AIMIM के स्थानीय नेतृत्व का मानना था कि जिन सीटों पर वे चुनाव लड़ रहे थे, उनमें से कई बिहार के 'सीमांचल' क्षेत्र के करीब हैं। चूंकि बिहार में ओवैसी की पार्टी का आधार मजबूत हुआ है इसलिए उन्हें उम्मीद है कि इसका भौगोलिक और राजनीतिक प्रभाव बंगाल के इन सीमावर्ती क्षेत्रों में भी देखने को मिलेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अधिकांश उम्मीदवार के जमानत जब्त हो गए।

आपको बता दें कि चुनाव से ठीक पहले हुमायूं कबीर (AJUP) के साथ गठबंधन टूटना AIMIM के लिए एक बड़ा मोड़ था। गठबंधन से बाहर निकलने के बाद ओवैसी ने अपनी पूरी ताकत इन 12 सीटों पर झोंक दी थी।