बंगाल में जला मिला करोड़ों का कैश, सूटकेस में रखी थी रकम; टीएमसी से क्या कनेक्शन
टीएमसी से जुड़ी एक और बड़ी घटना सामने आई है। पार्टी के स्टूडेंट यूनियन के ऑफिस में बड़ी संख्या में जले हुए नोट बरामद हुए हैं। इन्हें कई सूटकेस में रखा गया था। आखिर किसने रखे थे यह पैसे…

कोलकाता में एक चौंकाने वाले घटनाक्रम के तहत टीएमसी छात्र यूनियन के दफ्तर से जले हुए नोट मिले हैं। बताया जा रहा है कि यह रकम करोड़ों में हो सकती है। यह रकम सुरेंद्र नाथ कॉलेज के अंदर छात्र यूनियन के ऑफिस में कई सूटकेस में रखी गई थी। इतनी बड़ी संख्या में नोट मिलने के बाद लोगों में काफी गुस्सा है। सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर यह पैसा किसका है?
उठ रहे हैं सवाल
इस तरह से इतनी बड़ी मात्रा में पैसे मिलने पर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर काफी हलचल मच गई है। तमाम सोशल मीडिया हैंडल्स पर वीडियो को शेयर किया जा रहा है। इन वीडियो के साथ लोग टीएमसी को लेकर कमेंट्स कर रहे हैं। एक्स पर एक पोस्ट में लिखा गया है कि इतनी बड़ी रकम को देखिए। साफ पता चलता है कि टीएमसी यूनियन और पार्टी वर्कर्स ने छात्रों और आम जनता के साथ किस कदर लूट की है।
टीएमसी नेता के खेत से मिले थे पैसे
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही पश्चिम बंगाल पुलिस ने टीएसमी नेता के खेत से 2 करोड़ से अधिक की रकम बरामद की थी। यह बरामदगी 24 परगना जिले में हुई थी। पश्चिम बंगाल पुलिस के मुताबिक उन्होंने टीएमसी के शासन वाली बादुरिया नगरपालिका के अध्यक्ष दीपंकर भट्टाचार्य को हाल ही में गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक उसने दीपांकर से कुल 3.04 करोड़ रुपए बरामद किए हैं। इसमें 80 लाख तो गिरफ्तारी के वक्त ही बरामद कर हुए थे। वहीं, 2.24 करोड़ रुपए उनके खेत से बरामद हुए। पुलिस के मुताबिक 500-500 रुपए की नोट ट्रॉलीबैग और बोरियों में भरकर यहां पर छिपाई गई थी।
पुलिस को सूत्रों से जानकारी मिली थी कि दीपांकर भट्टाचार्य ने अपने खेतों में पैसे छिपा रखे हैं। इसके बाद पुलिस ऐक्शन में आ गई। टीम के साथ जब पुलिस दीपांकर के फॉर्म पर पहुंची तो उसने नोटों से भरे चार ट्रॉली बैग और बोरी बरामद की। दीपांकर को बदुरिया के एक होटल से सोमवार को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद मंगलवार को जिला अदालत के सामने पेश किया गया। यहां से आगे की पूछताछ के लिए भट्टाचार्य को पुलिस रिमांड में भेजा गया है। जानकारी के मुताबिक पूछताछ के दौरान भट्टाचार्य ने खुद अपने खेत में कैश होने की बात स्वीकार की थी।




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