Mani Shankar Aiyar statement on the terrorist attack in Pahalgam 'विभाजन का सबसे बदनुमा..'; पहलगाम में हुए आतंकी हमले पर मणिशंकर अय्यर का बयान, India News in Hindi - Hindustan
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'विभाजन का सबसे बदनुमा..'; पहलगाम में हुए आतंकी हमले पर मणिशंकर अय्यर का बयान

Mani Shankar Aiyar: पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमें यह सवाल पूछना होगा कि क्या भारत का मुसलमान आज भारत में सम्मानित महसूस कर रहा है? क्या उसे लग रहा है कि यहां उसका ध्यान भी रखा जा रहा है?

Sun, 27 April 2025 07:49 AMUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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'विभाजन का सबसे बदनुमा..'; पहलगाम में हुए आतंकी हमले पर मणिशंकर अय्यर का बयान

पहलगाम हमले को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने बयान दिया है। उन्होंने इस आतंकी हमले को विभाजन के सबसे अनसुलझे सवालों से जोड़ते हुए कहा कि भारत के लोग आज भी विभाजन का दंश झेल रहे हैं। विभाजन के समय पर कई लोगों के विचार भारतीय राष्ट्रीयता को लेकर अलग थे। कई लोग थे जो गांधी, नेहरू और जिन्ना के विचारों से सहमत नहीं थे। इसलिए आखिरकार विभाजन हुआ।

दिल्ली में एक निजी कार्यक्रम में अपनी बात रखते हुए मणिशंकर अय्यर ने कहा, "कई लोगों ने विभाजन को लगभग रोक दिया था लेकिन फिर भी ऐसा हुआ क्योंकि गांधी जी या मैं कहूंगा पंडित नेहरू और जिन्ना से असहमत कई मुसलमानों के बीच भारत की राष्ट्रीयता और विरासत को लेकर मतभेद थे। कई उठापटक के बीच आज सच्चाई यह है कि हम विभाजन के परिणामों के साथ जी रहे हैं। पर सवाल यही है कि क्या हमें इसी तरह से जीना चाहिए? क्या बंटवारे के अनसुलझे सवाल ही 22 अप्रैल को पहलगाम में हुई भयानक त्रासदी में दिखाई दिए।’’

अय्यर ने कहा कि उपमहाद्वीप के मुसलमानों का मसीहा बनने का पाकिस्तान का सपना साल 1971 में हुए युद्ध और बांग्लादेश के बनने के बाद से ही खत्म हो गया था। उस युद्ध ने यह साबित कर दिया था कि केवल मुसलमान होना ही पर्याप्त नहीं है। हमें भाषा और समानता के अवसर को भी देखना होगा।

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कांग्रेस नेता ने कहा कि आज फिर वही सवाल उठ खड़ा हुआ है, जो विभाजन के पहले भारत के सामने खड़ा था कि हम लगभग 20 करोड़ मुसलमानों का क्या करें। हमें सोचना होगा कि क्या हम जिन्ना के नजरिए को स्वीकार करते हैं? क्या हम यह कहते हैं कि मुसलमान एक अलग देश बन चुका है? क्या हम मुस्लिमों को हमारे बीच तोड़फोड़ करने वाले खतरे के रूप में देखते हैं? या फिर इसका दूसरा पहलू यह है कि मुस्लिमों के देखकर हम कहते हैं कि वह हमारे अभिन्न अंग है।

बकौल अय्यर हमें यह देखना होगा कि वर्तमान में भारत का मुसलमान क्या महसूस कर रहा है, क्या उसे लग रहा है कि उसे स्वीकर किया जा रहा है? क्या उसे लग रहा है कि उसका ध्यान रखा जा रहा है ? क्या मुसलमान यह महसूस कर रहे हैं कि उनका भी ध्यान अच्छी तरह से रखा जा रहा है।

अय्यर ने कहा कि हमें इन सवालों के जवाब तलाशने होंगे। मैं अपने सवालों के जवाब नहीं दूंगा। आप भारत में किसी भी मुसलमान से पूछिए आपको यह जवाब मिल जाएगा।