यूसुफ पठान से लेकर सयोनी घोष तक, ममता बनर्जी के लिए उल्टी पड़ गई 'स्टार' वाली राजनीति?
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। पार्टी के दर्जनों विधायकों के बाद अब सांसदों के भी ममता का साथ छोड़ने की खबरें हैं। इसमें सयोनी घोष, यूसुफ पठान का नाम शामिल है।

पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। पार्टी के 20 सांसद बागी हो चुके हैं। काकोली घोष दास्तीदार के नेतृत्व में यह सांसद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र भी लिख चुके हैं। इसके अलावा हाल ही के विधानसभा चुनाव में जीतकर आए विधायक भी ममता को केवल नाममात्र का नेता बनाने की कगार पर ले आए हैं। हालात यह है कि 4 मई के पहले प्रधानमंत्री पद की दावेदारी तक पहुंचती दिख रहीं ममता और उनकी पार्टी आज अपना अस्तित्व बचाने की तरफ देख रही हैं।
तृणमूल कांग्रेस में मची इस भगदड़ के बीच एक मुद्दा ऐसा है, जिसने सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। टीएमसी बनाने वाली ममता बनर्जी ने शुरुआत से ही प्रसिद्ध चेहरों को अपनी पार्टी से संसद और विधानसभा पहुंचाया है। अब यही चाल उनके लिए घातक साबित हो रही है। विद्रोही गुट में कई ऐसे नाम शामिल हैं, जिन्हें राजनीति में लाने का श्रेय ममता बनर्जी को ही जाता है। तो आइए जानते हैं कौन हैं वह नाम...
यूसुफ पठान
पूर्व भारतीय क्रिकेटर और दो बार के विश्व विजेता टीम के सदस्य यूसुफ पठान को ममता बनर्जी ने ही लोकसभा के जरिए राजनीति में एंट्री दी थी। गुजरात के रहने वाले पठान को उन्होंने बहरामपुर से कांग्रेस के कद्दावर नेता अधीर रंजन चौधरी के खिलाफ उतार दिया। बाद में पठान जीतकर लोकसभा पहुंचे, लेकिन अब वह विद्रोही गुट के सदस्य हैं।
सायोनी घोष
काबा-मदीना गाना गाकर फेमस होने वाली सायोनी घोष एक अभिनेत्री हैं। वह कई बंगाली सीरियल्स और फिल्मों में नजर आ चुकी हैं। 2021 में ममता बनर्जी उन्हें राजनीति में लेकर आईं और देखते ही देखते वह पार्टी की स्टार प्रचारक बन गईं। आसनसोल विधानसभा सीट से चुनाव हारने के बाद भी ममता बनर्जी ने उन पर भरोसा बनाए रखा। जाधवपुर लोकसभा सीट से सांसद सयोनी घोष को लेकर भी चर्चा तेज है कि वह विद्रोही गुट का हिस्सा हैं।
शत्रुघ्न सिन्हा
'खामोश' के लिए फेमस बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता और सांसद शत्रुघ्न सिन्हा पहले भाजपा से सांसद रह चुके हैं। लेकिन बाद में मनमुटाव के चलते वह ममता बनर्जी की पार्टी में शामिल हुए। ममता ने उन पर भरोसा जताकर उन्हें आसनसोल से लोकसभा उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया। यहां उन्होंने तीन लाख से ज्यादा मतों के जीत दर्ज की। सिन्हा को लेकर भी चर्चा है कि वह विद्रोही गुट का हिस्सा हैं। हालांकि इस पर अभी तक कुछ सामने नहीं आया है।
शताब्दी राय
ममता बनर्जी की करीबी माने जाने वाली अभिनेत्री शताब्दी राय तृणमूल कांग्रेस के शुरुआती दिनों से पार्टी के साथ हैं। वह वीरभूमि सीट से पार्टी की सांसद हैं। वह लगातार चार बार लोकसभा चुनाव जीत चुकी हैं। अब ममता के सत्ता से जाने के बाद सबसे ज्यादा मुखर होकर शताब्दी राय ही मैदान में आई हैं। उन्हें विरोधी गुट का उपनेता बनाया गया है।
देव अधिकारी
बंगाल की फिल्मी दुनिया के जाने माने चेहरे देव अधिकारी को भी ममता बनर्जी ही 2014 में राजनीति में लेकर आई थीं। तब से लेकर अब तक वह तीन बार घाटल लोकसभा क्षेत्र से चुने जा चुके हैं। वर्तमान में वह भी विद्रोही गुट का हिस्सा हैं।
इन सभी नामों के अलावा भी ऐसे कई नाम है, जो फिल्मी, क्रिकेट या अन्य किसी जगत के प्रतिष्ठित चेहरे थे। इन्हें ममता बनर्जी राजनीति में लेकर आईं। बाद में टीएमसी के कैडर और व्यक्ति की लोकप्रियता के चलते यह नाम लगातार सत्ता में बने रहे। लेकिन अब यही चाल ममता बनर्जी के ऊपर उल्टी पड़ रही है। क्योंकि पार्टी का मजबूत कैडर तो उनके साथ खड़ा है लेकिन 'पैराशूट लैंडिंग' के रास्ते आए यह नेता उनके साथ नहीं है।




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