निडर होकर फैसले लो, रिजल्ट दो; जब अधिकारियों से बोले PM मोदी, कैसा है 12 साल का रिकॉर्ड
नरेंद्र मोदी वर्ष 2014 में देश के प्रधानमंत्री बने तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती स्वयं अपनी ही छवि से थी। चुनाव के वक्त ही गुजरात मॉडल का नैरेटिव राष्ट्रीय स्तर पर विकास का पर्याय बन चुका था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम बुधवार को एक और उपलब्धि जुड़ गई। निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में लगातार 4,399 दिन (12 वर्ष और 15 दिन) पूरे कर वे सबसे लंबे समय तक इस पद पर रहने वाले नेता बन गए हैं। इससे पूर्व जवाहरलाल नेहरू लगातार 4398 दिन यानी 12 साल 14 दिन प्रधानमंत्री रहे थे। नेहरू 15 अगस्त, 1947 को देश के प्रथम प्रधानमंत्री बने थे, लेकिन वर्ष 1952 में लोकसभा चुनाव के पहले तक वह पांच साल अंतरिम सरकार के प्रमुख के पद पर रहे थे। वे तब तक चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री नहीं बने थे।
नरेंद्र मोदी वर्ष 2014 में देश के प्रधानमंत्री बने तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती स्वयं अपनी ही छवि से थी। चुनाव के वक्त ही गुजरात मॉडल का नैरेटिव राष्ट्रीय स्तर पर विकास का पर्याय बन चुका था। मोदी को इसे राष्ट्रीय स्तर पर सही साबित करके दिखाना था।
लीक से हटकर काम किया
लीक से हटकर चलने वाले शासन प्रमुख के तौर पर उभरी उनकी छवि का राष्ट्रीय स्तर पर इम्तिहान था। प्रधानमंत्री के साथ काम कर चुके अफसरों का कहना है कि बारह वर्षों में मोदी ने अपने निर्णय, क्रियान्वयन क्षमता और विकास की गति से इसे सही साबित करके दिखाया। साथ ही निर्णायक फैसलों से दुनिया में अपनी छवि एक मजबूत नेता के तौर पर पुख्ता कर ली।
गवर्नेंस मॉडल का आधार
प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव रहे नृपेंद्र मिश्र ने एक कार्यक्रम में उल्लेख किया था कि जब वे 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री से मिले तो उन्होंने साफ कहा कि मुझे योजनाओं की आधारशिला रखने में रुचि नहीं, बल्कि योजनाओं की पूर्णता का खाका मेरे सामने होना चाहिए। यही सूत्रवाक्य बारह वर्षों में उनके गवर्नेंस मॉडल का आधार बना।
निडर होकर फैसले लो, नतीजे दो
एक वरिष्ठ नौकरशाह के अनुसार, 2014 में सत्ता संभालते समय मोदी ने नौकरशाही को नया मंत्र दिया- निर्भय होकर फैसले लो और परिणाम दो। उन्होंने अफसरों से कहा कि केवल समस्या मत बताओ, उसका समाधान भी तैयार करो।
मोदी सरकार के 12 वर्षों में कई ऐसे निर्णय लिए गए जिन्हें समर्थक देश की दिशा बदलने वाले सुधारों के रूप में देखते हैं।
अनुच्छेद 370 को खत्म किया : जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाकर राज्य को पूर्ण रूप से संविधान के दायरे में लाने का फैसला किया गया।
तीन तलाक पर रोक : मुस्लिम महिलाओं को एक साथ तीन तलाक देकर विवाह समाप्त करने की प्रथा को कानून बनाकर अपराध घोषित किया।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम : संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का कानून पारित कराया गया।
नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार: केंद्र और राज्यों के समन्वित अभियान, सुरक्षा बलों की बढ़ी तैनाती से वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में कमी आई।
आयुष्मान भारत योजना: गरीब और जरूरतमंद परिवारों को प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर उपलब्ध कराया गया।
अन्न योजना : कोविड महामारी के दौरान शुरू हुई मुफ्त राशन योजना ने करोड़ों परिवारों को खाद्य सुरक्षा दी। आज भी देश के 80 करोड़ लाभार्थियों परिवारों को इसका लाभ मिल रहा है।
जीएसटी, कर सुधार : विभिन्न अप्रत्यक्ष करों को एकीकृत कर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी ) लागू किया गया। कर प्रणाली अधिक पारदर्शी बनी।




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