Madras High Court upholds life sentence of couple who murdered 9year old girl दुनिया में स्वयं नहीं आई, आपसे ही जन्म हुआ; 9 वर्ष की बच्ची की हत्या करने वाले मां-बाप से HC, India News in Hindi - Hindustan
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दुनिया में स्वयं नहीं आई, आपसे ही जन्म हुआ; 9 वर्ष की बच्ची की हत्या करने वाले मां-बाप से HC

मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि बच्चे को संभालने की नैतिक जिम्मेदारी मां-बाप की ही होती है। भले ही वह मानसिक रूप से कमजोर है या फिर विकलांग हो। अगर ऐसे बच्चों की हत्या को मंजूरी देते रहे, तो फिर कोई भी बच्चा जिंदा नहीं बचेगा।

Sun, 15 Feb 2026 02:07 PMUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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दुनिया में स्वयं नहीं आई, आपसे ही जन्म हुआ; 9 वर्ष की बच्ची की हत्या करने वाले मां-बाप से HC

मद्रास हाई कोर्ट ने 9 वर्षीय बच्ची की हत्या के आरोप में उसके मां-बाप की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट की तरफ से कहा गया कि भले ही बच्ची मानसिक रूप से कमजोर थी, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उसको जान से मार दिया जाए, अगर ऐसे बच्चों की हत्या की अनुमति दे दी जाए, तो फिर कोई भी बच्चा जीवित ही नहीं बचेगा।

मद्रास हाई कोर्ट के मदुरै पीठ ने शुक्रवार को दंपत्ति को दोषी करार देते हुए उनकी याचिका को खारिज करते हुए उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा। न्यायमूर्ति जी. के इलंथिरैयन और आर पूर्णिमा की पीठ ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि हर माता-पिता का यह अनिवार्य कर्तव्य होता है कि वे अपने बच्चे की देखभाल करें, चाहे वह बच्चा मानसिक बीमार हो, शारीरिक विकलांग हो या फिर जन्म के साथ ही किसी बीमारी के साथ क्यों न जन्मा हो।

पीठ की तरफ से स्पष्ट किया गया कि किसी का भी व्यक्तिगत कष्ट आपराधिक कानून से ऊपर नहीं हो सकता है। किसी को भी कानून हाथ में लेने का आधिकार नहीं है।

क्या था मामला?

यह पूरा मामला 2018 का है। उस वक्त मृतका की उम्र करीब 9 साल थी। वह जन्म से ही मानसिक रूप से कमजोर थी। इसकी वजह से परेशान माता-पिता 1 अक्तूबर 2018 को उसे विरुधुनगर जिले के कथप्पासामी मंदिर ले गए। वहां पर उन्होंने उसे टैफगौर नामक कीटनाशक पिला दिया। इसकी वजह से बच्ची की हालत बिगड़ गई। आस पास मौजूद लोगों ने हस्तक्षेप करके बच्ची को अस्पताल पहुंचाया। लेकिन 6 अक्तूबर को इलाज के दौरान ही बच्ची की मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने मां-बाप को गिरफ्तार कर लिया और हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया। बाद में कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई।

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इस सजा को कम करवाने या खारिज करवाने के लिए दंपत्ति की तरफ से मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। दंपत्ति की तरफ से तर्क दिया गया कि इस मामले में कोई गवाह नहीं है, विसरा रिपोर्ट में भी जहर का जिक्र नहीं है। हालांकि, अदालत ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि जहर का असर शरीर में धीरे-धीरे कम हो जाता है, ऐसे में विसरा रिपोर्ट का हवाला देना पूरी तरह से गलत है। जहां तक गवाहों के मुकरने की बात है, तो उसका सीधा कोई संबंध नहीं है। अस्पताल में भर्ती कराते समय मां-बाप ने खुद इस बात को स्वीकार किया था कि उन्होंने बच्ची को कीटनाशक दिया था।

अदालत ने कहा कि बच्चे की देखभाल करना माता-पिता की नैतिक जिम्मेदारी होती है। हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि बच्ची स्वयं इस दुनिया में नहीं आई थी, बल्कि आरोपियों ने ही उसे जन्म दिया था।