LPG संकट से कब तक मिल सकती है राहत? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे हैं भारत के 22 टैंकर
फंसे हुए जहाजों में 6 एलपीजी वाहक, एक LNG टैंकर, चार कच्चा तेल टैंकर, एक रासायनिक उत्पाद वाहक, तीन कंटेनर जहाज और दो थोक मालवाहक शामिल हैं। सरकार ने इसे लेकर अपडेट जारी किया है।

पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी जंग से भारत में ईंधन आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इसे लेकर भारत सरकार ने बुधवार को नया अपडेट जारी किया है। सरकार के मुताबिक संघर्ष के बीच मौजूदा समय में फारस की खाड़ी में 22 भारतीय ध्वज वाले जहाजों फंसे हुए हैं। इन जहाजों पर करीब 16.7 लाख टन कच्चा तेल, 3.2 लाख टन LPG और लगभग 2 लाख टन LNG लदा हुआ है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी है।
पोत परिवहन मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया है कि ये जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आगे जाने का इंतजार कर रहे हैं और सरकार भी इन्हें सुरक्षित निकालने के प्रयास में जुटी है। इन जहाजों की वापसी के साथ भारत में गैस की किल्लत से राहत मिल सकती है।
22 जहाज पश्चिमी किनारे पर फंसे
विशेष सचिव ने अपने बयान में बताया कि शुरू में पश्चिम एशिया में युद्ध भड़कने के समय भारतीय जहाज वाले 28 जहाज इस जलडमरूमध्य में मौजूद थे। इनमें से 24 जहाज जलडमरूमध्य के पश्चिमी किनारे पर जबकि चार जहाज पूर्वी किनारे पर थे। पिछले सप्ताह, दोनों किनारों से दो-दो जहाज सुरक्षित निकलने में सफल रहे। उन्होंने कहा कि अब भारतीय ध्वज वाले 22 जहाज पश्चिमी किनारे पर फंसे हैं और उन पर सवार सभी 611 नाविक सुरक्षित हैं।
सरकार की कोशिश जारी
जानकारी के मुताबिक फंसे हुए जहाजों में छह एलपीजी वाहक, एक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) टैंकर, चार कच्चा तेल टैंकर, एक रासायनिक उत्पाद वाहक, तीन कंटेनर जहाज और दो थोक मालवाहक शामिल हैं। इसके अलावा एक ड्रेजर, एक खाली जहाज और तीन जहाज सूखी गोदी में रखरखाव के लिए मौजूद हैं। विशेष सचिव सिन्हा ने अपने बयान में कहा, “युद्ध-प्रभावित जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों को सुरक्षित निकालने के प्रयास जारी हैं।”
होर्मुज से आवाजाही ठप
बता दें कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को खुले समुद्र से जोड़ता है और यह ईंधन की आवाजाही के लिए दुनिया का सबसे प्रमुख जलमार्ग है। अमेरिका और इजरायल के हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद यह प्रभावी रूप से बंद हो गया है। पिछले कुछ दिन में चार जहाजों ने इस क्षेत्र को पार किया है, जिनमें तीन थोक मालवाहक और एक अफ्रामैक्स टैंकर शामिल हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और 60 प्रतिशत एलपीजी का आयात करता है और इसीलिए यह इस जलमार्ग पर निर्भर है।




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