justice yashwant varma impeachment process opposition mp supports जस्टिस यशवंत वर्मा से छिनेगा जज का पद! विपक्षी सांसद भी तैयार, क्या प्लान बना रही सरकार, India News in Hindi - Hindustan
More

जस्टिस यशवंत वर्मा से छिनेगा जज का पद! विपक्षी सांसद भी तैयार, क्या प्लान बना रही सरकार

सरकार के लेवल पर इस बात को लेकर मंथन हो रहा है कि इसे राज्यसभा में पहले पेश किया जाए या फिर पहले लोकसभा से पारित करा लिया जाए। विपक्षी सांसद भी जस्टिस यशवंत वर्मा के महाभियोग प्रस्ताव पर समर्थन के लिए तैयार हैं। बस कांग्रेस की एक डिमांड यह है कि जस्टिस शेखर यादव पर भी महाभियोग लाया जाए।

Wed, 9 July 2025 12:39 PMSurya Prakash लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share
जस्टिस यशवंत वर्मा से छिनेगा जज का पद! विपक्षी सांसद भी तैयार, क्या प्लान बना रही सरकार

सरकारी आवास में बड़े पैमाने पर कैश मिलने पर घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा की कुर्सी छीनने की प्रक्रिया जल्दी ही आगे बढ़ सकती है। उनके खिलाफ सरकार महाभियोग प्रस्ताव को मंजूरी दे चुकी है और 21 जुलाई से शुरू होने वाले मॉनसून सेशन में इसे पेश किया जाएगा। फिलहाल सरकार के लेवल पर इस बात को लेकर मंथन हो रहा है कि इसे राज्यसभा में पहले पेश किया जाए या फिर पहले लोकसभा से पारित करा लिया जाए। विपक्षी सांसद भी जस्टिस यशवंत वर्मा के महाभियोग प्रस्ताव पर समर्थन के लिए तैयार हैं। बस कांग्रेस की एक डिमांड यह है कि जस्टिस शेखर यादव पर भी महाभियोग लाया जाए, जिन्होंने विश्व हिंदू परिषद के कार्यक्रम में सांप्रदायिक बयान दिए थे।

संविधान के आर्टिकल 124 (4) में जजों के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की पूरी प्रक्रिया बताई गई है। इसके अनुसार सुप्रीम कोर्ट या फिर हाई कोर्ट के किसी जज को पद से हटाने के लिए यह जरूरी है कि महाभियोग प्रस्ताव पर लोकसभा के कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर हों। इसके अलावा राज्यसभा के 50 सांसदों का समर्थन हो। यह शर्त सदन में प्रस्ताव लाने के लिए है। इसके अलावा मंजूरी के लिए दो तिहाई बहुमत वाला नियम है। यदि दोनों सदनों से प्रस्ताव बहुमत के साथ पारित हो जाता है तो फिर उसे राष्ट्रपति के समक्ष भेजा जाता है और उनके साइन के साथ ही संबंधित जज को हटना पड़ता है।

हालांकि इस पूरी प्रक्रिया के बीच एक पेच यह भी है कि संसद में जब इस प्रस्ताव को लाया जाता है तो स्पीकर जांच के लिए एक कमेटी का गठन करते हैं। इस कमेटी में भारत के चीफ जस्टिस या फिर सुप्रीम कोर्ट के किसी अन्य जज, किसी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और एक विद्वान कानूनविद को शामिल किया जाता है। कमेटी की रिपोर्ट में यदि संबंधित जज के आचरण पर उठे सवालों को सही पाया जाता है तो फिर सदन में महाभियोग प्रस्ताव पर मतदान की प्रक्रिया कराई जाती है। प्रस्ताव पारित होने पर राष्ट्रपति को इस प्रार्थना के साथ सिफारिश भेजी जाती है कि संबंधित जज को पद से हटा दिया जाए।

महाभियोग पारित हुआ तो इस ऐक्शन से हटने वाले पहले जज होंगे जस्टिस वर्मा

यदि जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ प्रस्ताव पारित हुआ तो महाभियोग की कार्रवाई के तहत हटाए जाने वाले वह देश के पहले जस्टिस होंगे। पूर्व चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने इस प्रकरण में एक कमेटी गठित की थी, जिसने जस्टिस वर्मा की भूमिका गलत पाई थी। इसके अलावा 50 लोगों के बयान भी रिकॉर्ड किए गए हैं। इस पूरी रिपोर्ट को पूर्व चीफ जस्टिस ने पीएम और राष्ट्रपति को महाभियोग की सिफारिश के साथ भेजा था।