justice yashwant varma impeachment inquiry committee reconstituted om birla कैश कांड के आरोपी जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ बनी जांच समिति में बदलाव, अब कौन हुआ शामिल?, India News in Hindi - Hindustan
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कैश कांड के आरोपी जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ बनी जांच समिति में बदलाव, अब कौन हुआ शामिल?

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा के घर में जले नोट मिलने और महाभियोग मामले की जांच कर रही तीन सदस्यीय समिति का पुनर्गठन किया है। जानें जांच कमेटी में बदलाव का कारण और पूरी खबर।

Thu, 26 Feb 2026 08:37 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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कैश कांड के आरोपी जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ बनी जांच समिति में बदलाव, अब कौन हुआ शामिल?

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए पहले से गठित तीन सदस्यीय समिति का पुनर्गठन किया है।

समिति में क्या बदलाव हुआ और क्यों?

इस जांच समिति में पहले सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अरविंद कुमार, मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मणींद्र मोहन श्रीवास्तव और कर्नाटक हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता बी.वी. आचार्य शामिल थे। अब लोकसभा अध्यक्ष ने एक नया आदेश जारी कर मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मणींद्र मोहन श्रीवास्तव की जगह बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री चंद्रशेखर को समिति में शामिल किया है।

बदलाव का कारण

दरअसल मुख्य न्यायाधीश श्रीवास्तव आगामी 6 मार्च को 62 वर्ष की आयु पूरी होने पर सेवानिवृत्त (रिटायर) हो रहे हैं, जबकि मामले की जांच अभी भी जारी है। इसी वजह से समिति का पुनर्गठन करना आवश्यक हो गया।

21 जुलाई को 146 लोकसभा सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को जस्टिस वर्मा को पद से हटाने (महाभियोग) का प्रस्ताव सौंपा था। इस प्रस्ताव का समर्थन करने वाले सांसदों में भारतीय जनता पार्टी के रविशंकर प्रसाद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी जैसे प्रमुख नेता शामिल थे।

12 अगस्त, 2025 को इस बहुदलीय प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया, जिसके साथ ही जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो गई।

आरोप और कार्रवाई

पिछले साल 14 मार्च को दिल्ली में जस्टिस वर्मा के आधिकारिक आवास पर जले हुए नोटों की गड्डियां मिलने के बाद यह विवाद शुरू हुआ था। इस गंभीर घटना के बाद, उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट से वापस उनके मूल न्यायालय, इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया था।

जजों को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया (कानूनी ढांचा)

भारत में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायाधीशों को केवल साबित कदाचार या अक्षमता के आधार पर एक सख्त संसदीय प्रक्रिया के माध्यम से ही हटाया जा सकता है। यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 124(4) (सुप्रीम कोर्ट के लिए) और अनुच्छेद 218 (हाईकोर्ट के लिए) के साथ-साथ न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत संचालित होती है।

1968 के अधिनियम के अनुसार, महाभियोग प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद लोकसभा अध्यक्ष (या राज्यसभा के मामले में सभापति) आरोपों की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय समिति बनाते हैं। इस समिति में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या कोई अन्य न्यायाधीश, किसी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश,

अध्यक्ष/सभापति की नजर में एक प्रतिष्ठित और प्रख्यात न्यायविद जैसे सदस्य होने अनिवार्य हैं।