जगदीप धनखड़ पर कोई दबाव नहीं, बस इस्तीफा दिया और चले गए: पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी
जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर हामिद अंसारी ने कहा कि आज भी मुझे नहीं पता कि क्या हुआ। मुझे बस इतना पता है कि उपराष्ट्रपति का पद बहुत बड़ा पद है, और उस पद से किसी का इस्तीफा देना पहले कभी नहीं हुआ।

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने शुक्रवार को जगदीप धनखड़ के इस्तीफे मामले में प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि क्या हुआ, इस बारे में मुझे नहीं पता। उन पर कोई दबाव नहीं है, उन्होंने बस इस्तीफा दिया और चले गए। जगदीप धनखड़ ने पिछले साल जुलाई महीने में अचानक उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके पीछे उन्होंने खराब स्वास्थ्य वजह बताई थी, लेकिन विपक्षी दलों ने अचानक हुए इस्तीफे पर सवाल खड़े करते हुए केंद्र सरकार को घेरा था।
हामिद अंसारी ने पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर बात करते हुए न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, ''आज भी मुझे नहीं पता कि क्या हुआ। मुझे बस इतना पता है कि उपराष्ट्रपति का पद बहुत बड़ा पद है, और उस पद से किसी का इस्तीफा देना पहले कभी नहीं हुआ। ऐसा सिर्फ एक ही स्थिति में हो सकता है, अगर उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति बन जाएं। क्या हुआ, क्या कहानी है, मुझे नहीं पता। उन पर कोई दबाव नहीं है, उन्होंने बस इस्तीफा दिया और चले गए।"
पूर्व उपराष्ट्रपति ने जुलाई 2025 में हेल्थ केयर को प्राथमिकता देने और मेडिकल सलाह मानने के लिए इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे के लेटर में कहा गया, "हेल्थ केयर को प्राथमिकता देने और मेडिकल सलाह मानने के लिए, मैं संविधान के अनुच्छेद 67(a) के अनुसार, तुरंत प्रभाव से भारत के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देता हूं।" इसमें आगे कहा गया, “मैं महामहिम- भारत की माननीय राष्ट्रपति को उनके अटूट समर्थन और मेरे कार्यकाल के दौरान हमारे बीच बने सुखद, शानदार कामकाजी रिश्ते के लिए दिल से धन्यवाद देता हूं।”
कांग्रेस ने सरकार से पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के लिए विदाई समारोह आयोजित करने का आग्रह किया था। इस्तीफा देने के लंबे समय तक धनखड़ का कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया था, जिसको लेकर भी विपक्ष ने सवाल खड़े किए थे। सूत्रों की मानें तो धनखड़ ने भले ही इस्तीफा स्वास्थ्य कारणों से दिया था, लेकिन इसके पीछे असल वजह अलग थी। दरअसल, सूत्रों का दावा है कि कैशकांड में जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने के लिए विपक्षी दलों के नोटिस को स्वीकार करने की वजह से जगदीप धनखड़ को इस्तीफा देना पड़ा। हालांकि, भाजपा ने इन आरोंपों को सिरे से खारिज किया है।




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